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Supreme Court: 'राजनेताओं को मोटी चमड़ी का होना चाहिए', बंगाल के राजनीतिक टिप्पणीकार की याचिका पर हुई सुनवाई

Tue, 30 Jan 2024 09:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 30 Jan 2024 09:32 PM IST
सार

Supreme Court: सर्वोच्च न्यायालय ने एक राजनीतिक टिप्पणीकार की गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि न्यायाधीशों को अपने खिलाफ की जा रही टिप्पणियों को नजरअंदाज करना चाहिए और राजनेताओं को भी मोटी चमड़ी का होना चाहिए।

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FIRs against political commentator: Politicians should be thick-skinned, says SC
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के राजनीतिक टिपपणीकार गर्ग चटर्जी की याचिका पर सुनवाई की। चटर्जी ने याचिका में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की है। गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने असमिया लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, राजनेताओं को मोटी चमड़ी वाला होना चाहिए। 

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न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने कहा, इन दिनों न्यायाधीशों को भी अपने खिलाफ अखबारों और साक्षात्कारों में की जाने वाली टिप्पणियों को नजरअंदाज करना चाहिए और राजनेताओं को मोटी चमड़ी का होना चाहिए। समाचार पत्रों और साक्षात्कारों में की जा रही टिप्पणियों से हम न्यायाधीशों को भी सतर्क  रहने की जरूरत है। अगर हम उन्हें सुनना शुरू कर देंगे तो हम अपना काम नहीं कर पाएंगे।

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गर्ग चटर्जी की ओर से वकील सिद्धार्थ अग्रवाल और आशुतोष दुबे पेश हुए। उन्होंने पीठ को बताया कि राजनीतिक टिप्पणीकार ने साल 2020 में ट्विटर (अब एक्स) पर कुछ टिप्पणियां कीं थीं। अग्रवाल ने कहा कि गर्ग के खिलाफ असम और पश्चिम बंगाल में कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जिन्हें एक साथ जोड़कर आगे की जांच के लिए किसी तटस्थ राज्य (असम और पश्चिम बंगाल से बाहर) में स्थानांतरिक किए जाने की जरूरत है। 

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असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने चटर्जी की गिरफ्तारी का आदेश दिया था। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने कहा, याचिकाकर्ता ने असम के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाली अपनी टिप्पणी के लिए 19 अगस्त, 2020 को सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। इसके बाद पीठ ने पूछा कि उन्हें जमानत दी गई है या नहीं। 

अग्रवाल ने बताया कि जमानत दे दी गई थी। उन्हें 9 सितंबर, 2022 को शीर्ष अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था। इसके बाद पीठ ने दलीलों को पूरा करने के लिए कहा। अदालत ने मामले की सुनवाई गैर विधिक दिन के लिए स्थगित कर दी।  

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