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तमिलनाडुः महामारी एक्ट के तहत 62 AIADMK विधायकों के खिलाफ FIR दर्ज, सरकार से विवि एकीकृत का फैसला वापस लेने की मांग
Tue, 31 Aug 2021 08:54 PM IST
प्रशांत कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: प्रशांत कुमार झा
Updated Tue, 31 Aug 2021 08:54 PM IST
सार
तमिलनाडु में महामारी एक्ट के तहत 62 AIADMK विधायकों पर केस दर्ज किया गया है। विधायकों पर आरोप है कि कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन किया गया है।
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एआईएडीएमके नेता
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
तमिलनाडु में महामारी एक्ट के तहत 62 एआईएडीएमके विधायकों पर केस दर्ज किया गया है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के विधायकों पर आरोप है कि कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन किया गया है। राज्य में मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके ने जयललिता के नाम वाले विवि का अन्नामलाई विवि में एकीकरण करने को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। एआईएडीएमके नेता ओ पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व में मंगलवार को चेन्नई में वालाजाह रोड पर कलैवनार अरंगम के बाहर सड़क जाम कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की थी और फैसला वापस लेने की मांग की। इस दौरान पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि, कुछ समय बाद पुलिस ने हिरासत में लिए गए नेताओं को छोड़ दिया था।
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दरअसल, विल्लुपुरम में एक विश्वविद्यालय को अन्नामलाई विश्वविद्यालय से जोड़ने के सरकार के फैसले के विरोध में पिछले हफ्ते विपक्ष ने विधानसभा का बहिष्कार किया था। विधानसभा अध्यक्ष अप्पावु ने विपक्षी विधायकों से अपील की थी कि उन्हें सत्र में अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा, लेकिन तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी ने तमिलनाडु विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक 2021 को पेश कर दिया, जिसके बाद अन्नाद्रमुक और भाजपा ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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जयललिता के नाम पर विवि का नाम रखने की मांग
अन्नामलाई विश्वविद्यालय के साथ दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के नाम वाले विवि को जोड़ने के लिए विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक ने द्रमुक सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। ओ पन्नीरसेल्वम ने कहा जयललिता ने मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में "क्रांति" लाई थी और उनके प्रयासों को मान्यता देते हुए पिछली अन्नाद्रमुक सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखने का फैसला किया था। राज्यपाल की मंजूरी के बाद कुलपति भी नियुक्त किया गया था, लेकिन द्रमुक सरकार इसे खत्म करना चाहती है। सरकार के इस फैसला का हम विरोध करेंगे।
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