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सेवानिवृत्त होने से एक दिन पहले केंद्र का तोहफा, जनरल बिपिन रावत देश के पहले सीडीएस नियुक्त

Tue, 31 Dec 2019 01:44 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 31 Dec 2019 01:44 AM IST
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First CDS of India, Army chief General Bipin Rawat Chief of Defence Staff
सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को देश का पहला सीडीएस बनाया गया है - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने एक दिन पूर्व सीडीएस के लिए उम्र सीमा को बढ़ा कर 65 वर्ष करने के बाद इस पद केलिए जनरल रावत के नाम पर मुहर लगाई। मंगलवार को सेना प्रमुख के पद से रिटायर होने से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने जनरल रावत को सीडीएस बनाने की घोषणा कर उन्हें नए साल का तोहफा दिया है। सीडीएस का पद सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से ऊपर फोर स्टार जनरल के समकक्ष होगा। 

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गौरतलब है कि वर्ष 1999 में करगिल युद्घ के बाद इस संबंध में गठित की गई करगिल सुरक्षा समिति ने सीडीएस की नियुक्ति का सुझाव दिया था। तब समिति ने कहा था कि देश की सुरक्षा केलिए चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने केलिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल-समन्वय स्थापित करना जरूरी है।
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इसके लिए सीडीएस की नियुक्ति की जाए। सीडीएस सेना के तीनों अंगों थल सेना, वायुसेना और नौसेना का एकीकृत सैन्य सलाहकार होगा। इसके दो दशक के बाद पीएम मोदी ने बीते स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक सैन्य सुधार की जरूरत बताते हुए सीडीएस की नियुक्ति की घोषणा की थी। तब एनएसए अजित डोभाल की अध्यक्षता में एक कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया था। इस कमेटी ने सीडीएस की नियुक्ति के तौर तरीकों, जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली तय किए थे।
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बीते हफ्ते 24 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में सीडीएस की नियुक्ति पर मुहर लगी थी।  इस दौरान इसके चार्टर और कर्तव्य को मंजूरी  दी गई थी। इसमें तय किया था कि इस पद को ग्रहण करने वाला व्यक्ति भविष्य में किसी प्रकार का सरकारी पद हासिल करने का पात्र नहीं होगा।

इससे पहले सीडीएस की नियुक्ति की रास्ता साफ करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने सेना के नियमों, 1954 के कार्यकाल और सेवा के नियमों में संशोधन किया था। शनिवार को जारी अधिसूचना में कहा गया था कि सीडीएस प्रमुख 65 साल की उम्र सीमा तक सेवा दे सकेंगे। अगर केंद्र सरकार जरूरी समझे तो सीडीएस को सेवा विस्तार दे सकती है।
 

क्या होगी सीडीएस की कार्यप्रणाली

  • सीडीएस के अंदर कोई मिलिट्री कमांड नहीं होगा।
  • सीडीएस रक्षा मंत्री के लिए सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाएगा।
  • सीडीएस का पद सेना के तीनों अंगों के ऊपर होगा।
  • सीडीएस डिफेंस ऐक्विजीशन काउंसिल ओर डिफेंस प्लानिंग काउंसिल का भी सदस्य होगा।
  • कार्यभार संभालने के तीन वर्ष के अंदर तीनों सेनाओं से जुड़े ऑपरेजशन, लॉजिस्टिक, ट्रांसपोर्ट, ट्रेनिंग, सहायता सेवा, मेंटनेंस, कम्यूनिकेशन में समन्वय बनाएगा।
  • सेना की आधारभूत संरचना का समुचित उपयोग सुनिश्चित करेगा।
  • सेना में स्वदेशी तकनीकी की हिस्सेदारी बढ़ाएगा।
  • बजट के अनुरूप सेनाओं के अंदर कैपिटल ऐक्विजीशन केप्रस्तावों की प्राथमिकता तय करेगा।
  • आधुनिकीकरण और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए तीनों अंगों में जरूरी सुधार करेगा।
  • सेना के तीनों अंगों से जुड़ा कोई भी सीडीएस बन सकता है।
  • सीडीएस पद से हटने के बाद सरकारी नौकरी नहीं कर पाएगा, प्राइवेट क्षेत्र में भी रिटायर होने के 5 साल बाद ही सेवा दे पाएगा। इसके लिए भी सरकार से पहले अनुमति लेनी होगी।

क्यों पड़ी सीडीएस की जरूरत

First CDS of India, Army chief General Bipin Rawat Chief of Defence Staff
सेनाध्यक्ष बिपिन रावत (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कारगिल युद्ध के दौरान वायुसेना और भारतीय सेना के बीच में तालमेल का अभाव साफ दिखाई दिया। वायुसेना के इस्तेमाल पर तत्कालीन वायुसेनाध्यक्ष और सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक की राय जुदा थी। भारतीय सामरिक रणनीतिकारों ने भी इस कमी को महसूस किया और सरकार से पुनः सीडीएस के गठन की सिफारिश की। यह पद सरकारी नेतृत्व के लिए सैन्य सलाहकार की भूमिका के तौर पर जरूरी है। हालांकि राजनीतिक पार्टियों और सैन्य बलों ने इसका विरोध किया है। कुछ लोगों को लगता है कि एक व्यक्ति के पास ज्यादा सैन्य शक्तियां होना संकेंद्रण समस्या को जन्म दे सकती है। 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ने इसके गठन की बात की थी।
 

साल 2012 में गठित नरेश चंद्र समिति ने बीच का रास्ता निकालते हुए चीफ ऑफ स्टाफ समिति (सीओएससी) के स्थायी अध्यक्ष की सिफारिश की थी। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत सीओएससी के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है मगर इसके परिणाम आशा के अनुसार नहीं रहे हैं। सेना में सुधार के लिए गठित डीबी शेतकर समिति ने दिसंबर 2016 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसमें 99 सिफारिशों सहित सीडीएस की नियुक्ति के मुद्दे को उठाया गया था।

अभी क्या है व्यवस्था

भारत सरकार ने तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठ जनरल को चीफ आफ आर्मी स्टाफ की मंजूरी दी है। तालमेल के बाबत ट्राई सर्विसेज कमान की व्यवस्था है। तीनों सेनाओं की संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस होती है और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट में तीनों सेनाओं के प्रमुख होते हैं। इसके अलावा तालमेल, संयुक्त आपरेशन को बढ़ावा देने के लिए अनेक उपाय किए गए है।

19 साल तक सीडीएस के गठन पर सरकार ने किया संकोच

तीनों सेनाओं ने लगातार सीडीएस के गठन की मांग की है। रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति ने भी कारगिल सीक्षा समिति की सिफारिश को मजबूती से उठाया, लेकिन केन्द्र सरकार सीडीएस के गठन से परहेज करती रही। करीब 19 साल तक यह सिफारिश ठंडे  बस्ते में पड़ी रही।

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