{"_id":"68308d046354a883f10567c2","slug":"female-employees-are-entitled-to-maternity-leave-for-the-third-child-as-well-supreme-court-2025-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: तीसरे बच्चे के लिए भी महिला कर्मचारी मातृत्व अवकाश की हकदार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: तीसरे बच्चे के लिए भी महिला कर्मचारी मातृत्व अवकाश की हकदार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Fri, 23 May 2025 08:28 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 May 2025 08:28 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मातृत्व लाभ महिला के प्रजनन अधिकारों का हिस्सा हैं और मातृत्व अवकाश सभी बच्चों के लिए मिलेगा, इसलिए दो बच्चों तक सीमित करने वाली नीति गलत है। इस फैसले का असर सभी सरकारी और निजी संस्थानों में मातृत्व अवकाश की नीति पर देखने को मिल सकता है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने नीतिगत रूप से प्रभाव छोड़ने वाले अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मातृत्व लाभ महिला के प्रजनन अधिकारों का हिस्सा हैं और मातृत्व अवकाश उन लाभों का अभिन्न अंग है। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें एक सरकारी शिक्षिका को यह कहते हुए तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश देने से इनकार कर दिया गया था कि राज्य की नीति के अनुसार मातृत्व अवकाश लाभ दो बच्चों तक सीमित है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देशव्यापी असर होगा। देश के अधिकांश राज्यों में सरकारी या निजी कार्यालयों में वेतन के साथ मातृत्व अवकाश की सुविधा सिर्फ दो बच्चों तक सीमित है। तीसरे बच्चे के जन्म के समय सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं समाप्त हो जाती हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नीतिगत बदलाव की राह खुल सकती है।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हमने प्रजनन अधिकारों की अवधारणा पर गहन विचार किया और माना कि मातृत्व लाभ प्रजनन अधिकारों का हिस्सा हैं और मातृत्व अवकाश मातृत्व लाभों का अभिन्न अंग है। इसलिए, हाईकोर्ट के विवादित आदेश को खारिज किया जाता है। हाईकोर्ट के निर्णय में कहा गया था कि मातृत्व अवकाश मौलिक अधिकार न होकर एक वैधानिक अधिकार या सेवा शर्तों से प्राप्त होने वाला अधिकार है।
विज्ञापन
एकल जज ने महिला के हक में दिया था फैसला
उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने महिला की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5 में प्रसव की संख्या पर कोई सीमा नहीं रखी गई है, इसलिए मातृत्व लाभ का दावा किया जा सकता है। राज्य सरकार ने इस निर्णय को अपील में चुनौती दी। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता राज्य के दो बच्चों के मानदंड के मद्देनजर तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की हकदार नहीं है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देशव्यापी असर होगा। देश के अधिकांश राज्यों में सरकारी या निजी कार्यालयों में वेतन के साथ मातृत्व अवकाश की सुविधा सिर्फ दो बच्चों तक सीमित है। तीसरे बच्चे के जन्म के समय सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं समाप्त हो जाती हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नीतिगत बदलाव की राह खुल सकती है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हमने प्रजनन अधिकारों की अवधारणा पर गहन विचार किया और माना कि मातृत्व लाभ प्रजनन अधिकारों का हिस्सा हैं और मातृत्व अवकाश मातृत्व लाभों का अभिन्न अंग है। इसलिए, हाईकोर्ट के विवादित आदेश को खारिज किया जाता है। हाईकोर्ट के निर्णय में कहा गया था कि मातृत्व अवकाश मौलिक अधिकार न होकर एक वैधानिक अधिकार या सेवा शर्तों से प्राप्त होने वाला अधिकार है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 27 बार जमानत याचिका टालने पर हाई कोर्ट पर नाराज हुआ सुप्रीम कोर्ट, आरोपी को दी राहत
इस मामले में महिला सरकारी कर्मचारी ने राज्य सरकार की ओर से मातृत्व अवकाश के लिए अपने अनुरोध को खारिज किए जाने के बाद मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उसकी पहली शादी से दो बच्चे थे और तलाक के बाद दोनों अपने पिता की कस्टडी में थे। 2018 में पुनर्विवाह करने के बाद, उसने अपने तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश मांगा, जो सेवा में शामिल होने के बाद पैदा हुआ पहला बच्चा था।एकल जज ने महिला के हक में दिया था फैसला
उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने महिला की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5 में प्रसव की संख्या पर कोई सीमा नहीं रखी गई है, इसलिए मातृत्व लाभ का दावा किया जा सकता है। राज्य सरकार ने इस निर्णय को अपील में चुनौती दी। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता राज्य के दो बच्चों के मानदंड के मद्देनजर तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की हकदार नहीं है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन