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सरकारी सुविधाओं को अपनी जागीर समझना इस्लाम में हराम, फतवा जारी
Wed, 27 Mar 2019 07:46 PM IST
तिवारी अभिषेक
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तिवारी अभिषेक
Updated Wed, 27 Mar 2019 07:46 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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तंजीम अवाम-ए-अहले सुन्नत के सदर मोहब्बे अली नईमी के सवाल पर जनपद मऊ के घोसी कस्बा स्थित जामिया अमजदिया दारूल इफ्ता के मुफ्ती आले मुस्तफा मिसवाही ने महत्वपूर्ण फतवा जारी किया है।
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फतवे में कहा है कि सरकार से मुसलमानों को सहूलियतों के नाम पर मिली सुविधाओं, जमीनों और रुपयों को अपनी निजी संपत्ति और विरासत समझना मंत्री हो या आम आदमी सबके लिए हराम है।
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तंजीम के सदर ने जामिया अमजदिया से यह फतवा मांगा था कि प्रदेश सरकार ने एक कद्दावर मंत्री को सरकारी जमीन, भवन और रुपया यह कहते हुए दिया था कि मुसलमानों को उनकी आबादी के मुताबिक सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए। लेकिन इसका फायदा मुसलमानों को नहीं मिल पा रहा है।
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पढ़ें- मुस्लिम महिला के खिलाफ फतवा, बचाव में आए रामदेव, बोले- योग को धर्म के साथ न जोड़ें
मुसलमानों की तरक्की के लिए प्रदेश सरकार ने सब सुविधाएं दीं, लेकिन उक्त मंत्री ने हुकूमत की सुविधाओं को अपनी संपत्ति और औलाद की विरासत समझ लिया है। इसका जवाब देते हुए जामिया अमजदिया दारूल इफ्ता के मुफ्ती आले मुस्तफा मिसबाही ने कहा है कि सरकार ने जो जमीन और सुविधा मुसलमानों की शिक्षा और विकास के लिए दी हैं। ऐसे वजीर (मंत्री) पर लाजिम है कि उसका इस्तेमाल मुसलमानों की तालीम और तरक्की के लिए ही करें।
मुसलमानों की तालीम और तरक्की से हटकर अपनी निजी संपत्ति और अपनी औलाद की विरासत बनाना चाहे तो वजीर हो या कोई और सबके लिए हराम है। यह खयानत और लूटे हुए माल की तरह है। ऐसा शख्स सख्त गुनहगार और अल्लाह की नाराजगी का हकदार है। ऐसे बंदे लोगों का हक मारने के दोषी है।
ऐसे वजीर और उसकी औलाद आम मुसलमान की तरह ही फायदा उठाने के हकदार हैं। अगर यह शख्स मिली हुई रकम को मुसलमानों के हित में खर्च नहीं करता है तो वहां के मुसलमानों पर लाजिम है कि कानूनी कार्रवाई करें। मुसलमानों के मफाद में खर्च होने तक तुकदौर जारी रखें और यह शख्स फिर भी बाज नहीं आता है तो सामाजिक बहिष्कार करें।
फतवे को देशभर के नामचीन मुफ्तिया इकराम ने किया तस्दीक
प्रतीकात्मक तस्वीर
तंजीम अवाम-ए-अहले सुन्नत के सदर मोहब्बे अली नईमी रामपुरी के सवाल पर जनपद मऊ के घोसी कस्बा स्थित जामिया अमजदिया दारूल इफ्ता के मुफ्ती आले मुस्तफा मिसबाही द्वारा जारी इस फतवे की तस्दीक देश के जाने माने मुफ्तियों ने की है।
इसमें प्रमुख रूप से बरेली, बदायूं, मुरादाबाद, संभल, इलाहाबाद, बस्ती, गोरखपुर, नागपुर (महाराष्ट्र), धामनगर (उड़ीसा), हुबली (कर्नाटक), जोधपुर (राजस्थान) आदि के हैं।
फतवे में बयान होता है आम हुक्म: मौलाना नईमी
तंजीम अवाम-ए-अहले सुन्नत के सदर मोहब्बे अली नईमी रामपुरी ने कहा है कि मैने यह फतवा प्रदेश की पूर्व सरकार के मंत्री मोहम्मद आजम खां के खिलाफ मांगा था। उन्होंने सपा सरकार से मुसलमानों के लिए सुविधाओं के नाम पर बहुत कुछ लिया और उसका फायदा मुसलमानों को नहीं मिला है।
सरकार से मिली सुविधाएं उन्होंने अपनी जाती मिल्कियत समझ ली हैं। फतवे में आम हुक्म बयान होता है, किसी को व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाकर जारी नहीं किया जाता ।
इसमें प्रमुख रूप से बरेली, बदायूं, मुरादाबाद, संभल, इलाहाबाद, बस्ती, गोरखपुर, नागपुर (महाराष्ट्र), धामनगर (उड़ीसा), हुबली (कर्नाटक), जोधपुर (राजस्थान) आदि के हैं।
फतवे में बयान होता है आम हुक्म: मौलाना नईमी
तंजीम अवाम-ए-अहले सुन्नत के सदर मोहब्बे अली नईमी रामपुरी ने कहा है कि मैने यह फतवा प्रदेश की पूर्व सरकार के मंत्री मोहम्मद आजम खां के खिलाफ मांगा था। उन्होंने सपा सरकार से मुसलमानों के लिए सुविधाओं के नाम पर बहुत कुछ लिया और उसका फायदा मुसलमानों को नहीं मिला है।
सरकार से मिली सुविधाएं उन्होंने अपनी जाती मिल्कियत समझ ली हैं। फतवे में आम हुक्म बयान होता है, किसी को व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाकर जारी नहीं किया जाता ।