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Fatima Beevi: सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज का निधन, 96 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; जानिए इनके बारे में

Thu, 23 Nov 2023 01:29 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 23 Nov 2023 01:29 PM IST
सार

Fatima Beevi Death News: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवा देने के बाद उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होकर राजनीतिक क्षेत्र पर भी अपनी छाप छोड़ी।

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Fatima Beevi Death News First Woman Supreme Court Judge Dies At 96 Know Details in Hindi
फातिमा बीवी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज और तमिलनाडु की पूर्व राज्यपाल फातिमा बीवी का निधन हो गया है। उन्होंने 96 साल की उम्र में अंतिम सांस ली है। 

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महिलाओं के लिए आदर्श रहीं
(दिवंगत) न्यायाधीश फातिमा बीवी ने अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान देशभर में महिलाओं के लिए एक आदर्श और नजीर के रूप में काम किया है। फातिमा बीवी का नाम ज्यूडिशरी ही नहीं बल्कि देश के इतिहास में भी स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं। 
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राजनीति क्षेत्र में भी छोड़ी छापि
फातिमा बीवी तमिलनाडु की पूर्व राज्यपाल भी रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवा देने के बाद उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होकर राजनीतिक क्षेत्र पर भी अपनी छाप छोड़ी।
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केरल की रहने वालीं
बता दें, केरल के पंडालम की रहने बीवी फातिमा ने पथानामथिट्टा के कैथोलिकेट हाईस्कूल में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। बाद में तिरुवनंतपुरम के कॉलेज से बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल की और 14 नवंबर, 1950 में एक वकील के रूप में दाखिला लिया।

कई खिताब खुद के नाम
वह किसी भी उच्च न्यायपालिका में नियुक्त होने वाली पहली मुस्लिम महिला न्यायाधीश भी थीं। साथ ही एशिया में एक राष्ट्र के सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश का खिताब भी उन्हीं के नाम है। फातिमा बीवी साल 1989 में सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीश बनी थीं, जो पहली भारतीय महिला थीं। 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य भी रह चुकीं
तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होने से पहले फातिमा बीवी को तीन अक्तूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (भारत) की सदस्य बनाया गया था।  इसके अलावा, उन्होंने राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान तमिलनाडु विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में भी कार्य किया। 




 

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