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Amit Shah: आनंद में NCDFI मुख्यालय का शिलान्यास, लागत ₹32 करोड़; शाह ने ई-मार्केटिंग संघों को सम्मानित किया
Sat, 30 Dec 2023 11:15 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 30 Dec 2023 11:15 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में राष्ट्रीय सहकारी डेयरी संघ कार्यालय (NCDFI) का शिलान्यास किया। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल भी उनके साथ मौजूद रहे।
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गुजरात के गांधीनगर में कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह (वीडियो ग्रैब)
- फोटो : social media
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विस्तार
गुजरात के आनंद में राष्ट्रीय सहकारी डेयरी संघ कार्यालय (NCDFI) का कार्यालय खुलेगा। शनिवार को केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एनसीडीएफआई के कार्यालय भवन की आधारशिला रखी। गौरतलब है कि एनसीडीएफआई सहकारी डेयरी क्षेत्र का शीर्ष संगठन है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहकारी समितियां शामिल होती हैं। शाह ने बताया कि मुख्यालय का निर्माण लगभग 32 करोड़ की लागत से हुआ है।
सहकारी डेयरियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, आज गांधीनगर में एनसीडीएफआई ई-मार्केट अवार्ड 2023 समारोह में डेयरी उद्योग में ई-मार्केटिंग को बढ़ावा देने वाले सदस्य संघों को सम्मानित किया गया। उन्होंने समृद्ध होते डेयरी उद्योग को लेकर खुशी का इजहार किया। दुग्ध उत्पादन के मामले में शीर्ष देश बन चुके भारत के बारे में शाह ने कहा, अधिकांश उत्पादन सहकारी डेयरियों के माध्यम से किया गया है, इसलिए भारत अग्रणी राष्ट्र बन चुका है।
नया मुख्यालय 100 फीसदी ग्रीन बिल्डिंग
शाह ने कहा, सहकारी डेयरी चलाने के लिए पोषित करना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए कई संस्थाएं बनानी होंगी। यह काम एनसीडीएफआई करेगी। एक तरह से एनसीडीएफआई सभी डेयरियों का मार्गदर्शन कर रहा है। शाह ने कहा कि श्वेत क्रांति की शुरुआत 'वासी' गांव से हुई थी। अब एनसीडीएफआई का मुख्यालय इसी गांव के जिले- आनंद में लगभग 7000 वर्ग मीटर क्षेत्र में कराया जा रहा है।सौर ऊर्जा संयंत्र के माध्यम से संचालित नया मुख्यालय भवन 100 प्रतिशत ग्रीन बिल्डिंग होगी।
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दूध उत्पादन में 24% हिस्सेदारी भारत की
उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि एनसीडीएफआई की यह पहल सहकारी डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने बताया कि आनंद जिले में एनसीडीएफआई मुख्यालय भवन की आधारशिला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रखी। शाह ने कहा कि भारत दुनिया में हो रहे दूध उत्पादन में 24% हिस्सेदारी रखता है। उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर पहुंच चुके भारत में पिछले 8 वर्षों में भारत में दूध उत्पादन में लगभग 51 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह दुनिया में सबसे अधिक है।
NCDFI का मुख्याल आनंद जिले में, 32 करोड़ की लागत
शाह ने कहा, 32 करोड़ रुपये में एनसीडीएफआई मुख्यालय संगठन के निर्बाध संचालन में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि इससे डेयरी क्रांति को गति देने में भी सुविधा मिलेगी। कामयाबी पाने वाले लोगों को सम्मानित करने के बाद शाह ने कहा, हमारे देश में डेयरी और खासकर सहकारी डेयरी सेक्टर ने बहुआयामी लक्ष्य हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर दूध का व्यापार सहकारी क्षेत्र नहीं करता है तो दूध का उत्पादन बिचौलिए और दूध का इस्तेमाल करने वाले लोगों तक ही सीमित रह जाता है।
भारत को पिछले 50 वर्षों में मिली अभूतपूर्व कामयाबी
केंद्रीय सहकारिता मंत्री के मुताबिक, सहकारी क्षेत्र दूध का व्यापार सहकारी ढंग से करता है। ऐसा करने पर इसमें कई आयाम समाहित हो जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसका मकसद केवल लाभ कमाना नहीं होता। इससे समाज, खेती, पशुपालकों, गांवों, दुग्ध उत्पादकों के साथ-साथ देश को भी बहुआयामी लाभ होता है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले 50 वर्षों में इस सफलता की कहानी का अनुभव भी किया है।
डेयरी क्षेत्र में सरदार पटेल की भूमिका बेहद अहम रही
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय डेयरियों ने दूध उत्पादन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने इतिहास में हुई पहल का जिक्र कर बताया, 1946 में जब गुजरात में एक डेयरी ने शोषण शुरू किया तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने त्रिभुवन भाई को इसके खिलाफ प्रेरित किया। 1946 में 15 गांवों में छोटी-छोटी डेयरियां शुरू की गईं। उन्होंने कहा कि 1946 में शोषण के खिलाफ उठाई गई आवाज बड़े आंदोलन में बदल गई। यहीं से देश में श्वेत क्रांति का विचार आया।
अमूल फेडरेशन का टर्नओवर 72000 करोड़ रुपये
बकौल शाह, एनडीबीबी की शुरुआत के बाद बीते लगभग सात दशकों में कई सहकारी डेयरियां विकसित हो चुकी हैं। अमूल हर दिन लगभग 40 मिलियन लीटर दूध प्रोसेस करता है। 36 लाख बहनें दूध का भंडारण करती हैं। हर हफ्ते उन्हें दूध की कीमत भी मिलती है। शाह ने कहा कि 2021-22 में अमूल फेडरेशन का टर्नओवर 72000 करोड़ रुपये रहा। इससे साफ है कि डेयरी और दुग्ध उत्पादन काफी समृद्ध करने वाला सेक्टर है।
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सहकारी डेयरियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, आज गांधीनगर में एनसीडीएफआई ई-मार्केट अवार्ड 2023 समारोह में डेयरी उद्योग में ई-मार्केटिंग को बढ़ावा देने वाले सदस्य संघों को सम्मानित किया गया। उन्होंने समृद्ध होते डेयरी उद्योग को लेकर खुशी का इजहार किया। दुग्ध उत्पादन के मामले में शीर्ष देश बन चुके भारत के बारे में शाह ने कहा, अधिकांश उत्पादन सहकारी डेयरियों के माध्यम से किया गया है, इसलिए भारत अग्रणी राष्ट्र बन चुका है।
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नया मुख्यालय 100 फीसदी ग्रीन बिल्डिंग
शाह ने कहा, सहकारी डेयरी चलाने के लिए पोषित करना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए कई संस्थाएं बनानी होंगी। यह काम एनसीडीएफआई करेगी। एक तरह से एनसीडीएफआई सभी डेयरियों का मार्गदर्शन कर रहा है। शाह ने कहा कि श्वेत क्रांति की शुरुआत 'वासी' गांव से हुई थी। अब एनसीडीएफआई का मुख्यालय इसी गांव के जिले- आनंद में लगभग 7000 वर्ग मीटर क्षेत्र में कराया जा रहा है।सौर ऊर्जा संयंत्र के माध्यम से संचालित नया मुख्यालय भवन 100 प्रतिशत ग्रीन बिल्डिंग होगी।
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दूध उत्पादन में 24% हिस्सेदारी भारत की
उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि एनसीडीएफआई की यह पहल सहकारी डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने बताया कि आनंद जिले में एनसीडीएफआई मुख्यालय भवन की आधारशिला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रखी। शाह ने कहा कि भारत दुनिया में हो रहे दूध उत्पादन में 24% हिस्सेदारी रखता है। उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर पहुंच चुके भारत में पिछले 8 वर्षों में भारत में दूध उत्पादन में लगभग 51 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह दुनिया में सबसे अधिक है।
NCDFI का मुख्याल आनंद जिले में, 32 करोड़ की लागत
शाह ने कहा, 32 करोड़ रुपये में एनसीडीएफआई मुख्यालय संगठन के निर्बाध संचालन में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि इससे डेयरी क्रांति को गति देने में भी सुविधा मिलेगी। कामयाबी पाने वाले लोगों को सम्मानित करने के बाद शाह ने कहा, हमारे देश में डेयरी और खासकर सहकारी डेयरी सेक्टर ने बहुआयामी लक्ष्य हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर दूध का व्यापार सहकारी क्षेत्र नहीं करता है तो दूध का उत्पादन बिचौलिए और दूध का इस्तेमाल करने वाले लोगों तक ही सीमित रह जाता है।
भारत को पिछले 50 वर्षों में मिली अभूतपूर्व कामयाबी
केंद्रीय सहकारिता मंत्री के मुताबिक, सहकारी क्षेत्र दूध का व्यापार सहकारी ढंग से करता है। ऐसा करने पर इसमें कई आयाम समाहित हो जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसका मकसद केवल लाभ कमाना नहीं होता। इससे समाज, खेती, पशुपालकों, गांवों, दुग्ध उत्पादकों के साथ-साथ देश को भी बहुआयामी लाभ होता है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले 50 वर्षों में इस सफलता की कहानी का अनुभव भी किया है।
डेयरी क्षेत्र में सरदार पटेल की भूमिका बेहद अहम रही
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय डेयरियों ने दूध उत्पादन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने इतिहास में हुई पहल का जिक्र कर बताया, 1946 में जब गुजरात में एक डेयरी ने शोषण शुरू किया तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने त्रिभुवन भाई को इसके खिलाफ प्रेरित किया। 1946 में 15 गांवों में छोटी-छोटी डेयरियां शुरू की गईं। उन्होंने कहा कि 1946 में शोषण के खिलाफ उठाई गई आवाज बड़े आंदोलन में बदल गई। यहीं से देश में श्वेत क्रांति का विचार आया।
अमूल फेडरेशन का टर्नओवर 72000 करोड़ रुपये
बकौल शाह, एनडीबीबी की शुरुआत के बाद बीते लगभग सात दशकों में कई सहकारी डेयरियां विकसित हो चुकी हैं। अमूल हर दिन लगभग 40 मिलियन लीटर दूध प्रोसेस करता है। 36 लाख बहनें दूध का भंडारण करती हैं। हर हफ्ते उन्हें दूध की कीमत भी मिलती है। शाह ने कहा कि 2021-22 में अमूल फेडरेशन का टर्नओवर 72000 करोड़ रुपये रहा। इससे साफ है कि डेयरी और दुग्ध उत्पादन काफी समृद्ध करने वाला सेक्टर है।