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#CourageInKargil: कारगिल में हर चाल खुद क्यों चलना चाहते थे मुशर्रफ, पाक आर्मी में 'रॉ' की घुसपैठ से थे वाकिफ!

Fri, 17 Jul 2020 09:26 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 17 Jul 2020 09:26 PM IST
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General Pervez Musharraf hidden all information in Kargil war, Nawaz Sharif had not told anything
परवेज मुशर्रफ (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कारगिल की लड़ाई में तत्कालीन पाकिस्तानी आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ कब कौन सी चाल चलेंगे, ये किसी को मालूम नहीं था। उन्होंने न तो उस वक्त के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ कुछ साझा किया और न ही पाकिस्तानी आर्मी के शुरुआती कदमों की भनक किसी को लगने दी। पाकिस्तानी फौज के जनरल परवेज मुशर्रफ के धोखे को समझने वाला कोई शख्स नहीं था। पाकिस्तानी सेना और जेहादियों के दस्ते कारगिल में पहुंच चुके थे, मगर बड़े ओहदे वाले जनरल परवेज के कई सहयोगी इससे अनभिज्ञ थे।

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कारगिल लड़ाई में सेना प्रमुख रहे वेद प्रकाश मलिक ने अपनी किताब 'फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी' के चेप्टर 'दा डार्क विन्टर' में ऐसे कई खुलासे किए हैं। जनरल परवेज, अपनी आर्मी की कमजोरी समझते थे। उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी (रॉ) की पहुंच का अहसास था। वे यह भी जानते थे कि रॉ, पाकिस्तानी सेना में कहां तक घुसपैठ कर सकती है। यही वजह रही कि उन्होंने कारगिल लड़ाई से जुड़ी अनेक रणनीतिक बातें अंतिम समय तक आर्मी के बड़े अफसरों से छिपा लीं।
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यहां तक कि पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ को भी कुछ नहीं बताया गया। 'दा डार्क विन्टर' में वीपी मलिक ने लिखा है कि रॉ ने लड़ाई से पहले और लड़ाई के दौरान पाकिस्तान की तरफ वाली कई फोन कॉल इंटरसेप्ट की थीं। इसके जरिए जो बातचीत रिकॉर्ड हुई, उसमें कई सनसनीखेज खुलासे हुए। वो बातचीत यह साबित करने के लिए काफी थी कि कारगिल लड़ाई का खाका पूरी तरह से परवेज मुशर्रफ से खींचा था। 
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प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों को कारगिल लड़ाई के बारे में ज्यादा कुछ नहीं मालूम था। केवल उन्हें ही क्यों, पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना के अधिकारियों को भी हर खबर नहीं मिल पाई। परवेज मुशर्रफ जानते थे कि कारगिल लड़ाई की सूचनाएं जितने ज्यादा लोगों तक पहुंचेंगी, वह उतना ही नुकसान साबित होगा। पाकिस्तानी आर्मी में रॉ की घुसपैठ से वे परिचित थे। यह भी समझते थे कि देर सवेर उनके प्लान की भनक रॉ को लग सकती है। 

पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसरों और नौकरशाहों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पाकिस्तानी सेना के साथ जेहादियों के दस्ते भी 'एलओसी' के पार गए हैं। भारतीय सेना यही समझे कि कारगिल की पहाड़ियों पर केवल जेहादी पहुंचे हैं, इसके लिए मुशर्रफ ने रेडियो पर जेहादियों की स्थानीय भाषाओं में झूठे संदेश प्रसारित करा दिए। रॉ की मजबूत पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने परवेज मुशर्रफ और उनके विश्वासपात्र लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अजीज खान के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली।

इसमें मुशर्रफ की बातों से साफ पता चला रहा था कि कारगिल लड़ाई का जो खाका खींचा गया है, उसके बारे में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अंधेरे में रखा गया है। हैरानी वाली बात ये रही कि पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना के टॉप कमांडरों को छोड़कर बाकी किसी को स्पष्ट जानकारी नहीं थी। पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी हुए सिग्नल में कहा गया था कि कुछ जेहादी दस्ते भारतीय सीमा में घुसे हैं। बाद में जब कारगिल की लड़ाई शुरु हुई तो भी मुशर्रफ ने अपना प्लान सार्वजनिक नहीं किया।


कारगिल की लड़ाई खत्म होने के कई साल बाद खुद नवाज शरीफ ने यह बात स्वीकार की थी कि परवेज मुशर्रफ बहुत ज्यादा शक्तिशाली हो गया था। उसके हाथ में आर्मी की कमान सौंपना, मेरी सबसे बड़ी गलती थी। मुशर्रफ ने रॉ को धोखा देने के लिए कारगिल इलाके में एलओसी पर झूठे रेडियो संदेश जारी करा दिए। ये संदेश 'बाल्टी और पश्तो' भाषा में थे। इनमें जेहादी आपस में बातचीत कर रहे थे। मुशर्रफ की चाल थी कि रॉ व मिलिट्री इंटेलिजेंस ये संदेश सुनकर गुमराह हो जाए। भारतीय एजेंसियां ये समझें कि कारगिल में केवल जेहादी आए हैं, पाकिस्तानी आर्मी नहीं है।

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