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फाइनेंस कंपनी फंसी: मोबाइल ऐप से देती है पर्सनल लोन, मोटी प्रोसेसिंग फीस वसूली में घिरी, पहले ही साल 10 हजार करोड़ का कारोबार

Wed, 17 Nov 2021 06:46 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 17 Nov 2021 06:46 PM IST
सार

पर्सनल लोन के नाम पर लोगों से मोटी प्रोसेसिंग फीस लेने वाली और हेराफेरी कर चंद महीनों में करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाली एक फाइनेंस कंपनी आयकर के घेरे में आ गई है। 
 

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Finance company stuck: gives personal loan through mobile app, involved in recovery of very high processing fee, business of 10 thousand crores in first year
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

आयकर विभाग ने एक फिनटेक कंपनी पर शिकंजा कस दिया है। यह कंपनी मोबाइल ऐप के माध्यम से तत्काल कम अवधि का पर्सनल लोन देती है। नौ नवंबर को विभाग ने कंपनी के दिल्ली व गुरुग्राम स्थित बिजनेस व आवासीय परिसरों पर छापे मारे थे। इसमें कई धांधलियां उजागर हुई हैं। 

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड 'सीबीडीटी' ने बुधवार को बताया कि जांच के दौरान पता चला है कंपनी लोन वितरित करते वक्त बहुत ज्यादा मात्रा में प्रोसेसिंग फीस वसूल रही है। इस कारण कर्जदार पर बहुत बोझ पड़ रहा है। आयकर की नियामक संस्था सीबीडीटी ने कहा कि इस कंपनी का स्वामित्व कैमेन आइलैंड में स्थित एक समूह के पास है और इसका नियंत्रण एक पड़ोसी देश का व्यक्ति करता है। 
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सीबीडीटी का कहना है कि इस फिनटेक कंपनी ने भारत में बहुत मामूली विदेश प्रत्यक्ष निवेश 'एफडीआई' किया और उसके दम पर यहां की बैंकों से भारी मात्रा में कामकाजी लोन ले लिया। इस पर्सनल लोन के रूप में वितरित कर कंपनी ने पहले ही साल में 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया।
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500 करोड़ रुपये विदेश भेजे
कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल को ऐसा बनाया कि उसके जरिए उसने तेजी से पूंजी का खेल खेला। इस कारण उसने पहले ही साल में 10 हजार करोड़ रुपये का भारी भरकम कामकाज कर डाला। इतना ही नहीं उसने विदेश स्थित अपने समूह को 500 करोड़ रुपये भी भेजे। यह पैसा ग्रुप की सेवाएं लेने के नाम पर भेजा गया है। 


जांच में पाया गया है कि सेवाओं की खरीदी के नाम पर जो पैसा विदेश भेजा गया है, वह काफी ज्यादा है और यह खरीदी बहुत ज्यादा दामों पर दर्शाई गई है। जांच के दौरान कंपनी के विदेशी कर्ताधर्ता समेत सभी प्रमुख पदाधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। आगे जांच जारी है। मामले में जल्द सख्त कार्रवाई की जा सकती है। 

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