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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला- तीन तलाक को बताया असंवैधानिक

Tue, 22 Aug 2017 02:04 PM IST
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल Updated Tue, 22 Aug 2017 02:04 PM IST
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five judge bench of supreme court to pronunce verdict on triple talaq today
supreme court

तीन तलाक के महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ के तीन जजों ने इसे असंवैधानिक बताया है। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस फली नरीमन, जस्टिस जोसेफ कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा- इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन होता है। जबकि इससे पहले चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि तीन तलाक धार्मिक प्रक्रिया और भावनाओं से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता। 

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खेहर ने कहा कि इस मुद्दे पर सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है संसद और केंद्र सरकार, उन्हें ही इस पर कानून बनाना चाहिए। सरकार को कानून बनाकर इस पर एक स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने चाहिए। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इसके लिए केंद्र सरकार को छह महीने का समय दिया। खेहर ने कहा कि छह महीने तक के लिए कोर्ट अनुच्छेद 142
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के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर तत्काल रोक लगाती है। इस अवधि में देशभर में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा। 



 





live updates-

-चीफ जस्टिस के बाद तीन अन्य जजों जस्टिस फली नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस कुरियन ने इस पर अपना फैसला सुनाते हुए एक बार में तीन तलाक को असैंवधानिक करार दिया है।


-चीफ जस्टिस ने अपनी अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर फिलहाल देशभर में छह महीने के लिए रोक लगा दी है।

-फैसले में चीफ जस्टिस ने कहा कि यह मामला धार्मिक प्रक्रियाओं से जुड़ा है इसलिए संसद को इस पर कानून बनाना चाहिए।

- सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसे रद्द करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मसला है इसलिए सरकार और संसद को इसमें बदलाव की पहल करनी चाहिए।

-  चीफ जस्टिस ने यह भी कहा तलाक ए बिद्दत अनुच्छेद 14,15,21 और 25 का उल्लंघन नहीं है।
 

वहीं फैसला आने से पहले इस केस में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली सायरा बानो ने कहा कि फैसला उनके पक्ष में आएगा। सायरा ने कहा कि समय बदल चुका है और इस पर नया कानून बनेगा।

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वहीं पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि आज बड़ा दिन है, देखते हैं कि कोर्ट क्या फैसला देता है।

 

जानिए इस पर कौन कौन थे पक्षकार और क्या था उनके तर्क

five judge bench of supreme court to pronunce verdict on triple talaq today
ट्रिपल तलाक
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड --

तीन तलाक 1400 वर्षों से चली आ रही परंपरा है। यह अदालत के अधिकारक्षेत्र में नहीं है कि वह 1400 वर्षों से चली आ रही परंपरा को गैरकानूनी या असंवैधानिक करार दें। यह ‘फिसलन वाली ढलान’ है, लिहाजा अदालत को इस मामले में एहतिहात बरतने की जरूरत है। बोर्ड ने सुनवाई के अंतिम चरण में कहा था कि वह नहीं चाहता है कि तीन तलाक की प्रथा जारी रहे इसलिए उसने यह तय किया कि  नए निकाहनामे में तीन तलाक न लेने की शर्त होगी। बोर्ड ने कहा कि इस संबंध में देशभर के तमाम काजियों को एडवाजरी भेजने का निर्णय लिया गया है।

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ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड --
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तीन तलाक इस्लाम धर्म के मूल में नहीं है। तीन तलाक इस्लाम की सभी चीजों का उल्लंघन है। शरीयत, कुरान है न कि धर्मगुरुओं का छंद या अनुवाक्य है। कुरान में तलाक की प्रक्रिया दर्ज है। इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं ने अपनी पसंद के हिसाब से कुरान के तत्वों को तोड़-मरोड़ लिया है।

इस मामले में कपिल सिब्बल, राम जेठमलानी, सलमान खुर्शीद, आनंद ग्रोवर, इंदिरा जयसिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान सहित कई नामी गिरामी वरिष्ठ वकीलों ने अपना-अपना पक्ष रखा।
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