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भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनी लोकायुक्त संस्था में चार राज्यों ने ही नियुक्त किए सदस्य
Wed, 09 Dec 2020 03:20 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 09 Dec 2020 03:20 AM IST
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Corruption - सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
भ्रष्टाचार पर शून्य सहिष्णुता के दावे के बावजूद भारत में भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनी लोकायुक्त संस्था में अब तक केवल चार राज्यों ने ही न्यायिक और गैरन्यायिक सदस्यों की नियुक्ति की है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक केवल बिहार, मणिपुर, ओडिशा और तमिलनाडु ने ही सदस्यों की नियुक्ति की है।
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भ्रष्टाचार रोधी दिवस की पूर्व संध्या पर जारी रिपोर्ट में राज्य स्तर पर लोकायुक्त के कामकाज का विश्लेषण किया गया है। देश में जबर्दस्त आंदोलन के बाद लोकपाल और लोकायुक्त कानून लागू होने के सात साल बाद इनके कामकाज की समीक्षा की गई है। संस्थान के बयान में कहा गया है कि अन्ना हजारे के 10 साल के आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में 1971 में लोकायुक्त नियुक्त किया गया। साथ ही 2013 से लोकपाल और लोकायुक्त कानून लागू है, इसके बावजूद देश में भ्रष्टाचार मिटाने की दिशा में मामूली प्रगति हुई है।
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