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खतरे में है खुली सोच और अभिव्यक्ति की आजादी: मनमोहन सिंह
अमर उजाला, ब्यूरो/एजेंसी
Updated Fri, 20 Jan 2017 08:46 PM IST
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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने स्वतंत्र विचारों और अभिव्यक्ति पर मोदी सरकार के रुख की आलोचना की है। पूर्व पीएम ने कहा है कि आज भारतीय विश्वविद्यालयों में खुली सोच और स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर खतरे मंडरा रहे हैं। मनमोहन ने कहा कि हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी औैर जेएनयू में जिस तरह से खुली सोच और स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर हमले किए गए वह खासतौर पर चिंता पैदा करता है।
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उन्होंने कहा कि शांत असहमति को जिस तरह से कुचला जा रहा है वह शिक्षा के दृष्टिकोण से नुकसानदेह और अलोकतांत्रिक है। सिंह ने ये विचार प्रेसिडेंसी कॉलेज के 200 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में व्यक्त किए।
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सिंह ने कहा कि जहां छात्रों और नागरिकों को सोचने और प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है वहीं असली राष्ट्रवाद भी होता है। जहां असहमति को प्रोत्साहित किया जाता है और उसे कुचला नहीं जाता वहीं असली लोकतंत्र होता है। यह सिर्फ रचनात्मक विमर्श से ही संभव है। इसके जरिये हम ज्यादा मजबूत, ज्यादा घनिष्ठ और टिकाऊ लोकतंत्र का निर्माण कर सकते हैं। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाना अलोकतांत्रिक है। हर विश्वविद्यालय को ज्ञान को आगे बढ़ाने की आजादी अवश्य देनी चाहिए, भले ही वह ज्ञान स्थापित बौद्धिक और सामाजिक परंपरा से मेल नहीं रखता हो। हमें पूरी शिद्दत से इस आजादी की रक्षा करनी चाहिए।
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पूर्व प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप को अदूरदर्शिता की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और जेएनयू में छात्र समुदाय की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रयास खास तौर पर चिंता का विषय है। सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के प्रयास अलोकतांत्रिक हैं। तमाम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए।