{"_id":"637028ecb45ce91fd9544c70","slug":"former-uk-pm-boris-johnson-made-a-strong-pitch-for-speedy-conclusion-of-the-india-uk-free-trade-agreement","type":"story","status":"publish","title_hn":"India-UK FTA: ब्रिटेन के पूर्व पीएम ने कहा- भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता क्यों रोके रखा है, मुझे नहीं पता","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
India-UK FTA: ब्रिटेन के पूर्व पीएम ने कहा- भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता क्यों रोके रखा है, मुझे नहीं पता
Sun, 13 Nov 2022 04:45 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 13 Nov 2022 04:45 AM IST
सार
जॉनसन ने कहा कि मेरे पद छोड़ने के बाद से इस मामले में गाड़ी पंचर पड़ी है, जबकि मैं और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली से पहले यह समझौता करना चाहते थे। अब अगली दिवाली तक रुकने की जरूरत नहीं हैं, मुझे नहीं पता कि इसे क्यों रोक रखा है?
विज्ञापन
ब्रिटेन के पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
विस्तार
ब्रिटेन (यूके) के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का कहना है कि उनके नये प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के नेतृत्व में भारत और यूके के संबंध आगे बढ़ते रहेंगे। जॉनसन के अनुसार आज बेहद खतरनाक और अनिश्चितता भरे समय में दोनों देशों को एक दूसरे की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों में मुक्त व्यापार समझौता हो जाना चाहिए, इसके लिए अगली दिवाली तक रुकने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
जॉनसन के अनुसार, दोनों देशों का आपसी कारोबार 28 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं मुक्त व्यापार समझौता अभी बाकी है। इसे भी अंतत: कर लेना चाहिए। जॉनसन ने कहा कि ‘मेरे पद छोड़ने के बाद से इस मामले में गाड़ी पंचर पड़ी है, जबकि मैं और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली से पहले यह समझौता करना चाहते थे। अब अगली दिवाली तक रुकने की जरूरत नहीं हैं, मुझे नहीं पता कि इसे क्यों रोक रखा है?’
विज्ञापन
यूके में सबसे ज्यादा विदेशी विद्यार्थी भारतीय
- जॉनसन ने कहा कि यूके में सबसे ज्यादा विदेशी छात्र भारतीय हैं, 1.08 भारतीय विद्यार्थी उनके देश की शिक्षा इंडस्ट्री को मजबूत कर रहे हैं। यूके सरकार में भारतीय मूल के मंत्रियों की संख्या किसी भी अन्य देश से ज्यादा है।
- युद्ध से रूस कमजोर, लेकिन चीन हुआ मजबूत : उन्होंने कहा, पुतिन की यूक्रेन में हार होगी, वे इसी योग्य हैं। इससे रूस से हथियार निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा, वह कमजोर देश बनेगा। लेकिन इसके परिणामस्वरूप चीन को मजबूती मिलेगी।
विज्ञापन