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हार पर रार: जी-23 के नेता 24 घंटे में दोबारा कर रहे बैठक, अधीर रंजन चौधरी और पी चिदंबरम हुए नाराज
Thu, 17 Mar 2022 10:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 17 Mar 2022 10:11 PM IST
सार
कांग्रेस के जी-23 सदस्य (असंतुष्ट खेमा) 24 घंटे में दूसरी बार एक साथ बैठक के लिए इकट्ठे हुए हैं।वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे लेकर तंज कसा है।
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पी चिदंबरम (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
विस्तार
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है। हार का ठीकरा पार्टी प्रदेश अध्यक्षों के सिर पर फोड़ते हुए पार्टी आला कमान ने पांचों प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफा मांग लिया था। दूसरी तरफ पार्टी के जी-23 सदस्य (असंतुष्ट खेमा) 24 घंटे में दूसरी बार एक साथ बैठक के लिए इकट्ठे हुए हैं। एक बार फिर इस ग्रुप के सभी सदस्य नेता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के घर इकट्ठे हुए हैं। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी हर कांग्रेसी से बात करने को तैयार हैं, अगर सबकी मंशा ठीक है तो बात करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
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24 घंटे में जी-23 नेता कर रहे दोबारा बैठक
कांग्रेस के असंतुष्ट खेमा 24 घंटे में दोबारा बैठक कर रहा है। जी-23 सदस्यों की 24 घंटे में दूसरी बैठक ने पार्टी हाई कमान के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इससे पहले दिन में चर्चा थी कि गुलाम नबी आजाद सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा था कि वे सोनिया गांधी के सामने जी-23 सदस्यों का रुख स्पष्ट करेंगे।
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पी चिदंबरम ने जी-23 नेताओं के रूख को लेकर जताई नाराजगी
जी-23 नेताओं के रूख को लेकर पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भी नाराज हैं। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी की हार के लिए अकेले गांधी परिवार ही जिम्मेदार नहीं है। गांधी परिवार ने पद छोड़ने की पेशकश की थी, लेकिन इसे सीडब्ल्यूसी ने स्वीकार नहीं किया। तो, अब हमारे पास क्या विकल्प है? उन्होंने आगे कहा कि हमें एक नए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है, लेकिन जल्दी से जल्दी यह अगस्त तक हो सकता है। तब तक मैं व अन्य मानते हैं कि सोनिया गांधी प्रभारी का नेतृत्व करती रहें। उन्होंने कांग्रेस के जी -23 पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पार्टी तोड़ने वाला काम नहीं करना चाहिए।
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मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी लगाया था आरोप
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को जी-23 नेताओं पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद भी जी-23 समूह के नेता बार-बार बैठकें कर रहे हैं। उनका मकसद पार्टी को तोड़ने का लगता है। उन्होंने यह भी कहा था कि पूरी कांग्रेस में कोई भी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कमजोर नहीं कर सकता। पार्टी के सभी लोग उनके साथ खड़े हैं।
G-23 समूह क्या है?
G-23 समूह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 2020 में जब पहली बार इन नेताओं का समूह चर्चा में आया तब इसमें 23 नेता शामिल थे। इसलिए इन्हें G-23 कहा गया। समूह में शामिल रहे जितिन प्रसाद बाद में भाजपा में शामिल हो गए। वहीं, योगानंद शास्त्री ने भी शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। कुछ नेताओं ने खुद को इस समूह से अलग कर लिया।
कौन से नेता इस समूह में शामिल हैं?
गुलाम नबी आजाद,कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, पीजे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा, मुकुल वासनिक, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजिंदर कौर भट्टल, एम वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चव्हाण, अजय सिंह, राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, अखिलेश प्रसाद सिंह, कुलदीप शर्मा, संदीप दीक्षित, विवेक तन्खा। जितिन प्रसाद और योगानंद शास्त्री पार्टी छोड़ चुके हैं।
पांच राज्यों में रहा निराशाजनक प्रदर्शन
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में कांग्रेस का बुरा हाल रहा। उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की मेहनत के बाद कांग्रेस के खाते में महज दो सीट आई। उसके 97 फीसदी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। पंजाब में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस को यहां 18 सीट मिलीं। पार्टी को उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर से भी काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां भी कुछ हाथ नहीं लगा।