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Garbage Management: दिल्ली के वैश्विक शहर बनाने में कूड़ा प्रबंधन बड़ी चुनौती, एमसीडी के कदम कागजी
Wed, 09 Apr 2025 03:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 09 Apr 2025 03:05 PM IST
सार
दिल्ली में 60 लाख के करीब आवासीय इकाइयां हैं। इनमें से केवल 12 लाख के करीब इकाइयों से ही हाउस टैक्स लिया जाता है। नगर निगम ने हाउस टैक्स के साथ ही कचरा प्रबंधन शुल्क लेने की घोषणा की है। यानी इस तरीके से 48 लाख के करीब आवासीय इकाइयों से कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा।
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दिल्ली में कचरे का पहाड़
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली नगर निगम ने हाउस टैक्स के साथ-साथ कचरा निस्तारण के लिए भी मासिक शुल्क लेने की घोषणा कर दी है। अब प्रत्येक आवासीय इकाइयों को 50 रूपये से 200 रुपये तक का मासिक शुल्क कचरा निस्तारण के लिए देना होगा। व्यापारिक इकाइयों के लिए रेहड़ी पटरी वालों के लिए 100 रुपये मासिक से लेकर बड़े होटलों के लिए अधिक शुल्क देना तय किया गया है। दिल्ली नगर निगम को इस तरीके से 150 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। निगम इसे कचरा निस्तारण के लिए आवश्यक कदम बता रहा है, लेकिन नगर निगम के इस कदम में कई बड़ी खामियां हैं जिसके कारण इसका सकारात्मक असर दिखने की कोई संभावना नहीं है।
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दिल्ली में 60 लाख के करीब आवासीय इकाइयां हैं। इनमें से केवल 12 लाख के करीब इकाइयों से ही हाउस टैक्स लिया जाता है। नगर निगम ने हाउस टैक्स के साथ ही कचरा प्रबंधन शुल्क लेने की घोषणा की है। यानी इस तरीके से 48 लाख के करीब आवासीय इकाइयों से कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा।
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उपभोक्ताओं के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि इस टैक्स का अर्थ यह नहीं है कि अब लोगों के घरों से कचरा एकत्रित किया जाएगा और अब कोई गंदगी नहीं होगी। बल्कि सच्चाई यह है कि इस समय जिस तरह छोटे वाहनों के द्वारा कॉलोनियों से कचरा एकत्र किया जा रहा है, उसी तरह कचरा एकत्र किया जाएगा। लेकिन अब तक यह व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क थी। अब इसके लिए हाउस टैक्स के साथ कचरा सफाई के लिए भी शुल्क लिया जाएगा।
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यानी इस व्यवस्था से कचरा उठाने की व्यवस्था में किसी तरह का परिवर्तन नहीं आएगा। हालांकि, नगर निगम पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत कुछ जगहों से निजी कंपनियों के माध्यम से कचरा उठाने की योजना बना रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसका विस्तार किया जा सकता है।
शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगांई ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली में 1797 अनधिकृत कॉलोनियां हैं। यह संख्या वास्तविक तौर पर 2000 से कुछ अधिक हो सकती है। इन कॉलोनियों में दिल्ली की करीब 40 प्रतिशत आबादी निवास करती है। मोटे तौर पर माना जा सकता है कि इन इलाकों से दिल्ली का 40 प्रतिशत कचरा निकलता होगा। लेकिन इन इलाकों के अनधिकृत निवासों से कोई हाउस टैक्स नहीं लिया जाता। ऐसे में यहां के कचरे के प्रबंधन पर दिल्ली नगर निगम की यह योजना लागू नहीं हो सकती। इस तरह नगर निगम के प्लान में बड़ी गड़बड़ी है। इसका सफल होना संभव नहीं है।
अनेक लोग लंबे समय तक हाउस टैक्स नहीं देते। कई बार लंबे समय के बाद लगने वाले कैंपों में लगकर लोग अपने हाउस टैक्स का भुगतान करते हैं। यदि हाउस टैक्स के साथ ही सफाई का शुल्क लिया जाएगा तो यह शुल्क भी लंबे समय तक अटका रहेगा। ऐसे में इस योजना के पूरे होने पर संदेह है।
दिल्ली को साफ रखने के लिए ये उपाय हो सकते हैं कारगर
जगदीश ममगांई ने कहा कि दिल्ली को यदि कचरा मुक्त रखना है तो इसके लिए व्यापक उपायों की आवश्यकता है। सबसे पहले तो 60 मीटर चौड़ी सड़कों से लेकर चौड़ी गलियों तक का कचरा मशीनीकृत इकाइयों के द्वारा उठाया जाना चाहिए। प्रति आधे किलोमीटर में सफाई कर्मियों की संख्या सुनिश्चित करनी चाहिए और इस इलाके में गंदगी को हटाने की उन पर पूरी जिम्मेदारी होनी चाहिए। सफाई न होने की दशा में इन पर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। नगर निगम में सफाई कर्मियों की कमी दिल्ली के गंदा रहने का बड़ा कारण है। इसके लिए पर्याप्त कर्मियों की भर्ती की जानी चाहिए।