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Hindi News ›   India News ›   For SC/ST Atrocities Act to Apply, Hurling of Abuse Has To Be in Public Place: Karnataka HC

Karnataka HC: कर्नाटक हाई कोर्ट का अहम फैसला, सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार के मामले में ही लागू होगा एससी-एसटी एक्ट 

Fri, 24 Jun 2022 05:58 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 24 Jun 2022 05:58 PM IST
सार

2020 में हुई कथित घटना के मुताबिक, आरोपी रितेश पियास ने शिकायतकर्ता मोहन को एक इमारत के तहखाने में जातिवादी गाली दी जहां वह दूसरों कर्मचारियों के साथ काम कर रहा था।  

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For SC/ST Atrocities Act to Apply, Hurling of Abuse Has To Be in Public Place: Karnataka HC
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध तभी लागू होगा जब ऐसा दुर्व्यवहार सार्वजनिक स्थान पर हुआ हो।  एक इमारत के तहखाने में कथित रूप से जातिवादी गालियों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामले को खारिज करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध लागू होने के लिए ऐसे दुर्व्यवहार को सार्वजनिक स्थान पर होना चाहिए। 2020 में हुई कथित घटना में आरोपी रितेश पियास ने शिकायतकर्ता मोहन को एक इमारत के तहखाने में जातिवादी गाली दी जहां वह दूसरों कर्मचारियों के साथ काम कर रहा था।  

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सार्वजनिक स्थान पर कहे गए अपशब्दों के आधार पर ही लागू होगा कानून 
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने 10 जून को अपने फैसले में कहा कि बयानों को पढ़ने से दो तथ्य सामने आते हैं, पहला, इमारत का तहखाना सार्वजनिक स्थान नहीं था और दूसरा, केवल नियोक्ता जयकुमार नायर के कर्मचारी और शिकायतकर्ताओं के मित्र वहां उपस्थित थे। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर कहे गए अपशब्दों के आधार पर ही यह अधिनियम लागू हो सकता है। 
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इसके अलावा अदालत ने कहा कि मामले में अन्य तथ्य भी थे। आरोपी रितेश पियास का भवन के मालिक जयकुमार आर. नायर से विवाद था और उसने भवन निर्माण के खिलाफ स्टे ले लिया था। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि नायर पियास पर अपने कर्मचारी (मोहन) के कंधे पर बंदूक रखकर गोली चला रहा था। अदालत ने कहा कि दोनों के बीच विवाद के मुद्दे को खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि यह घटनाओं की श्रृंखला में एक स्पष्ट संबंध को प्रदर्शित करता है।  
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निचली अदालत के समक्ष लंबित मामले को रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों के आलोक में जब अपराध के मूल तत्व गायब हैं, तो इस तरह की कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति देना और याचिकाकर्ता को कठोरता का सामना करने के लिए मजबूर करना पूरी तरह से अनुचित होगा। इससे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। 

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