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देश का 90 फीसदी दूध पीने योग्य, एफएसएसएआई ने जारी की नेशनल मिल्क सर्वे रिपोर्ट
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 13 Nov 2018 09:28 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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एफएसएसएआई का कहना है कि देश में मिलने वाला 90 फीसदी दूध पीने योग्य है। बाकी बचे 10 फीसदी दूध में ऑक्सी-टेट्रासाइक्लिन की मात्रा पाई गई है। इसके अलावा 3 प्रतिशत दूध में अमोनियम सल्फेट की मात्रा मिली है। एफएसएसएआई का कहना है कि देश में केवल 20 फीसदी ही प्रसंस्कृत दूध बेचा जा रहा है।
नेशनल मिल्क सर्वे 2018 की अंतरिम रिपोर्ट जारी करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि मई से अक्टूबर तक 29 राज्यों 7 केंद्रशासित प्रदेशों और 1100 कस्बों से दूध के 6,432 सैंपल लिए गए थे। उन्होंने बताया कि केवल 10 फीसदी 638 नमूने ऐसे थे, जिनमें मिलावट पाई गई। वहीं 90 फीसदी नमूने उपयोग के लिए सुरक्षित पाए गए।
उन्होंने बताया कि 6,432 दूध के नमूनों में से 12 में ही मिलावट पाई गई, जबकि केवल 1.2 प्रतिशत नमूनों में तय मात्रा से ज्यादा एंटी-बायोटिक के अवशेष मिले। जिसकी मुख्य वजह ऑक्सी-टेट्रोसाइक्लिन है, जो जानवरों में बोवाइन मास्टिटिस का इलाज करने में प्रयोग की जाती है। उन्होंने बताया कि सर्वे में दूध में 13 तरह की मिलावट का परीक्षण भी किया गया, जिसमें वनस्पति तेल, डिटर्जेंट, ग्लूकोज, यूरिया और अमोनियम सल्फेट शामिल हैं।
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नेशनल मिल्क सर्वे 2018 की अंतरिम रिपोर्ट जारी करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि मई से अक्टूबर तक 29 राज्यों 7 केंद्रशासित प्रदेशों और 1100 कस्बों से दूध के 6,432 सैंपल लिए गए थे। उन्होंने बताया कि केवल 10 फीसदी 638 नमूने ऐसे थे, जिनमें मिलावट पाई गई। वहीं 90 फीसदी नमूने उपयोग के लिए सुरक्षित पाए गए।
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उन्होंने बताया कि 6,432 दूध के नमूनों में से 12 में ही मिलावट पाई गई, जबकि केवल 1.2 प्रतिशत नमूनों में तय मात्रा से ज्यादा एंटी-बायोटिक के अवशेष मिले। जिसकी मुख्य वजह ऑक्सी-टेट्रोसाइक्लिन है, जो जानवरों में बोवाइन मास्टिटिस का इलाज करने में प्रयोग की जाती है। उन्होंने बताया कि सर्वे में दूध में 13 तरह की मिलावट का परीक्षण भी किया गया, जिसमें वनस्पति तेल, डिटर्जेंट, ग्लूकोज, यूरिया और अमोनियम सल्फेट शामिल हैं।
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एफएसएसएआई के मुताबिक 195 नमूनों यानी 3 प्रतिशत में अमोनियम सल्फेट की मात्रा पाई गई। फिलहाल, एफएसएसएआई ने अमोनियम सल्फेट की मात्रा को लेकर कोई सीमा निर्धारित नहीं की है। साथ ही, दूध के नमूनों की एंटिबायोटिक अवशेष की जांच के अलावा कीटनाशक अवशेष और एफ्लैटॉक्सिन एम 1 की मिलावट को लेकर भी जांच की गई।
सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि प्रसंस्कृत दूध के मुकाबले डेयरी से सीधा खरीदने वाले कच्चे दूध में वसा और ठोस गैर वसा (एसएनएफ) की उच्चतम मात्रा पाई गई। इससे पहले साल 2011 और उसके बाद साल 2016 में दूध के नमूनों का सर्वे किया गया था।
हालांकि एफएसएसएआई ने इस बात का कोई खुलासा नहीं है कि देश के किस हिस्से में सबसे ज्यादा मिलावट की जाती है। एफएसएसएआई का कहना है कि जांच के नतीजों स्टेकहोल्डर्स और राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा, जिसके बाद देश में दूध की गुणवत्ता में सुधारने के लिए सुरक्षात्मक और सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।
सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि प्रसंस्कृत दूध के मुकाबले डेयरी से सीधा खरीदने वाले कच्चे दूध में वसा और ठोस गैर वसा (एसएनएफ) की उच्चतम मात्रा पाई गई। इससे पहले साल 2011 और उसके बाद साल 2016 में दूध के नमूनों का सर्वे किया गया था।
हालांकि एफएसएसएआई ने इस बात का कोई खुलासा नहीं है कि देश के किस हिस्से में सबसे ज्यादा मिलावट की जाती है। एफएसएसएआई का कहना है कि जांच के नतीजों स्टेकहोल्डर्स और राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा, जिसके बाद देश में दूध की गुणवत्ता में सुधारने के लिए सुरक्षात्मक और सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।