Flood Alert: बाढ़ की सटीक जानकारी देना होगा संभव, हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड जैसी बाढ़ से बचेंगी लोगों की जान
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विस्तार
बाढ़ के कारण हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक में लोगों की जान मुसीबत में फंसी हुई है। लेकिन जल्द ही किसी भी क्षेत्र में, विशेषकर शहरी इलाकों में आने वाली बाढ़ की सटीक जानकारी देना संभव होगा। बाढ़ की सही जानकारी मिलने पर एजेंसियां लोगों को समय रहते सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचा सकेंगी और लोगों के जानमाल की सुरक्षा हो सकेगी। एनडीएमए, आईएमडी और टेरी के सहयोग से बने इस बाढ़ अलर्ट सिस्टम (जिसे फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम (FEWS) नाम दिया गया है) से किसी भी क्षेत्र में आने वाली बाढ़ की तीन दिन पहले सटीक जानकारी देना संभव होगा। अभी इस सिस्टम का ट्रायल असम के गुवाहाटी में चल रहा है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। कुछ सुधार के बाद राज्य सरकारें इसे अपने यहां इस्तेमाल कर सकेंगी।
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इस फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम से किसी क्षेत्र में आने वाली बाढ़ की पूर्व सूचना देने के लिए विभिन्न विभागों से मिलने वाले आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया जाता है। जैसे भारत मौसम विभाग से उस क्षेत्र में होने वाली बारिश की संभावना के आंकड़े एकत्र किया जाते हैं। शहर विशेष में बड़े नालों, छोटी नालियों सहित सभी जल निकासी के मार्गों और तालाबों-झीलों में जल संग्रह की अधिकतम क्षमता का आकलन किया जाता है। शहर के नालों-नालियों की सफाई और सिल्ट निकालने का काम कितना पूरा हुआ है, इसकी पूरी जानकारी संबंधित नगर निगम या राज्य सरकारों से प्राप्त किया जाता है।
इसके बाद यह अनुमान लगाया जाता है कि उस क्षेत्र में होने वाली बाढ़ का कितना पानी जल निकासी मार्गों से समय रहते निकाला जा सकता है और कितना पानी शहर में अतिरिक्त होगा, जो बाढ़ का कारण बनेगा। आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करने के बाद यह बताना लगभग शत-प्रतिशत संभव हो जाता है कि अतिरिक्त पानी से शहर के किस स्थान पर कितनी बाढ़ आ सकती है।
बाढ़ की भविष्यवाणी कितनी सटीक
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (teri) के फेलो प्रसून सिंह ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग (NDMA) के सहयोग से उनकी टीम ने इस सिस्टम को विकसित करने का काम किया है। इस सिस्टम की सटीकता इसको मिलने वाले सही आंकड़ों पर निर्भर करती है। जैसे किसी क्षेत्र में होने वाली बारिश की संभावना का आईएमडी के द्वारा जितनी सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी, इस सिस्टम से बाढ़ की उतनी ही सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी।
सटीकता के लिए किसी शहर में पिछले दस वर्षों में होने वाली अधिकतम बारिश का आंकड़ा बाढ़ की सूचना देने के लिए उपयोग किया जाता है। (लेकिन अचानक किसी क्षेत्र में 50 या 100 सालों में अचानक सबसे ज्यादा बारिश हो जाने से बाढ़ की सटीकता प्रभावित हो सकती है।)
यह भविष्यवाणी ऑटोमेटिक मोड पर काम करती है, यानी विभिन्न विभागों से आंकड़े एकत्र कर यह क्षेत्रों में तीन दिन से लेकर छह घंटे पूर्व तक बाढ़ की सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। संबंधित विभागों को ऑटोमेटिक अलर्ट भेजकर बड़े नुकसान से लोगों को बचाया जा सकता है। ऑनलाइन उपलब्ध होने के कारण सामान्य लोग भी इससे सूचना प्राप्त कर अपना बचाव कर सकते हैं।
इसी प्रकार किसी शहर के नालों-नालियों के जल निकासी की क्षमता निश्चित होती है। यदि उनमें सफाई का काम सही से पूरा हुआ है तो इससे पर्याप्त मात्रा में जल निकासी संभव होगा। लेकिन सिल्ट निकालने का काम सही से नहीं हुआ है, तो जल निकासी की क्षमता प्रभावित रहेगी। ऐसे में यदि नगर निगमों के द्वारा सिल्ट निकालने के काम की सही सूचना साझा की जाए, तो इस सिस्टम से बाढ़ की सटीकता से पाई जा सकती है। सही आंकड़ों को साझा न किए जाने से बाढ़ अलर्ट की जानकारी प्रभावित हो सकती है।
गुवाहाटी ट्रायल प्रोजेक्ट कितना सफल
इस फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम का ट्रायल प्रोजेक्ट 2020 में असम के गुवाहाटी में शुरू किया गया था। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। सिस्टम की कुछ तकनीकी बाध्यताएं भी सामने आई हैं, जिसे दूर करने का काम किया जा रहा है। इसके पहले चेन्नई और मुंबई के लिए भी एक बाढ़ अलर्ट सिस्टम विकसित किया गया था, जो अच्छे परिणाम दे रहा है।