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'मित्र रोबो' पाट रहा संक्रमितों के रिश्तेदारों व स्वास्थ्यकर्मियों के बीच की खाई
Thu, 17 Sep 2020 03:02 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 17 Sep 2020 03:02 AM IST
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मित्र रोबो
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण से बचाव का सबसे बड़ा मंत्र सामाजिक दूरी है। हर जगह इसका पालन किया जा रहा है। कोरोना संक्रमितों को आईसोलेशन में रखा जा रहा है। अकेले रहने के दौरान उनके मन में कई तरह के नकारात्मक ख्याल आ सकते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नोएडा एक्सटेंशन के यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने ‘मित्र रोबो’ को तैनात किया है। यह रोबो मरीज और उनके परिजन व दोस्तों के बीच सेतु का काम कर रहा है।
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कराता है मरीजों की परिजनों से बात, दूर से डॉक्टर देते हैं परामर्श
रोबो की आंखें चेहरा पहनाने वाली तकनीक से लैस है, जो कि उसे मदद करती हैं कि पूर्व में किन लोगों से बातचीत कर चुका है। इसके अलावा इसकी छाती में लगे टैबलेट की मदद से मरीज अपने प्रियजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को देख सकता है जिन्हें वार्ड में जाने की अनुमति नहीं है। अस्पताल के डॉक्टर अरुण लखनपाल ने कहा, बीमारी से उबरने में मरीज को काफी समय लगता है और इस समय उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है अपने परिजनों एवं प्रियजनों की, लेकिन कोरोना के चलते वे उसके पास नहीं जा सकते।
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मित्र रोबो को मुख्य रूप से वे मरीज इस्तेमाल करते हैं जो कि फोन के जरिये संवाद कर पाने में असमर्थ हैं। ऐसे ही मित्र रोबो का उपयोग करने वाले सेवानिवृत्त नौकरशाह माखनलाल काजी हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को उन्हें यहां लाया गया था और वह बेहतर महसूस कर रहे हैं। मित्र रोबो के जरिये मैंने अपने परिजनों से बात की अब मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।
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अस्पताल का परिचालन करने वाली कंपनी के निदेशक यथार्थ त्यागी ने बताया कि इस रोबो को बंगलूरू स्थित स्टार्ट-अप इंवेंटों रोबोटिक्स ने विकसित किया है। इसकी लागत दस लाख रुपये है। सामान्यता एक मनोचिकित्सक और आहार विशेषज्ञ के लिए कोविड मरीज को देखना काफी मुश्किल है लेकिन मित्र रोबो का इस्तेमाल विशेषज्ञों की मदद से दूर से ही परामर्श के लिए किया जा रहा है। इससे इन लोगों के संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है।