{"_id":"5c373ce2bdec2273504f6cd0","slug":"general-bipin-rawat-says-homosexuality-is-not-accepted-in-the-army","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनरल रावत बोले- सेना में समलैंगिकता स्वीकार नहीं, इसे आर्मी में नहीं किया जा सकता लागू ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जनरल रावत बोले- सेना में समलैंगिकता स्वीकार नहीं, इसे आर्मी में नहीं किया जा सकता लागू
Thu, 10 Jan 2019 06:08 PM IST
शशांक गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शशांक गौर
Updated Thu, 10 Jan 2019 06:08 PM IST
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Army Chief Bipin Rawat
- फोटो : PTI
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थल सेना प्रमुख बिपिन रावत ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अपराध के दायरे से हटाने के फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि इसे सेना में लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेना में ऐसी चीजों पर रोक है और सेना कानून के ऊपर नहीं है।
बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को खत्म कर दिया है। यह धारा अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध मानती थी। जबकि कोर्ट ने कहा कि यह धारा बराबरी के अधिकार का उल्लंघन करती है।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एडल्ट्री पर दिए गए फैसले के बारे रावत ने कहा कि इस मामले में सेना रुढ़िवादी है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे पाप की इजाजत सेना में नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एडल्ट्री कानून को खत्म करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था। कोर्ट के मुताबिक यह महिलाओं के व्यक्तित्व पर दाग लगाता है और उसे पति का गुलाम बनाता है।
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वहीं उन्होंने कहा कि सेना ने चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर बेहतर तरीके से स्थिति को संभाला है और चिंता का कोई कारण नहीं होना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थिति को और सुधारने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘जम्मू कश्मीर में शांति के लिए हम केवल समन्वयक हैं।’ जनरल रावत ने कहा, ‘हमने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर स्थिति बेहतर तरीके से संभाली है।’ उन्होंने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं होनी चाहिए।
अफगानिस्तान में तालिबान से अमेरिका और रूस की बातचीत पर जनरल रावत ने कहा, ‘अफगानिस्तान में हमारे हित हैं। हम इससे अलग नहीं हो सकते।’ उन्होंने कहा, ‘यही स्थिति जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं की जा सकती। राज्य में हमारी शर्तों पर ही बातचीत होगी।’ थल सेना प्रमुख ने कहा कि बातचीत और आतंक एक साथ नहीं चल सकता, यह जम्मू कश्मीर पर भी लागू होता है।
सेनाध्यक्ष ने कहा कि 20 जनवरी को सेना की नॉदर्न कमांड को नई स्नाइपर राइफल मिल जाएंगी। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर की परिस्थिति को बेहतर नियंत्रण में लाया जाना चाहिए। हम हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के दृष्टिकोण को अपना रहे हैं। लेकिन आतंकियों को जमीन पर आने की पेशकश की गई है। इससे कौन प्रभावित हो रहा है? कश्मीर के लोग खुद।
बिपिन रावत ने कहा, 'मैंने इस बात को देखा है कि हमारे कुछ वरिष्ठों में एकता नहीं है। मुझे लगता है कि उनमें एकता होनी चाहिए। हमारे वरिष्ठों का एक बहुत मजबूत समुदाय है जिसकी जरुरत मुख्यधारा के समर्थन में है। ऐसा तभी हो सकता है जब सभी एक रहें और उनमें एकता बनी रहे।' हुर्रियत पर उन्होंने कहा, 'हमारा रुख एकदम साफ है कि बंदूक छोड़िए और पश्चिमी पड़ोसी से समर्थन लेना छोड़ दें। बातचीत तभी हो सकती है जब हिंसा का रास्ता छोड़ दिया जाए।'
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बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को खत्म कर दिया है। यह धारा अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध मानती थी। जबकि कोर्ट ने कहा कि यह धारा बराबरी के अधिकार का उल्लंघन करती है।
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सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एडल्ट्री पर दिए गए फैसले के बारे रावत ने कहा कि इस मामले में सेना रुढ़िवादी है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे पाप की इजाजत सेना में नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एडल्ट्री कानून को खत्म करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था। कोर्ट के मुताबिक यह महिलाओं के व्यक्तित्व पर दाग लगाता है और उसे पति का गुलाम बनाता है।
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वहीं उन्होंने कहा कि सेना ने चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर बेहतर तरीके से स्थिति को संभाला है और चिंता का कोई कारण नहीं होना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थिति को और सुधारने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘जम्मू कश्मीर में शांति के लिए हम केवल समन्वयक हैं।’ जनरल रावत ने कहा, ‘हमने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर स्थिति बेहतर तरीके से संभाली है।’ उन्होंने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं होनी चाहिए।
अफगानिस्तान में तालिबान से अमेरिका और रूस की बातचीत पर जनरल रावत ने कहा, ‘अफगानिस्तान में हमारे हित हैं। हम इससे अलग नहीं हो सकते।’ उन्होंने कहा, ‘यही स्थिति जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं की जा सकती। राज्य में हमारी शर्तों पर ही बातचीत होगी।’ थल सेना प्रमुख ने कहा कि बातचीत और आतंक एक साथ नहीं चल सकता, यह जम्मू कश्मीर पर भी लागू होता है।
सेनाध्यक्ष ने कहा कि 20 जनवरी को सेना की नॉदर्न कमांड को नई स्नाइपर राइफल मिल जाएंगी। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर की परिस्थिति को बेहतर नियंत्रण में लाया जाना चाहिए। हम हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के दृष्टिकोण को अपना रहे हैं। लेकिन आतंकियों को जमीन पर आने की पेशकश की गई है। इससे कौन प्रभावित हो रहा है? कश्मीर के लोग खुद।
बिपिन रावत ने कहा, 'मैंने इस बात को देखा है कि हमारे कुछ वरिष्ठों में एकता नहीं है। मुझे लगता है कि उनमें एकता होनी चाहिए। हमारे वरिष्ठों का एक बहुत मजबूत समुदाय है जिसकी जरुरत मुख्यधारा के समर्थन में है। ऐसा तभी हो सकता है जब सभी एक रहें और उनमें एकता बनी रहे।' हुर्रियत पर उन्होंने कहा, 'हमारा रुख एकदम साफ है कि बंदूक छोड़िए और पश्चिमी पड़ोसी से समर्थन लेना छोड़ दें। बातचीत तभी हो सकती है जब हिंसा का रास्ता छोड़ दिया जाए।'