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विदेशी कंपनियां लगा रही हैं भारतीयों की गोपनीयता में सेंध, केंद्र सरकार ने स्वीकार किया ये खतरा
Mon, 01 Mar 2021 05:02 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 01 Mar 2021 05:02 PM IST
सार
साल 2017 में 21,796, 2018 में 27,248 और 2019 में ऐसे मामलों की संख्या 44,546 रही है। केंद्र सरकार ने विदेशी कंपनियों और उनके एप पर निगरानी रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है....
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हैकिंग, चीनी हैकर्स, साइबर क्राइम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
विदेशी कंपनियों द्वारा 'आईटी और एप' के माध्यम से भारतीयों की गोपनीयता में बड़ी सेंध लगाई जा रही है। भारतीयों के डाटा की निजता को खतरा पैदा हो चुका है। खास बात है कि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी यह बात स्वीकार की है कि इस तरह के एप का उपयोग करने वाले लोगों के लिए 'संभावित दुरुपयोग और गोपनीयता जोखिम' के संबंध में खतरा हमेशा बना रहता है। साइबर अपराध के मामले भी इसी श्रेणी में आते हैं।
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साल 2017 में 21,796, 2018 में 27,248 और 2019 में ऐसे मामलों की संख्या 44,546 रही है। केंद्र सरकार ने विदेशी कंपनियों और उनके एप पर निगरानी रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है। ये एजेंसियां अपने स्तर पर विदेशी कंपनियों द्वारा तैयार आईटी प्लेटफॉर्म एवं एप के जरिए उत्पन्न होने वाली सूचना सामग्री प्रवाह पर निगरानी रख रही हैं।
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बता दें कि इससे पहले भी केंद्र सरकार ने चीन की दर्जनों एप्स पर बैन लगा दिया था। इसके पीछे गोपनीयता और सूचना प्रक्रिया में सेंध लगाना एक बड़ा कारण रहा है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, गुमनाम व सीमाहीन साइबर स्पेस के साथ मोबाइल टेलीफोन कनेक्टीविटी में तीव्र वद्धि सहित इंटरनेट व स्मार्टफोन का उपयोग करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
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विश्व में कहीं से भी किसी के द्वारा साइबर अपराध की वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। इसी वजह से साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीयों के डाटा की निजता संबंधी कोई खतरा पैदा किया जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धौत्रे के अनुसार, साइबर स्पेस इंटरनेट पर विभिन्न देशों के लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और सेवाओं का एक जटिल वातावरण है। इसमें त्वरित संचार और गुमनामी की संभावना के साथ सीमा रहित साइबर स्पेस के साथ आपराधिक गतिविधियों के लिए साइबर स्पेस व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की संभावना एक वैश्विक मुद्दा बन गया है।
दुनिया में किसी भी जगह पर बने और इंटरनेट/एप स्टोर के माध्यम से उपलब्ध कराए गए किसी एप को कहीं से भी एक्सेस किया जा सकता है। इस तरह के अधिकांश एप बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डाटा एकत्रित करते हैं। इस तरह के डाटा को किसी अन्य इकाई में स्थानांतरित किया जा सकता है।
हालांकि इस तरह के सभी संग्रह, प्रसंस्करण और हस्तांतरण उपयोगकर्ता की पूर्व सहमति से होने चाहिए, क्योंकि उपयोगकर्ता के लिए संभावित दुरुपयोग और गोपनीयता जोखिम के संबंध में खतरा सदैव बना रहता है। केंद्र सरकार ने इसके लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है। ये एजेंसियां मामलों के आधार पर ऐसी सूचना सामग्री की निगरानी करती हैं।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2019 के शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में निजी डाटा संरक्षण बिल को प्रस्तुत किया है। इस बिल को संसद की एक संयुक्त समिति के समक्ष रखा गया है।