फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Fast Track Special Court: More than two lakh cases pending, claims ICPF research paper

फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालत: दो लाख से अधिक मामले लंबित, आईसीपीएफ के शोध पत्र में दावा; यहां पढ़ें...

Sat, 09 Dec 2023 07:15 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Sat, 09 Dec 2023 07:15 PM IST
सार

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से जारी शोध पत्र में कहा गया कि फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें में 31 जनवरी तक देश में दो लाख से अधिक मामले लंबित है। पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
Fast Track Special Court: More than two lakh cases pending, claims ICPF research paper
court demo - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से जारी शोध पत्र में कहा गया कि फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों में 31 जनवरी तक देश में दो लाख से अधिक मामले लंबित है। साथ ही दावा किया गया कि इन मामलों के निपटारे में लगभग नौ वर्ष से अधिक समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में 25 से ज्यादा वर्ष तक का समय लग सकता है। दावा किया गया कि 2022 में पॉक्सो के सिर्फ तीन फीसदी मामलों में सजा सुनाई गई है। 
विज्ञापन


आईसीपीएफ की ओर से जारी शोध पत्र में कहा गया कि मौजूदा हालात के मद्देनजर जनवरी, 2023 तक के पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में अरुणाचल प्रदेश को 30 वर्ष लग जाएंगे, जबकि दिल्ली को 27, पश्चिम बंगाल को 25, मेघालय को 21, बिहार को 26 और उत्तर प्रदेश को 22 वर्ष लगेंगे।
विज्ञापन

 
विशेष अदालतें लक्ष्य को हासिल करने में विफल 
शोध पत्र के मुताबिक, प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालत ने साल भर में औसतन सिर्फ 28 मामलों का निपटारा किया। प्रत्येक विशेष अदालत से हर तिमाही 41-42 और साल में कम से कम 165 मामलों के निपटारे की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन आंकड़ों से लगता है कि गठन के तीन साल बाद भी ये विशेष अदालतें अपने तय लक्ष्य को हासिल करने में विफल रही हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बाल विवाह बच्चों के साथ एक तरह का दुष्कर्म 
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए शोधपत्र के अनुसार, बाल विवाह बच्चों के साथ एक तरह का दुष्कर्म है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजाना 4,442 नाबालिग लड़कियों को शादी के बंधन में बांध दिया जाता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि देश में बाल विवाह के रोजाना सिर्फ तीन मामले दर्ज होते हैं।  


बता दें फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों की स्थापना 2019 में की गई थी। भारत सरकार ने हाल ही में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में इसे 2026 तक जारी रखने के लिए 1900 करोड़ रुपए की बजटीय राशि के आंवटन को मंजूरी दी है। अदालतों में आए कुल 2,68,038 मुकदमों में से महज 8,909 मुकदमों में ही अपराधियों को सजा सुनाई जा सकी है।   
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed