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अफगानिस्तान शांति वार्ता: तालिबान से बातचीत को अनुकूल माहौल के लिए रूस में हुई बैठक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 09 Nov 2018 08:39 AM IST
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तालिबान से सीधी बातचीत को अनुकूल माहौल बनाने के लिए रूस ने शुक्रवार को अफगानिस्तान पर बैठक आयोजित की। इसमें तालिबान का प्रतिनिधित्व भी शामिल हुआ। पहली बार इस हाई प्रोफाइल बैठक में भारत की भी मौजूद रहा। इससे पहले भारत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह अफगानिस्तान पर मास्को में गैर आधिकारिक स्तर पर बैठक में भाग लेगा।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मास्को में अफगानिस्तान पर दूसरी बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि हम अफगानिस्तान के इतिहास में नए अध्याय शुरू करने के लिए किसी भी तरह के प्रयास के लिए दृढ़ संकल्प हैं। उन्होंने कहा कि रूस के साथ-साथ इस क्षेत्र के सभी देश अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत की शुरुआत को लेकर हर संभव प्रयास करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और इस क्षेत्र के सभी देश अफगानिस्तान को शांतिप्रिय, स्वतंत्र और आतंकवाद मुक्त देश के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम अफगान हाई पीस काउंसिल और तालिबान मूवमेंट के शिष्टमंडल का स्वागत करते हैं। मास्को स्थिति अमेरिकी दूतावास ने बैठक की समीक्षा के लिए अपने राजनयिक भेजे थे। इस तरह की पहली बैठक 4 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अंतिम समय में अफगान सरकार ने मास्को के अनावश्यक हस्तक्षेप पर बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
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बैठक में राघवन और अमर सिन्हा ने किया नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व
बैठक में अफगानिस्तान, भारत, ईरान, चीन, पाकिस्तान सहित कई अन्य देश भी शामिल हुए। अफगानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत अमर सिन्हा और पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त टीसीए राघवन ने नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान पर उसकी नीति स्थिर है और शांति वार्ता अफगान के नेतृत्व में अफगान सरकार द्वारा होनी चाहिए।
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रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मास्को में अफगानिस्तान पर दूसरी बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि हम अफगानिस्तान के इतिहास में नए अध्याय शुरू करने के लिए किसी भी तरह के प्रयास के लिए दृढ़ संकल्प हैं। उन्होंने कहा कि रूस के साथ-साथ इस क्षेत्र के सभी देश अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत की शुरुआत को लेकर हर संभव प्रयास करेंगे।
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अंतरराष्ट्रीय समुदाय और इस क्षेत्र के सभी देश अफगानिस्तान को शांतिप्रिय, स्वतंत्र और आतंकवाद मुक्त देश के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम अफगान हाई पीस काउंसिल और तालिबान मूवमेंट के शिष्टमंडल का स्वागत करते हैं। मास्को स्थिति अमेरिकी दूतावास ने बैठक की समीक्षा के लिए अपने राजनयिक भेजे थे। इस तरह की पहली बैठक 4 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अंतिम समय में अफगान सरकार ने मास्को के अनावश्यक हस्तक्षेप पर बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
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बैठक में राघवन और अमर सिन्हा ने किया नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व
बैठक में अफगानिस्तान, भारत, ईरान, चीन, पाकिस्तान सहित कई अन्य देश भी शामिल हुए। अफगानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत अमर सिन्हा और पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त टीसीए राघवन ने नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान पर उसकी नीति स्थिर है और शांति वार्ता अफगान के नेतृत्व में अफगान सरकार द्वारा होनी चाहिए।