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अब हिंदी में प्रकाशित होगी वीर सावरकर की जीवनी, सचिव बालाराव ने चार खंडों में लिखी है किताब
Mon, 25 May 2020 09:35 PM IST
Rajeev Rai
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: Rajeev Rai
Updated Mon, 25 May 2020 09:35 PM IST
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वीर सावरकर (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) की जीवनी का प्रकाशन अब हिंदी में होगा। वीर सावरकर के साथ लंबे समय तक बतौर सचिव काम कर चुके आचार्य बालाराव सावरकर ने किताब लिखी है। दो हजार पेज में लिखी गई इस किताब को चार खंडों में प्रकाशित किया जाएगा। इसके पहले इसके मराठी संस्करण का प्रकाशन हुआ था।
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इस पुस्तक में सावरकर के अंडमान की जेल से छूटने के बाद से भारत को आजादी मिलने तक का वृतांत है कि वास्तव में उन्होंने क्या कार्य किए। यह पुस्तक इसका ऐतिहासिक दस्तावेज है। बालाराव सावरकर 14 साल तक वीर सावरकर के निजी सचिव रहे हैं। यह खंड 1972 में पहली बार प्रकाशित हुआ था। अब 48 वर्षों बाद इसका पुनः प्रकाशन हिंदी में हो रहा है। इस पुस्तक के प्रकाशन की जिम्मेदारी संभाल रहे उद्योगपति प्रशांत कारुलकर ने कहा कि इस साल दिपावली तक हिंदी संस्करण के विमोचन की योजना है।
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सावरकर के लेख, पत्र और अखबार की कतरनों का वर्णन
लेखक बालाराव सावरकर ने खुद वीर सावरकर द्वारा सहेजे गए अखबारों की कतरने, लेख, परिपत्र व पत्र आदि का इस्तेमाल किताब में किया है। इसके साथ ही, प्रत्येक साल की उनकी एक-एक गतिविधियों को भी रेखांकित किया गया है। कारुलकर कहते हैं कि इस किताब को पढ कर पाठकों को लगेगा कि वे स्वतंत्रता सेनानी के अंडमान के बाद किए गए कार्यों की डायरी पढ़ रहे हैं।
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पुस्तक में सावरकर की आलोचना करने वालों का भी है पक्ष
खास बात यह की किताब के लेखक बालाराव ने सावरकर के विचारों को लेकर उनकी आलोचना करने वालों का पक्ष भी पेश किया है। पुस्तक के ये चार खंड सावकर से प्रेम करने वालों के लिए उपहार समान हैं। यह पुस्तक सावरकर के बारे में बगैर किसी जानकारी के टिका टिप्पणी करने वालों को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगी।