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आंदोलन के मूड में हैं JDU के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव

Tue, 01 Aug 2017 11:26 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 01 Aug 2017 11:26 PM IST
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 Former president of JD (U) Sharad Yadav is in movement mood
फाइल फोटो

आंदोलन की पृष्ठभूमि से राजनीति में आए शरद यादव एक बार फिर आंदोलन के मूड में है। उन्हें बिहार में अपने मुख्यमंत्री और पुराने राजनीति के साथी नीतिश कुमार द्वारा महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ चले जाना बुरी तरह से साल रहा है।

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इसको लेकर बिहार के दर्जन भर जद(यू) के बड़े नेताओं ने जहां नीतिश के कदम का विरोध किया है, वहीं राज्यों के जद(यू) प्रदेश अध्यक्षों ने बाकायदा पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। लिहाजा शरद यादव विकल्प में एक जोरदार आवाज बनने की भूमिका तैयार कर रहे हैं।
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शरद के करीबी एक सूत्र के अनुसार सांसद अली अनवर और वीरेन्द्र कुमार भी शरद यादव के साथ हैं। पार्टी के कुछ कद्दावर नेता चाहते हैं कि शरद यादव आगे बढ़ें, पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया जाए और एक दिशा तय हो। ऐसा माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र के बाद बिहार और देश की राजनीति में थोड़ी गरमाहट आनी तय है। इस क्रम में शरद जनता दल(यू) में बने रहकर नीतिश कुमार के भाजपा के साथ चले जाने का विरोध का विरोध तेज करेंगे।
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नीतिश की पहल पर हैरत
बिहार के मुख्यमंत्री और जद(यू) अध्यक्ष नीतिश कुमार ने 19 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। जबकि जद(यू) के नेताओं का कहना है कि यह कार्यकारिणी बनी ही नहीं है। बताते हैं कुछ महीने पहले नीतिश कुमार ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की एक सूची जारी की थी लेकिन अभी तक इसकी एक भी बैठक नहीं हुई है। ऐसे में 19 अगस्त की बैठक के बारे में कुछ भी बोलना ठीक नहीं है।

17 अगस्त को सांझी विरासत
शरद यादव संयम बरत रहे हैं, लेकिन शांत नहीं हैं। वह देश भर के पार्टी के नेताओं, समान विचारधारा वाले दलों के नेताओं का मन टटोल रहे हैं। इसी क्रम में शरद यादव ने 17 अगस्त को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सांझी विरासत का आयोजन किया है।

इसमें कांग्रेस, वामदल, समाजवादी पार्टी तथा देश भर में फैला जनता दल, समाजसे वादी परिवार से जुड़ा राजनीतिक दल शामिल होगा। लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल के भी शामिल होने की उम्मीद है। वस्तुत: शरद यादव में इसमें विपक्षी एकता को धार देने का प्रयास करेंगे।

उछला जा रहा है कीचड़
शरद यादव के ऊपर कीचड़ उछालने का काम भी शुरू हो गया है। भाजपा  और जद(यू ) खेमे से जुड़े सूत्र जहां इसे शरद यादव की अवसर वादिता बताकर केन्द्र में मंत्री पाने से जोड़ रहे हैं, वहीं शरद यादव के अनुयायी शांत हैं।  शरद यादव के करीबियों का कहना है कि जद(यू) के पूर्व अध्यक्ष ने हमेशा मूल्यों की राजनीति की है। वह आज भी अपने दृष्टिकोण पर कायम है।


शरद यादव के साथ करीब चार दशक से जुड़े सूत्र का कहना है कि यह उनके राष्ट्रीय राजनीति के अंतिम सोपान का दौर है। यहां से वह कुछ पाने की नहीं बल्कि देने की इच्छा रखते हैं। यह शरद सदव की दिली ख्वाहिश है कि कम से कम एक बार जनता दल और समाजवादी परिवार एक होकर देश की निर्णायक ताकत बन जाएं।

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