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मनीष तिवारी का किताब बम: हमें तो अपनों ने ही मारा... क्या इस तर्ज पर कांग्रेस के नेता ही पार्टी को कमजोर कर रहे

Tue, 23 Nov 2021 01:51 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:51 PM IST
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सार
इससे पहले सलमान खुर्शीद ने अयोध्या पर अपनी पुस्तक में "हिंदुत्व" की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम जैसे कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी समूहों से की थी। यह मामला अभी ठीक से ठंडा भी नहीं पड़ा है।
 
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former union minister and congress leader manish tewari in his new book on national security has attacked the manmohan singh government of the UPA over the 26/11 mumbai attacks
सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह - फोटो : PTI

विस्तार

सलमान खुर्शीद के बाद चुनावी सीजन में अब कांग्रेस नेता मनीष तिवारी भी अपनी किताब लेकर आए हैं जिसमें उन्होंने 26/11 हमले को लेकर कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार को घेरा है। मनीष तिवारी ने अपनी किताब में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि 26/11 हमले के बाद पाकिस्तान पर किसी तरह का एक्शन न लेना सरकार की कमजोरी है। तिवारी की किताब आने की घोषणा मुंबई हमले की बरसी से ठीक तीन दिन पहले की गई है और किताब खूब चर्चा में आ गई है।


माना जा रहा है कि यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार के बहाने यह हमला कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर है। पार्टी ने किताब में लिखी उनकी बातों को गंभीरता से लिया है। किताब के कुछ अंश मीडिया के सामने आने के बाद पार्टी के अनुशासन समिति के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री ए के एंटनी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे और बैठक में इस किताब पर चर्चा हुई। पार्टी को यह बात नागवार गुजरी है कि चुनाव के समय पार्टी नेता उस सरकार की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं जो खुद उस सरकार का हिस्सा रहे हैं। मनीष तिवारी यूपीए दो में  2009-2014 तक केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), सूचना और प्रसारण के रूप में काम कर चुके हैं। 



कांग्रेस में तिवारी की किताब की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं और पार्टी नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस को भाजपा से कम हमारे अपने ही लोग ज्यादा कमजोर बना रहे हैं। अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी को ऐसी बातों से नुकसान होने का डर सताने लगा है। मनीष तिवारी पंजाब से आते हैं और पहले ही अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की लड़ाई की वजह से राज्य में कांग्रेस का काफी सियासी नुकसान हो चुका है।

दूसरी तरफ तिवारी की किताब को लेकर भारतीय जनता पार्टी को भी कांग्रेस पर हमले की वजह मिल गई है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा मनीष तिवारी का कथन कांग्रेस का कबूलनामा है। क्या राहुल गांधी इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ेंगे? वहीं भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस मुद्दे को लपक लिया और ट्वीट करते हुए कहा "मनीष तिवारी ने अपनी नई किताब में 26/11 के बाद संयम के नाम पर यूपीए की कमजोरी की आलोचना की है। एयर चीफ मार्शल फली मेजर की यह बात पहले से ही रिकॉर्ड में हैं कि भारतीय वायुसेना हमले के लिए तैयार थी लेकिन यूपीए सरकार ऐसा नहीं कर पाई। 
 

राष्ट्रीय सुरक्षा पर मनीष तिवारी की किताब
राष्ट्रीय सुरक्षा पर मनीष तिवारी की किताब - फोटो : Twitter :@ManishTewari
मनीष तिवारी ने मंगलवार सुबह ट्वीटर पर यह घोषणा की ‘यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरी चौथी पुस्तक शीघ्र ही बाजार में आएगी - '10 फ्लैश प्वाइंट; 20 साल - राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थितियां जिसने भारत को प्रभावित किया'। यह पुस्तक पिछले दो दशकों में भारत द्वारा सामना की गई प्रत्येक प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का वस्तुपरक रूप से वर्णन करती है’। 

किताब में क्या लिखा है 
तिवारी ने अपनी किताब में लिखा है कि मुंबई हमले के बाद तात्कालीन सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी। ये ऐसा समय था, जब एक्शन बिल्कुल जरूरी था। तिवारी ने किताब में लिखा है कि एक देश (पाकिस्तान) निर्दोष लोगों का कत्लेआम करता है और उसे इसका कोई पछतावा नहीं होता। इसके बाद भी हम संयम बरतते हैं तो यह ताकत नहीं बल्कि कमजोरी की निशानी है। तिवारी ने 26/11 हमले की तुलना अमेरिका के 9/11 हमले से की। 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले में 160 से अधिक लोग मारे गए थे। इस भीषण हमले में नौ आतंकवादी भी मारे गए और एकमात्र बचे अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया था और बाद में उसे फांसी की सजा दी गई।

किताब की टाइमिंग पर सवाल 
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता किताब की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कांग्रेस को कमजोर करने के लिए भाजपा या किसी अन्य पार्टी की जरूरत नहीं। हमारे अपने लोग ही हमें कमजोर बना रहे हैं। उनका कहना है हो सकता है कि चुनाव के समय किताब की बिक्री ज्यादा हो जाए लेकिन ऐसा लग रहा है कि पार्टी के कुछ नेता कहानी के उस लकड़हारे पात्र की तरह हो गए हैं, जो वही टहनी काट रहे हैं जिस पर बैठे हुए हैं। यूपी चुनाव तक किताब का प्रकाशन रोका सकता है। किसी देश पर हमला करने का फैसला इतना आसान नहीं होता है, जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे देख रहे होते हैं तो वे हर कदम फूंक-फूंक कर उठाते हैं।  
 

मनीष तिवारी
मनीष तिवारी - फोटो : SELF
मीडिया का ध्यान खींचने का तरीका
वहीं कांग्रेस के एक दूसरे वरिष्ठ नेता बताते हैं ‘पार्टी के अंदर यह कमजोरी है कि जो आदमी नाराज होता है, उसे छोड़ दिया जाता है। फिर नाराज नेता इस तरह मीडिया के सामने आते हैं। आप इसे ध्यानकार्षण करने का एक तरीका भी कह सकते हैं। उनका कहना है कि हमें ऐसा लगता है कि जब तक कांग्रेस दो-तीन राज्यों में ठीक ठाक प्रदर्शन नहीं कर लेती तब तक असंतुष्ट नेता किसी न किसी बहाने पार्टी और शीर्ष नेताओं पर हमले करते रहेंगे। ‘ 

जी-23 का हिस्सा रहे हैं तिवारी
मनीष तिवारी उन नेताओं में जो पार्टी के जी 23 यानी (असंतुष्ट नेताओं) का हिस्सा है। पिछले साल 23 अगस्त को तिवारी समेत कई नेताओं ने सोनिया गांधी को एक प्रभावी नेतृत्व देने और कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव कराने के लिए एक पत्र लिखा था। उन्होंने हालिया पंजाब के पूरे एपिसोड में उन्होंने पार्टी से अलग लाइन ली। तिवारी कैप्टन के समर्थक माने जाते हैं। वे लगातार पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू पर हमले कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यदि वे जी-23 में नहीं आते तो वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बन सकते थे, क्योंकि पार्टी पश्चिम चुनाव में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता अधीर चौधरी को हटाने का मन बना चुकी थी।  

2014 का चुनाव लड़ने से मना किया था
तिवारी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में लंबे समय से एक खटास महसूस की जा रही है। देश भर में यूपीए सरकार के खिलाफ बने माहौल, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी वजहों से कांग्रेस के तमाम मंत्री और बड़े नाम जो 2014 का चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, उसमें मनीष तिवारी भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक जब उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था, उसके बाद राहुल गांधी उनसे काफी नाराज हो गए थे।

जैसे-तैसे वह मामला ठंडा हुआ था। तिवारी 2009 से 2014 तक लुधियाना के सांसद रहे थे। 2019 में वे आनंदपुर साहिब के सांसद चुने गए हैं। बताया जाता है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के समर्थन के कारण पार्टी ने उन्हें आनंदपुर साहिब का टिकट दिया था। हालांकि सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी ने जल्दी उनके नाम को मंजूरी नहीं दी थी। बताया जा रहा है कि तभी से पार्टी नेतृत्व के साथ तिवारी के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं।
 
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