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बंगाल में टूट गई कांग्रेस और वामदलों की यारी

Sun, 30 Oct 2016 04:19 AM IST
रीता तिवारी/ कोलकाता
रीता तिवारी/ कोलकाता Updated Sun, 30 Oct 2016 04:19 AM IST
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friendship of let and congress broke down in west bengal
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी दलों की दोस्ती छह महीने भी नहीं टिक पाई। राज्य में अगले महीने होने वाले उपचुनावों के मुद्दे पर उनकी यारी टूट गई है। यहां 19 नवंबर को लोकसभा की दो और विधानसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होने हैं। लेकिन इनके लिए इन दोनों ने अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग की तर्ज पर अलग-अलग उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। 
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वैसे इससे माकपा के प्रदेश नेतृत्व ने राहत की ही सांस ली है। बीते विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के बावजूद वामपंथी दलों को जबरदस्त मुंह की खानी पड़ी थी। उसके बाद से ही एक ओर जहां पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ-साथ मोर्चा के दूसरे सहयोगी दल भी माकपा नेतृत्व को आड़े हाथों ले रहे थे वहीं उसकी वजह से पार्टी में पलायन भी शुरू हो गया था।
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माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य और वाममोर्चा के अध्यक्ष विमान बसु ने यहां उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। दूसरी ओर, कांग्रेस तो इस गठजोड़ को जारी रखने की पक्षधर थी। लेकिन माकपा की ओर से उम्मीदवारों के ऐलान के बाद अब उसके सामने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। माकपा की केंद्रीय समिति के एक नेता ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व कांग्रेस के साथ तालमेल जारी रखना चाहता था लेकिन केंद्रीय नेतृत्व इसके विरोध में था। ऐसे में अब इसे जारी रखना संभव नहीं था। माकपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस चाहे तो वे उसके साथ जुलूस और प्रदर्शनों में शामिल हो सकते हैं, लेकिन गठजोड़ की राह अब खत्म हो गई है।
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दूसरी ओर, माकपा के इस एक तरफा फैसले से कांग्रेस में भारी नाराजगी है। इस गठजोड़ के खिलाफ उसके कई विधायक तृणमूल कांग्रेस में चले गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी कहते हैं कि माकपा ने हमें इसकी सूचना देने की औपचारिकता तक नहीं निभाई। ऐसे में कांग्रेस उससे गठजोड़ जारी रखने के लिए मिन्नतें नहीं करेगी। चौधरी ने कहा कि माकपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के मैदान में होने से फायदा तृणमूल कांग्रेस का होगा। अब गेंद माकपा के पाले में है। उनका कहना है कि बंगाल में किसी भी पार्टी के लिए अकेले अपने बूते तृणमूल का मुकाबला संभव नहीं है।
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