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किस्सा पी चिदंबरम के "इंद्राणीजाल" का...

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 09 Oct 2019 12:38 PM IST
पी चिदंबरम
पी चिदंबरम - फोटो : PTI
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खास बातें

  • शिवगंगा से संसद तक: पी चिदंबरम
  • क्या है आईनेक्स मीडिया केस 
  • आईनेक्स मीडिया केस और कार्ति चिदंबरम की कंपनी : रिश्ता रसूक के खेल का 
  • आईनेक्स मीडिया कंपनी की  मुसीबत और चिदंबरम की फजीहत 
मुंबई में एक कारोबारी महिला गिरफ्तार होती है। उसे अपनी बेटी की हत्या के आरोप में जेल भेजा जाता है। एक-एक करके मामला खुलना शुरू होता है। धीरे-धीरे तथ्य सामने आना शुरू होते हैं और इसकी आंच दिल्ली व दक्षिण भारत के शहर शिवगंगा तक पहुंचती है।
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हमारे देश के पूर्व वित्त और गृहमंत्री पी चिदंबरम के इर्द-गिर्द केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसना शुरू हो जाता है। फिर एक दिन एक खबर तेजी से सुर्खियां बटोरने लगती है कि "देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम गिरफ्तार हुए।" यहां से शुरू होती है आईएनएक्स मीडिया कंपनी, पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के रिश्तों की कहानी।

शिवगंगा से संसद तक: पी चिदंबरम

बात 80 के दशक की है, जब तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से एक व्यक्ति चुनाव जीतकर संसद पहुंचता है। समय के साथ उसके नाम के आगे बहुत सारे पद जुड़ते चले जाते हैं। हिंदुस्तान की राजनीति का पन्ना आज उसके संबोधन से पहले लिखता है पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम। राजीव गांधी के नेतृत्व में उन्होंने साल 1984 में पहला चुनाव लड़ा, जीता और सरकार में शामिल किए गए। जब उन्होंने अपना पहला बजट पेश किया तो उसे ड्रीम बजट की उपाधि दी गई और वो सुर्खियां बटोरने लगा। मगर आज फिर से इस नाम के साथ टेलीविजन से लेकर अखबारों में कुछ नई सुर्खियां चल रही हैं, "आईनेक्स मीडिया केस और चिदंबरम।" बोतल में बंद जिन्न फिर से बाहर निकल आया है और अब सीबीआई से लेकर देश के प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा चिदंबरम बाबू पर कसने लगा।

अदावत से अदालत तक का पूरा किस्सा 

बिना सजावट और बनावट के हम आपको बताते हैं कि कैसे कांग्रेस का कद्दावर नेता, माहिर वकील और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम फंस गए और ये मामला है क्या?

बात ऐसी हैं कि बतौर वित्त मंत्री जब उन्होंने कार्यभार संभाला और कुछ फैसले ऐसे भी लिए, जो आज मुसीबत बनकर सामने आ गए हैं। 20 अगस्त को आईनेक्स मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह "क्लासिक केस ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग" है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत ने आपको संरक्षण दिया मगर इस मामले को लेकर जितने भी सवाल आपसे पूछे गए उनके जवाब में आपने टालमटोल किया। इसलिए संवैधानिक संरक्षण खत्म किया जाता है। इसके साथ शुरू हो गई चिदंबरम के वकीलों की दौड़भाग और उनकी खुद की मुसीबतें। अब आलम ये है कि सीबीआई हो या ईडी, सब दिन-रात इस मामले की फाइल्स का हर पन्ना पलट रहे हैं।

इस बात के कोर्ट के बाहर आते ही मीडिया के कैमरे चिदंबरम के घर पर जूम होने लगे और सीबीआई की गाड़ियों की गश्त उनके घर के बाहर बढ़ गई। वक्त का पलटवार देखिए, जो एजेंसी कभी चिदंबरम बाबू का हुक्म बजाती थीं वो उन्हें गिरफ्तार करने पर आमादा हो चुकी थीं।

क्या है आईनेक्स मीडिया केस और क्यों पड़ी है सीबीआई चिदंबरम के पीछे?

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