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मध्य प्रदेश और पंजाब के बीच बासमती चावल को लेकर बहस, जी आई टैग की मांग तेज

Mon, 10 Aug 2020 11:53 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 10 Aug 2020 11:53 AM IST
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Fight between Madhya Pradesh and Punjab over GI of Basmati rice pakistan may take benefit
kashmiri basmati rice - फोटो : सोशल मीडिया

देश में बासमती चावल को लेकर एक बहस सी छिड़ गई है। मध्यप्रदेश में उगाए गए बासमती चावल के लिए जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग की मांग ने बीजेपी शासित प्रदेश मध्य प्रदेश और कांग्रेस शासित प्रदेश पंजाब में एक बहस छेड़ दी है। मध्य प्रदेश में इसके भौगोलितक संकेत की मांग तेज हो गई है और पेजबा इसका विरोध कर रहा है। आइए जानते हैं कि बासमती चावल को लेकर दोनों राज्यों में क्या विवाद चल रहा है...

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बासमती चावल का धारक
मौजूदा समय में बासमती चावल के लिए भौगोलित संकेत का स्वामित्व वाणिज्यित मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि और प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट डेवलेपमेंट अथॉरिटी के तहत आता है। भौगोलिक संकेत बताता है कि बासमती चावल इंडो-गंगा के मैदानों में विशेष रूप से उगाए गए लंबे अनाज चावल के रूप में पाया जाता है।
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इसमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से आते हैं। भारत के अलावा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बासमती चावल उगााया जाता है और यहां भी बासमती चावल के भौगोलिक संकेत को लेकर अधिकार दिए जाते हैं।
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बासमती चावल का दावेदार
भारत को बासमती चावल का भौगोलिक संकेत लेने के लिए सात साल का समय लगा। भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और एक्सपोर्टर है, वैश्विक बासमती व्यापार के 85 फीसदी हिस्से पर भारत का कब्जा है। बासमती चावलों के लिए मध्य प्रदेश की लड़ाई कोई नई नहीं है। 

साल 2016 में जब बासमती चावल के लिए भौगोलिक संकेत दिया गया है, तो मध्य प्रदेश ने अपनी चावल की किस्म को शामिल करने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

बासमती चावल को लेकर जोखिम

बासमती चावल के भौगोलिक संकेत को लेकर टैग पाने की मध्य प्रदेश की मांग से चीन समेत कई देश इस दावे के लिए आगे आ जाएंगे और दुनिया में भारत के अलावा चीन भी चावल का सबसे बड़ा उत्पादक है। एपीईडीए के मुताबिक बासमती चावल को उगाने के पीछे 200 सालों का इतिहास है।

क्या रास्ता बचा है?
हालांकि पंजाब का कहना है कि जीआई टैग पंजीकरण के किसी भी राज्य के कमजोर पड़ने से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाभ ले सकता है, लेकिन मध्य प्रदेश का कहना है कि इसका दावा भारत के जीआई अधिनियम के तहत है और अंतर-देश के दावों से जुड़ा नहीं है।

आखिरकार पश्चिम बंगाल और ओडिशा रसगुल्ला के लिए जीआई टैग को लेकर 'युद्ध' पर चले गए, लेकिन बाद में इस मामले को सुलझा लिया गया था क्योंकि 2019 में ओडिशा रसोगोला के रूप में जीआई टैग मिल गया था। इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत एक लाख करोड़ रुपये की योजना लॉन्च की है। 

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान योजना के तहत छठीं किस्त के लिए 17,000 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

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