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Interview: 'राजकोषीय अनुशासन और विकास को लेकर सरकार प्रतिबद्ध', भारत की वित्तीय नीति पर बोलीं निर्मला सीतारमण
Sun, 02 Feb 2025 04:56 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 02 Feb 2025 04:56 PM IST
सार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने कभी भी अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में चूक नहीं की है। उन्होंने क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज की तरफ से भारत की रेटिंग न बढ़ाने पर अधिक चिंता न जताते हुए कहा कि सरकार अपने वित्तीय लक्ष्यों पर पूरी तरह कायम है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का साक्षात्कार
- फोटो : PTI / अमर उजाला
विस्तार
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश की बेदाग वित्तीय साख और मजबूत आर्थिक नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने कभी भी अपने राजकोषीय समेकन या ऋण कटौती लक्ष्यों से पीछे नहीं हटने दिया। उन्होंने यह बयान तब दिया जब मूडीज जैसी रेटिंग एजेंसियों ने भारत की साख में बढ़ोतरी नहीं की। भारत सरकार वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को बनाए रखने की नीति पर कार्यरत है। ऋण-से-जीडीपी अनुपात को नियंत्रित करने, पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देने और राजकोषीय घाटे को चरणबद्ध तरीके से कम करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
डॉलर को छोड़कर अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपया स्थिर- सीतारमण
वित्त मंत्री ने कहा, 'मैं रुपये की विनिमय दर में गिरावट से चिंतित हूं लेकिन मैं इस आलोचना को स्वीकार नहीं करूंगी कि, ओह रुपया कमजोर हो रहा है! हमारी वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत है। अगर बुनियाद कमजोर होती, तो रुपया सभी मुद्राओं के मुकाबले स्थिर नहीं होता।' सीतारमण ने कहा, 'रुपये में जो अस्थिरता है, वह डॉलर के मुकाबले है। रुपया किसी भी अन्य मुद्रा की तुलना में कहीं अधिक स्थिर रहा है।'
'आलोचना करें, लेकिन पहले अध्ययन करके बोलें'
उन्होंने कहा, 'आरबीआई उन तरीकों पर भी विचार कर रहा है, जिनसे वह भारी उतार-चढ़ाव के कारणों को दुरुस्त करने के लिए ही बाजार में हस्तक्षेप करेगा। इसलिए हम सभी स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।' वित्त मंत्री ने रुपये की अस्थिरता और विनिमय दर में गिरावट को लेकर आलोचना करने वालों के बारे में कहा कि वे दलील देने में जल्दबाजी दिखा रहे हैं। सीतारमण ने कहा, 'आज डॉलर के मजबूत होने और अमेरिका में नए प्रशासन के आने के साथ, रुपये में आ रहे उतार-चढ़ाव को समझना होगा। आलोचनाएं हो सकती हैं, लेकिन उससे पहले थोड़ा और अध्ययन कर प्रतिक्रिया देना बेहतर होगा।' पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपया दबाव में रहा है लेकिन यह एशिया और अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में सबसे कम अस्थिर मुद्रा है। हाल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने का कारण व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 2025 में ब्याज दर में कम कटौती के संकेत के बाद डॉलर सूचकांक में उछाल है।
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डॉलर को छोड़कर अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपया स्थिर- सीतारमण
वित्त मंत्री ने कहा, 'मैं रुपये की विनिमय दर में गिरावट से चिंतित हूं लेकिन मैं इस आलोचना को स्वीकार नहीं करूंगी कि, ओह रुपया कमजोर हो रहा है! हमारी वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत है। अगर बुनियाद कमजोर होती, तो रुपया सभी मुद्राओं के मुकाबले स्थिर नहीं होता।' सीतारमण ने कहा, 'रुपये में जो अस्थिरता है, वह डॉलर के मुकाबले है। रुपया किसी भी अन्य मुद्रा की तुलना में कहीं अधिक स्थिर रहा है।'
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'आलोचना करें, लेकिन पहले अध्ययन करके बोलें'
उन्होंने कहा, 'आरबीआई उन तरीकों पर भी विचार कर रहा है, जिनसे वह भारी उतार-चढ़ाव के कारणों को दुरुस्त करने के लिए ही बाजार में हस्तक्षेप करेगा। इसलिए हम सभी स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।' वित्त मंत्री ने रुपये की अस्थिरता और विनिमय दर में गिरावट को लेकर आलोचना करने वालों के बारे में कहा कि वे दलील देने में जल्दबाजी दिखा रहे हैं। सीतारमण ने कहा, 'आज डॉलर के मजबूत होने और अमेरिका में नए प्रशासन के आने के साथ, रुपये में आ रहे उतार-चढ़ाव को समझना होगा। आलोचनाएं हो सकती हैं, लेकिन उससे पहले थोड़ा और अध्ययन कर प्रतिक्रिया देना बेहतर होगा।' पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपया दबाव में रहा है लेकिन यह एशिया और अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में सबसे कम अस्थिर मुद्रा है। हाल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने का कारण व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 2025 में ब्याज दर में कम कटौती के संकेत के बाद डॉलर सूचकांक में उछाल है।
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भारत की वित्तीय नीति पर वित्त मंत्री का साक्षात्कार
- फोटो : PTI
राजकोषीय अनुशासन और विकास का संतुलन
निर्मला सीतारमण ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में वित्तीय अनुशासन और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने मध्यम वर्ग को अब तक की सबसे बड़ी कर राहत दी, साथ ही अगले वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे में कटौती की रूपरेखा प्रस्तुत की और वर्ष 2031 तक जीडीपी के अनुपात में ऋण में कमी लाने की योजना रखी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार को आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक उधारी लेनी पड़ी थी। इसके पीछे वैश्विक चुनौतियां, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और कई भौगोलिक क्षेत्रों में जारी संघर्ष जैसे कारण थे। इसके बावजूद, सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों का पालन किया और अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को निभाया।
निर्मला सीतारमण ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में वित्तीय अनुशासन और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने मध्यम वर्ग को अब तक की सबसे बड़ी कर राहत दी, साथ ही अगले वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे में कटौती की रूपरेखा प्रस्तुत की और वर्ष 2031 तक जीडीपी के अनुपात में ऋण में कमी लाने की योजना रखी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार को आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक उधारी लेनी पड़ी थी। इसके पीछे वैश्विक चुनौतियां, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और कई भौगोलिक क्षेत्रों में जारी संघर्ष जैसे कारण थे। इसके बावजूद, सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों का पालन किया और अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को निभाया।
भारत की वित्तीय नीति पर निर्मला सीतारमण का साक्षात्कार
- फोटो : PTI
मूडीज का दृष्टिकोण और भारत की प्रतिक्रिया
शनिवार को मूडीज रेटिंग एजेंसी ने भारत की संप्रभु रेटिंग को तत्काल बढ़ाने से इनकार कर दिया। मूडीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष क्रिश्चियन डी गुस्मान ने कहा कि भारत की सख्त वित्तीय नीति और घाटे में कमी सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन ऋण भार में पर्याप्त कमी और राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी के बिना रेटिंग में सुधार संभव नहीं। वर्तमान में मूडीज ने भारत को 'Baa3' स्थिर दृष्टिकोण के साथ वर्गीकृत किया है, जो न्यूनतम निवेश श्रेणी में आता है। निर्मला सीतारमण ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत उधारी को नियंत्रित करने और ऋण को जीडीपी के अनुपात में कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के आर्थिक कदम कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से अधिक अनुशासित हैं।
शनिवार को मूडीज रेटिंग एजेंसी ने भारत की संप्रभु रेटिंग को तत्काल बढ़ाने से इनकार कर दिया। मूडीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष क्रिश्चियन डी गुस्मान ने कहा कि भारत की सख्त वित्तीय नीति और घाटे में कमी सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन ऋण भार में पर्याप्त कमी और राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी के बिना रेटिंग में सुधार संभव नहीं। वर्तमान में मूडीज ने भारत को 'Baa3' स्थिर दृष्टिकोण के साथ वर्गीकृत किया है, जो न्यूनतम निवेश श्रेणी में आता है। निर्मला सीतारमण ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत उधारी को नियंत्रित करने और ऋण को जीडीपी के अनुपात में कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के आर्थिक कदम कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से अधिक अनुशासित हैं।
वित्तीय घाटे और पूंजीगत व्यय पर जोर
अपने आठवें बजट में, वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.8% रहेगा, जो कि पूर्व निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप है। अगले वित्तीय वर्ष (2025-26) में इसे घटाकर 4.4% करने की योजना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अपने ऋण प्रबंधन को एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुरूप रखेगी। सरकार ने यह घोषणा की है कि दीर्घकालिक दृष्टि से ऋण को व्यवस्थित रूप से कम किया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि वित्तीय अनुशासन के बावजूद, सार्वजनिक व्यय में कोई कटौती नहीं की गई है। सरकार ने पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है, क्योंकि यह आर्थिक विकास को गति देता है। 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय को 11.21 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो कि संशोधित अनुमान 10.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
अपने आठवें बजट में, वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.8% रहेगा, जो कि पूर्व निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप है। अगले वित्तीय वर्ष (2025-26) में इसे घटाकर 4.4% करने की योजना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अपने ऋण प्रबंधन को एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुरूप रखेगी। सरकार ने यह घोषणा की है कि दीर्घकालिक दृष्टि से ऋण को व्यवस्थित रूप से कम किया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि वित्तीय अनुशासन के बावजूद, सार्वजनिक व्यय में कोई कटौती नहीं की गई है। सरकार ने पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है, क्योंकि यह आर्थिक विकास को गति देता है। 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय को 11.21 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो कि संशोधित अनुमान 10.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
भारत की वित्तीय नीति पर निर्मला सीतारमण का साक्षात्कार
- फोटो : PTI
राज्यों को समर्थन और व्यय की गुणवत्ता पर जोर
वित्त मंत्री ने राज्यों की तरफ से पूंजीगत व्यय में बढ़ती रुचि की सराहना की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से प्रदान किए गए 50 वर्ष के ब्याज मुक्त ऋण का सही उपयोग हुआ है, जिससे व्यय की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। हालांकि, 2024-25 में पूंजीगत व्यय बजट अनुमान 11.11 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया के कारण चार महीने में खर्च धीमा पड़ा।
भारत का दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार अपनी कर्ज-जीडीपी अनुपात को धीरे-धीरे कम करेगी और सभी वित्तीय वादों को पूरा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य विकसित देश इस तरह के सख्त वित्तीय नियंत्रण का पालन नहीं कर रहे हैं, लेकिन भारत बिना किसी सामाजिक कल्याण योजना को प्रभावित किए अपने लक्ष्यों पर आगे बढ़ रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार सिर्फ बड़े बजट पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि खर्च की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। राज्यों को भी 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।
वित्त मंत्री ने राज्यों की तरफ से पूंजीगत व्यय में बढ़ती रुचि की सराहना की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से प्रदान किए गए 50 वर्ष के ब्याज मुक्त ऋण का सही उपयोग हुआ है, जिससे व्यय की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। हालांकि, 2024-25 में पूंजीगत व्यय बजट अनुमान 11.11 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया के कारण चार महीने में खर्च धीमा पड़ा।
भारत का दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार अपनी कर्ज-जीडीपी अनुपात को धीरे-धीरे कम करेगी और सभी वित्तीय वादों को पूरा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य विकसित देश इस तरह के सख्त वित्तीय नियंत्रण का पालन नहीं कर रहे हैं, लेकिन भारत बिना किसी सामाजिक कल्याण योजना को प्रभावित किए अपने लक्ष्यों पर आगे बढ़ रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार सिर्फ बड़े बजट पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि खर्च की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। राज्यों को भी 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।