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India: भारत ने फिर दिखाई दरियादिली, पाकिस्तान की 19 साल की बेटी को दी नई जिंदगी; पढ़ें दिल छू लेने वाली कहानी
Sun, 28 Apr 2024 03:22 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sun, 28 Apr 2024 03:22 PM IST
सार
डॉक्टर बालाकृष्णन ने बताया कि लड़की की मां एक सिंगल मदद है। उनके पास कोई पैसा या संसाधन नहीं था। हमें अस्पताल में भर्ती होने सहित पूरे खर्चों का ध्यान रखना पड़ा।
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आयशा रशन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पाकिस्तान और भारत के बीच के बिगड़े संबंध किसी से छिपे हुए नहीं है। पाकिस्तान हमेशा ही भारत के खिलाफ जगह उगलता रहता है, लेकिन फिर भी भारत दरियादिली दिखाने से पीछे नहीं हटता। ऐसा ही उदाहरण एक बार फिर देखने को मिला। कराची की 19 साल की बेटी का भारत में सफल हृदय प्रत्यारोपण हुआ है। पाकिस्तानी लड़की को नया जीवन मिलने की दिल को छू लेने वाली कहानी इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि पड़ोसी देश में लोगों के सामने आने वाली किसी भी चुनौती के लिए सीमाओं को कैसे आसान बनाया जा सकता है।
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चेन्नई में हुआ हृदय प्रत्यारोपण
कराची की रहने वाली आयशा रशन का चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी हुई। इस साल 31 जनवरी को लड़की का हृदय प्रत्यारोपण हुआ। सभी प्रक्रियाओं के बाद उसे इस महीने छुट्टी दे दी गई।
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14 साल की उम्र में आई थी भारत, फिर...
इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट एंड मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट के कार्डियक साइंसेज डायरेक्टर के चेयरमैन डॉ. केआर बालाकृष्णन ने कहा कि आयशा पहली बार साल 2019 में उनके पास आई थी। तब उसकी उम्र 14 साल थी। उसे दिल से जुड़ी एक गंभीर बीमारी थी। उसकी वजह से वह बहुत बीमार हो गई थी और उसे दिल का दौरा पड़ा था।
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डॉ. बालाकृष्णन ने कहा, 'दिल का दौरा पड़ने के बाद उसे सीपीआर देना पड़ा था। सांस आने पर उसे ईसीएमओ मशीन पर रखा था। हमने उस समय एक आर्टिफिशियल हृदय पंप लगाया था। अंततः वह ठीक हो गई और अपने देश वापस चली गई थी।'
उन्होंने आगे बताया कि कुछ ही सालों में वह फिर से बीमार हो गई। इसका एक वाल्व लीक होने लगा। उसके दिल के दाहिने हिस्से ने काम करना बंद सा कर दिया था। हालत इतनी खराब हो गई थी कि पाकिस्तान में उसका इलाज करना बहुत मुश्किल हो गया। वहीं, उसके भारत आने के लिए वीजा हासिल करने में बहुत मुश्किल हुई।
बालाकृष्णन ने कहा कि लड़की की मां एक सिंगल मदद है। उनके पास कोई पैसा या संसाधन नहीं था। हमें बार-बार अस्पताल में भर्ती होने सहित पूरे खर्चों का ध्यान रखना पड़ा। उन्होंने बताया कि 19 साल की आयशा की मदद के लिए चेन्नई का एक एनजीओ एश्वर्या ट्रस्ट सामने आया। वहीं प्रत्यारोपण मरीजों ने धन जुटाकर मदद की।
दिल्ली के बुजुर्ग का मिला दिल
डॉक्टर बालाकृष्ण ने बताया कि दिल्ली के एक ब्रेन डेड बुजुर्ग से हृदय मिलने के बाद ट्रांसप्लांट किया गया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कोई पैसा नहीं था। इलाज के लिए 30 से 40 लाख रुपये की जरूरत थी। उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल प्राइवेट है। इसलिए हमें ट्रस्ट के माध्यम से, अपने स्वयं के संसाधनों और प्रत्यारोपण मरीजों के माध्यम से धन जुटाना पड़ा।इसलिए यह एक बड़ी चुनौती थी।
उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण करने में खतरा था, लेकिन हमने बिना घबराए लड़की सफल हृदय प्रत्यारोपण किया। अगर हम ऐसा नहीं करते तो बच्ची जिंदा नहीं बचती।
फैशन डिजाइनर बनने की इच्छा रखने वाली आयशा ने इलाज के लिए देश का वीजा देने के लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया। वहीं उसकी मां ने कहा कि समस्या यह है कि पाकिस्तान में इस तरह की सुविधा नहीं है।
इन लोगों का भी किया जा चुका हृदय प्रत्यारोपण
बता दें, आयशा भारत में हृदय प्रत्यारोपण कराने वाली पहली पाकिस्तानी नहीं हैं। इससे पहले मोहम्मद आमिर नामक शख्स का भी हृदय प्रत्यारोपण हो चुका है। साल 2014 में जब वह 37 साल के थे, तब कराची में हृदय रोग विशेषज्ञों ने उसे बताया कि उसे 'पतला कार्डियोमायोपैथी' है। आयशा के भारत में सफल हृदय प्रत्यारोपण की रिपोर्ट के बाद 46 वर्षीय आमिर ने बताया कि डॉक्टरों ने उस समय प्रत्यारोपण एकमात्र इलाज बताया था। जब हृदय प्रत्यारोपण केंद्र की ऑनलाइन खोज की तो पता चला कि भारत के चेन्नई में है।
उन्होंने कहा, 'साल 2014 में एक अज्ञात भारतीय की वजह से मैं स्वस्थ्य हो सका। आमिर अकेले नहीं हैं। गुजरात के इमाम कारी जुबैर हृदय प्रत्यारोपण के लिए चेन्नई की यात्रा करने वाले पहले पाकिस्तानी थे। अफसोस की बात यह है कि वह इलाज के बाद भी जिंदा नहीं बचे थे। आमिर ने कहा, 'मेरी जानकारी के मुताबिक भारत में करीब छह पाकिस्तानियों का हृदय प्रतिरोपण हुआ है। मैं सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाला हूं। चार अन्य की प्रत्यारोपण के बाद मौत हो गई।'