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कांग्रेस में 101 नेताओं के साथ शामिल हुए पूर्व बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी

Thu, 22 Feb 2018 09:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Feb 2018 09:52 PM IST
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Former BSP leader Naseemuddin Siddiqui along with his supporters joins Congress in delhi
Nasimuddin Siddiqui - फोटो : ANI

बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकीने बृहस्पतिवार को बसपा के 101 नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं के साथ अपने राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा का कांग्रेस में विलय कर दिया। नसीमुद्दीन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में अगर कांग्रेस का बसपा से कोई तालमेल होता है तो भी नेतृत्व का फैसला जिंदगी भर मानेंगे। प्रेस कांफ्रेस के दौरान बसपा छोड़ने का दर्द भी उनकी जुबान पर आया लेकिन कहा कि अब मायावती से उन्हें कोई शिकायत या नाराजगी नहीं है।

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यूपी के प्रभारी गुलाम नबी आजाद और अध्यक्ष राजबब्बर ने तीन चरणों में 101 छोटे बड़े नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने की औपचारिकताएं पूरी कीं। एक महीने पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सेे हुई मुलाकात में ही  नसीमुद्दीन को दलबल के साथ आने की हरी झंडी मिल गई थी। शामिल होने वालों में पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, एमएलसी और बसपा संगठन से जुड़े रहे कई बड़े पदाधिकारी हैं।
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इस मौके पर नसीमुद्दीन ने शायराना अंदाज में कहा कि दिल तोड़ना कठिन है मगर तोड़ना पड़ा, किश्ती को साहिलों की तरफ मोड़ना ही पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनके बाप-दादा की पार्टी रही है। हम भटक गए थे, नहीं भटके होते तो देश के ऐसे हालात न होते। धीरे-धीरे अन्य भटके लोग भी राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करेंगे। इस दौरान नसीमुद्दीन के मुंह से दो बार कांग्रेस की जगह बसपा निकला। फिर खुद को संभालते हुए कहा कि 34 साल जहां रहा उसे दिल और दिमाग से हटाने में 34 मिनट तो लगेंगे ही। 

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मायावती के नाराज होने का कोई कारण नहीं: आजाद

Former BSP leader Naseemuddin Siddiqui along with his supporters joins Congress in delhi
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद - फोटो : amar ujala

बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ बड़ी संख्या में नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मायावती के नाराज होने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने हमारे वर्तमान विधायक को तोड़ लिया था, तब भी हम नाराज नहीं हुए। इसके बावजूद हम चुनाव में गठबंधन को लेकर मायावती जी से मिले थे। जो लोग शामिल हुए हैं, उनमें से कुछ को बसपा से निकाला जा चुका है और कुछ उनके निकाले जाने के कारण पार्टी छोड़ आए हैं।

आजाद ने भविष्य में विपक्षी एकता की मजबूती और बड़े उद्देश्य को लेकर होने वाले समझौते से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम तो 27 साल यूपी बेहाल का नारा लेकर चुनाव में उतरे थे लेकिन रणक्षेत्र में ही सपा से समझौता हो गया।

कांग्रेस का मंच छोटा पड़ गया
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के मंच पर दो पंक्तियों में कुर्सियां लगाने के बावजूद बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता खड़े रहे या हॉल के बाहर थे। इसमें यूपी के विभिन्न हिस्सों और वर्गों के नेता शामिल हैं। उनके साथ आए कार्यकर्ताओं के कारण भी कांग्रेस मुख्यालय में भीड़ बढ़ गई।

कांग्रेस में शामिल होने वाले पूर्व मंत्रियों में ओपी सिंह, रघुनाथ प्रसाद शंखवार, लियाकत अली, पूर्व एमएलसी में अनिल अवाना और हुस्ना सिद्दीकी, पूर्व विधायक वीजेंद्र व्यास, राव वारिस, हाजी शाहबन, अरशद खान, मो. आसिफ, अली यूसुफ अली के अलावा प्रमुख नेताओं में ब्रह़्म स्वरूप सागर, अच्छेलाल निषाद, केपी मावी, कैप्टन दिनेश सिंह, शिव शंकर भुरजी, प्रीतम सिंह प्रेमी, देशराज, प्रदेश प्रभारी जमीरूद्दीन, मनोज सक्सेना, हीरालाल विश्वकर्मा, मुमताज अली और सैय्यद महबूल अली आदि मौजूद थे।

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