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पूर्व रॉ चीफ दुलत ने कहा, कश्मीरियों को आज भी वाजपेयी से प्यार

Fri, 17 Aug 2018 07:09 AM IST
Harendra Chaudhary Harendra Chaudhary
Updated Fri, 17 Aug 2018 07:09 AM IST
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Former Raw Chief Dulal said Kashmiris still love Vajpayee
भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत वाजपेयी के निधन से काफी दुखी हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सलाहकार और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत वाजपेयी के निधन से काफी दुखी हैं। उन्होंने बताया कि वाजपेयी ने कश्मीर के लिए इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत का सिद्धांत दिया था और इसी से ही घाटीं में शांति आ सकती है।

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दुलत साल 2000 तक रॉ के प्रमुख रहे और बाद में वाजपेयी सरकार के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में कश्मीर मुद्दे पर विशेष सलाहकार के तौर पर नियुक्त रहे। जयपुर से विशेष बातचीत में दुलत ने बताया कि जब भी वे उनके परिवार से बात करते थे, तो वाजपेयी जी को वे ‘बाऊजी’ कह कर उनका कुशलक्षेम पूछा करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री के साथ बिताए पलों को याद करते हए वे कहते हैं कि उस वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय में जो लोग काम करते थे, वे उन्हें अपने परिवार की तरह ही मानते थे।
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वह बताते हैं कि वाजपेयी हमेशा सामने वाले को सम्मान देते थे और खास होने का अहसास दिलाते थे। उनके साथ काम करके हमेशा खुशी महसूस होती थी। लेकिन आज वे हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, उनकी यादें रह-रह कर मेरे जहन में कौंधती हैं। उनके साथ बहुत सारे यादगार पल बिताने का मुझे मौका मिला। आज वो सभी पल एक-एक कर मेरी आंखों के सामने आ रहे हैं।
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बेहद भावुकता के साथ दुलत बताते हैं कि वाजपेयी को कश्मीर से बहुत लगाव था। उनकी मौत से आज अगर सबसे ज्यादा दुखी हैं तो वे कश्मीरी ही हैं। किसी भी कश्मीरी से पूछो तो वह बता देगा कि वाजपेयी के दौरान और इस वक्त की सरकार के रवैये में कितना अंतर है। वे अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्हें घाटी की अवाम आज भी बहुत प्यार करती है। वह बताते हैं कि जब कश्मीर के लोगों को उनके खराब स्वास्थ्य के चलते अस्पताल में भर्ती होने की खबरें मिलीं, तो वहां उनकी लंबी उम्र के लिए दुआओं का दौर शुरू हो गया।
 
दुलत के मुताबिक पिछले दो सालों में कश्मीर की जनता ने सबसे बुरा दौर देखा है और इस दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा वाजपेयी को ही याद किया। वह बताते हैं कि वाजपेयी ने जनता को भरोसा दिया था कि दिल्ली के दरवाजे हमेशा उनके लिए खुले हैं। दिल्ली कभी कश्मीर के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं करेगा। दुलत के मुताबिक कश्मीरी अवाम आज भी दिलोजान से मानती है कि अगर दक्षिण एशिया में अगर कोई शांति ला सकता है, तो केवल वाजपेयी ही यह करिश्मा कर सकते हैं।
 
वह बताते हैं कि वाजपेयी जब देश के प्रधानमंत्री थे, तो उन्होंने कश्मीर के लिए एक नए डाक्ट्रिन यानी नए सिद्धांत की शुरुआत की थी। आज भी लोग इस सिद्धांत को इंसानियत यानी मानवता, जम्हूरियत यानी लोकतंत्र और कश्मीरियत यानी कश्मीरी आवाम के नाम से जानते हैं। आज भी इसे वाजपेयी डॉक्ट्रिन के नाम से जाना जाता हैं। लेकिन आज कोई भी उनके सिद्धांतों पर चलने के लिए तैयार नहीं हैं।

 
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने साल 2003 में कश्मीर में शांति स्थापित करने के तीन सिद्धांत बताए थे, जिनका जिक्र पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती से लेकर अलगाववादी नेता भी करते हैं। वाजपेयी ने अपने कश्मीर दौरे के दौरान एक रैली में कश्मीर की जनता को विधानसभा चुनावों में बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाने के लिए धन्यवाद देते हुए  कहा था कि कश्मीरियों को गोलियों का जवाब वोट से देना चाहिए।

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