फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   father starts begging to take his daughters body back home in lakhimpur kheri

'बेटी का शव ले जाने के लिए पिता ने मांगी भीख'

Sat, 10 Sep 2016 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
ब्यूरो/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी Updated Sat, 10 Sep 2016 09:13 AM IST
विज्ञापन
father starts begging to take his daughters body back home in lakhimpur kheri
- फोटो : amarujala

उड़ीसा के दाना माझी की तरह मितौली के रमेश को अपनी बेटी का शव कंधे पर तो नहीं ढोना पड़ा लेकिन भीख मांगने के लिए चादर जरूर फैलानी पड़ी। बेटी का शव पर विलाप कर रहे रमेश ने पास में ही अपनी चादर फैला दी और लोग उस पर रुपये-पैसे डालने लगे। डबडबाई आंखों से वह राहगीरों की तरफ देखता पर बोलता कुछ नहीं।

विज्ञापन


लोग बेटी के शव के साथ पिता का करुण रुदन देखकर ठहरते। चादर पर कुछ रुपये-पैसे डालते और आगे बढ़ जाते। कुछ का दिल पिघला को उन्होंने मदद को हाथ बढ़ाया। किसी ने गरीबी के इस सितम की तस्वीर खींच ली और सोशल मीडिया पर डाल दी। बेटी की लाश के सामने राहगीरों से भीख मांगते पिता की फोटो सामने आते ही शुक्रवार को प्रशासन में हड़कंप मच गया।
विज्ञापन


प्रभारी डीएम अमित सिंह बंसल ने आनन-फानन में मामले की जांच कराई, तो फोटो में दिखी कहानी सही निकली। मितौली क्षेत्र के गांव सुआताली के रमेश कुमार की 14 साल की बेटी अंजली एक सप्ताह से तेज बुखार से तप रही थी। पहले गांव में ही झोलाछाप को दिखाया पर कोई फायदा नहीं हुआ तो वह ठिलिया पर लेटाकर अंजली को गुरुवार सुबह 8.45 बजे सीएचसी ले गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंधी पत्नी, दो छोटी बेटियों और अंजली की बीमारी से जैसे-तैसे जूझता वह उसे इलाज के लिए अस्पताल तो ले आया मगर यहां डॉ. अक्षयवर नाथ चौहान ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद 9.35 बजे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

लोगों ने की मदद तो घर पहुंचा बेटी का शव

father starts begging to take his daughters body back home in lakhimpur kheri

रमेश को यहां ये सरकारी एंबुलेंस तो जरूर मिल गई पर बेटी की सांस बीच रास्ते में ही उखड़ गई। वह जिला अस्पताल पहुंचा तो ईएमओ डॉ. राजकुमार ने किशोरी को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने पोस्टमार्टम के लिए शव को मोर्चरी में रखवाने की बात कही तो रमेश ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।

गरीब रमेश के पास बेटी का शव 35 किलोमीटर दूर मितौली ले जाने के लिए पैसे नहीं थे। लाचारी और निराशा से भरा रमेश बेटी के शव के साथ अस्पताल के बाहर सड़क किनारे चादर फैलाकर इस आस में बैठ गया कि कोई तो मदद करेगा। लोगों ने मदद भी की। कुछ लोगों ने पैसे जमाकर निजी वाहन से उसकी बेटी का शव गांव भिजवाया।

"डॉक्टर ने शव उसके पिता को सौंप दिया था, जिसके बाद उसने किसी से शव घर ले जाने के लिए मदद नहीं मांगी थी। पीड़ित पिता के घर एसडीएम को भेजकर जांच कराई गई, जहां उसने भी अस्पताल के किसी अधिकारी से मदद न मांगने की बात कही है। भीख मांगने की सूचना भी समय पर नहीं मिल सकी, जिससे उसकी मदद नहीं की जा सकी।" -अमित सिंह बंसल, प्रभारी डीएम/सीडीओ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed