FAO: 35 महीनों के निचले स्तर पर पहुंचा खाद्य मूल्य सूचकांक, वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ा
वनस्पति तेल सूचकांक में दिसंबर की तुलना में 0.1% की मामूली वृद्धि हुई है। अब भी पिछले साल की तुलना में 12.8%कम है। यह बदलाव वैश्विक स्तर पर पाम और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि से है।
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार वैश्विक बाजार में खाद्य कीमतों में गिरावट का जो सिलसिला पिछले साल शुरू हुआ था, वह जनवरी में भी जारी रहा। गेहूं और मक्के के साथ मांस की कीमतों में गिरावट से वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक (फूड प्राइस इंडेक्स) में जनवरी 2024 में भी गिरावट दर्ज की गई। इसी वजह से जनवरी 2024 में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक करीब तीन वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
वैश्विक स्तर पर जिन खाद्य पदार्थों का सबसे ज्यादा व्यापार किया जाता है यह सूचकांक उनको ट्रैक करता है। एएफओ के अनुसार जनवरी 2024 में खाद्य मूल्य सूचकांक 118 अंक रिकॉर्ड किया गया जबकि दिसंबर 2023 में यह 119.1 अंक था। पिछले महीने के मुकाबले जनवरी में करीब एक फीसदी कम रहा। पिछले 35 महीनों में यह सूचकांक कभी भी इतना नीचे नहीं गया। इससे पहले फरवरी 2021 में सूचकांक 116.5 अंक दर्ज किया गया।
वनस्पति तेल के सूचकांक में मामूली वृद्धि
वनस्पति तेल सूचकांक में दिसंबर की तुलना में 0.1% की मामूली वृद्धि हुई है। अब भी पिछले साल की तुलना में 12.8%कम है। यह बदलाव वैश्विक स्तर पर पाम और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि से है।
अनाज मूल्य सूचकांक में 2.2 फीसदी गिरावट
एफएओ के अनुसार अनाज मूल्य सूचकांक दिसंबर 2023 में 122.8 अंक था। जनवरी 2024 में घटकर 120.1 अंक पर पहुंच गया है। जनवरी में दक्षिण के देशों में आपूर्ति बढ़ाने के कारण गेहूं की कीमतों में गिरावट देखी गई। इससे विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। अर्जेंटीना और अमेरिका में अच्छी पैदावार से मक्के की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे इसकी आपूर्ति भी बढ़ी है। दूसरी तरफ जनवरी में चावल की कीमतों में 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में अच्छी गुणवत्ता वाले चावल की मांग बढ़ी है और इंडोनेशिया ने भी अधिक चावल खरीदा है।
डेयरी मूल्य सूचकांक
डेयरी मूल्य सूचकांक लगभग दिसंबर जितना ही रहा। हालांकि एक साल पहले की तुलना में 17.8 फीसदी कम था। जनवरी माह के दौरान एशिया में अधिक मांग के कारण मक्खन और दूध की कीमतों में वृद्धि हुई है।
मांस सूचकांक
मांस सूचकांक लगातार सातवें महीने गिरा है। दिसंबर की तुलना में 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई है। चीनी के सूचकांक में पिछले महीने की तुलना में 0.8% की वृद्धि हुई है। वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में जो उछाल आया, अनाज और मांस की कीमतों में आई गिरावट ने उसकी भरपाई कर दी है।
2023 में अनाज के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान, मोटे अनाज का दबदबा
एएफओ के अनुसार 2023 में वैश्विक स्तर पर अनाज उत्पादन 283.6 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। यह 2022 की तुलना में 1.2 फीसदी ज्यादा हो सकता है। मोटे अनाज का वैश्विक उत्पादन भी बढ़कर 152.3 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अनुमान है कि इसमें 1.2 करोड़ टन की वृदि्ध हुई है। यह कनाडा, चीन, तुरि्कये व अमेरिका में उत्पादन वृद्धि के कारण हुई है। इन देशों में अपेक्षा से अधिक पैदावार हुई है। खाद्य और कृषि संगठन के आंकड़ों के अनुसार, मोटे अनाजों के उत्पादन में दुनिया में भारत अब भी पहले स्थान पर है। पूरी दुनिया के करीब 3.05 करोड़ टन उत्पादन में भारत की भागीदारी 1.25 करोड़ टन की है। भारत अकेले 41 फीसदी मोटा अनाज उगा रहा है। पिछले 5 वर्षों के दौरान भारत 1.25 से 1.80 करोड़ टन मोटे अनाज का उत्पादन कर रहा है। भारत श्रीअन्न का सबसे बड़ा उत्पादक है।