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किसानों का अल्टीमेटम, सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों कृषि कानून रद्द करे
Thu, 03 Dec 2020 02:16 AM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 03 Dec 2020 02:16 AM IST
सार
- चौथे दौर की वार्ता से पहले किसान नेताओं ने सिंघु बार्डर पर की मैराथन बैठक
- पांच को होगा देशव्यापी प्रदर्शन, सात को पुरस्कार और सम्मान लौटाएंगी हस्तियां
- सरकार भी पूरी तैयारी में, गृहमंत्री शाह ने किया तोमर और गोयल के साथ मंथन
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सीमा पर डटे रहे किसान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सात दिन से दिल्ली सीमा पर बैठे किसानों ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। सरकार से वार्ता से एक दिन पहले किसान संगठनों ने तीनों कानून रद्द करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को कहा। किसानों ने चेतावनी कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं तो वे दिल्ली आने वाले बाकी रास्ते भी जाम कर देेंगे। किसानों ने कहा, पांच दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन होगा और सोमवार को खिलाड़ी पुरस्कार व सम्मान लौटाएंगे। दूसरी ओर, बुधवार को कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व वाणिज्य तथा रेलमंत्री पीयूष गोयल ने गृहमंत्री अमित शाह को तीसरे दौर की वार्ता की जानकारी दी। साथ ही बृहस्पतिवार को होने वाली चौथे दौर की बातचीत पर लंबा मंथन हुआ।
सिंघु बार्डर पर किसान संगठनों की मैराथन बैठक में आंदोलन की प्रगति, सरकार के रवैये और चौथे दौर की बैठक पर रणनीति बनी। किसान संगठनों ने कहा, सरकार आंदोलन बांटने की कोशिश कर रही है। संगठनों ने स्पष्ट किया, आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में होगा। उन्होंने कहा, किसानों ने 10 पेज की आपत्तियां बनाई हैं। इसमें प्रमुख तीनों कानूनों को रद्द करना है। सरकार बातचीत करना चाहती है तो लगातार करे। इस दौरान दिल्ली की सीमा पर आंदोलन जारी रहेगा। पांच दिसंबर को किसान केंद्र सरकार और कॉरपोरेट्स हाउस का पुतला जलाएंगे। सात दिसंबर को को खिलाड़ी व दूसरे पुरस्कार विजेता केंद्र को अवार्ड लौटाएंगे। सैनिकों ने भी अवार्ड वापसी करने का फैसला किया है। इस बैठक में 32 किसान संगठनों के नेता शामिल हुए। इनमें भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत भी थे।
सरकार के लिए खतरे की घंटी : चढूनी
खिलाड़ियों और जवानों को सलाम। सरकार इसे खतरे की घंटी समझे। अगर हमारी मांगें नहीं मानीं तो हम और कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। - गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, हरियाणा भारतीय किसान यूनियन
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सरकार एमएसपी को नहीं बनाएगी कानून का हिस्सा
केंद्र सरकार ने साफ किया कि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि किसानों को मंडियों का अस्तित्व और एमएसपी जारी रखने का ठोस आश्वासन दिया जाएगा। शाह के आवास पर तोमर और गोयल के साथ हुई बैठक में किसानों को मनाने के लिए प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद तोमर ने एमएसपी और मंडियों पर नया प्रस्ताव देने का संकेत दिया।
एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक आंदोलन का बड़ा कारण एमएसपी और मंडियों पर भ्रम है। सरकार और किसान संगठनों के बीच गतिरोध की सबसे बड़ा कारण यही है। इस पर मंथन हो रहा है कि आखिर एमएसपी को कानून में शामिल किए बिना जारी रखने का भरोसा कैसे दें। किसानों की आपत्तियों का भी अध्ययन हो रहा है। तोमर ने कहा, यूपीए सरकार की तुलना में मोदी सरकार में एमएसपी के तहत दोगुना ज्यादा खरीद हुई। सरकार मंडी के अतिरिक्त फसल बेचने का विकल्प देना चाहती है। इससे ही किसानों की आय में दोगुनी बढ़ोत्तरी होगी
एमएसपी कानून का हिस्सा कभी नहीं था : तोमर
किसानों की राय जानने के बाद सरकार अपना विकल्प देगी। एमएसपी को कानून का हिस्सा नहीं बनाएंगे। पहले भी नहीं था। बिना कानून के भी एमएसपी सुनिश्चित हो सकती है। किसानों की आशंका दूर करेंगे। उम्मीद है कि विवाद जल्द सुलझेगा। - नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषिमंत्री
आंदोलन गलतफहमी के कारण : नीति आयोग
कानूनों का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है। आंदोलन गलतफहमी और किसानों तक सही जानकारी न पहुंचने के कारण हो रहा है। इन्हें दूर करने की जरूरत है। - राजीव कुमार, उपाध्यक्ष नीति आयोग
अब ट्रकों के हड़ताल की धमकी
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सिंघु बार्डर पर किसान संगठनों की मैराथन बैठक में आंदोलन की प्रगति, सरकार के रवैये और चौथे दौर की बैठक पर रणनीति बनी। किसान संगठनों ने कहा, सरकार आंदोलन बांटने की कोशिश कर रही है। संगठनों ने स्पष्ट किया, आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में होगा। उन्होंने कहा, किसानों ने 10 पेज की आपत्तियां बनाई हैं। इसमें प्रमुख तीनों कानूनों को रद्द करना है। सरकार बातचीत करना चाहती है तो लगातार करे। इस दौरान दिल्ली की सीमा पर आंदोलन जारी रहेगा। पांच दिसंबर को किसान केंद्र सरकार और कॉरपोरेट्स हाउस का पुतला जलाएंगे। सात दिसंबर को को खिलाड़ी व दूसरे पुरस्कार विजेता केंद्र को अवार्ड लौटाएंगे। सैनिकों ने भी अवार्ड वापसी करने का फैसला किया है। इस बैठक में 32 किसान संगठनों के नेता शामिल हुए। इनमें भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत भी थे।
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सरकार के लिए खतरे की घंटी : चढूनी
खिलाड़ियों और जवानों को सलाम। सरकार इसे खतरे की घंटी समझे। अगर हमारी मांगें नहीं मानीं तो हम और कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। - गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, हरियाणा भारतीय किसान यूनियन
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सरकार एमएसपी को नहीं बनाएगी कानून का हिस्सा
केंद्र सरकार ने साफ किया कि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि किसानों को मंडियों का अस्तित्व और एमएसपी जारी रखने का ठोस आश्वासन दिया जाएगा। शाह के आवास पर तोमर और गोयल के साथ हुई बैठक में किसानों को मनाने के लिए प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद तोमर ने एमएसपी और मंडियों पर नया प्रस्ताव देने का संकेत दिया।
एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक आंदोलन का बड़ा कारण एमएसपी और मंडियों पर भ्रम है। सरकार और किसान संगठनों के बीच गतिरोध की सबसे बड़ा कारण यही है। इस पर मंथन हो रहा है कि आखिर एमएसपी को कानून में शामिल किए बिना जारी रखने का भरोसा कैसे दें। किसानों की आपत्तियों का भी अध्ययन हो रहा है। तोमर ने कहा, यूपीए सरकार की तुलना में मोदी सरकार में एमएसपी के तहत दोगुना ज्यादा खरीद हुई। सरकार मंडी के अतिरिक्त फसल बेचने का विकल्प देना चाहती है। इससे ही किसानों की आय में दोगुनी बढ़ोत्तरी होगी
एमएसपी कानून का हिस्सा कभी नहीं था : तोमर
किसानों की राय जानने के बाद सरकार अपना विकल्प देगी। एमएसपी को कानून का हिस्सा नहीं बनाएंगे। पहले भी नहीं था। बिना कानून के भी एमएसपी सुनिश्चित हो सकती है। किसानों की आशंका दूर करेंगे। उम्मीद है कि विवाद जल्द सुलझेगा। - नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषिमंत्री
आंदोलन गलतफहमी के कारण : नीति आयोग
कानूनों का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है। आंदोलन गलतफहमी और किसानों तक सही जानकारी न पहुंचने के कारण हो रहा है। इन्हें दूर करने की जरूरत है। - राजीव कुमार, उपाध्यक्ष नीति आयोग
अब ट्रकों के हड़ताल की धमकी
- ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने किसानों की मांगे पूरी न होने पर 8 दिसंबर को ट्रकों के हड़ताल की धमकी दी।
- चंडीगढ़ में हरियाणा के सीएम मनोहरलाल खट्टर के घर का घेराव करने वाले युवा कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में।
- संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने कहा, किसानों की आशंका दूर करे सरकार। कानून में सुधार की गुंजाइश है।
किसानों का कृषिमंत्री को पत्र- हमारी एकता में फूट डालने का एजेंडा चला रही सरकार
किसान संगठनों ने सरकार पर आंदोलन में फूट डालने का आरोप लगाया है। बुधवार को किसान संगठनों की बैठक के बाद केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भेजे पत्र में किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार हमारी एकता में फूट डालने का एजेंडा चला रही है।
चौथे चरण की वार्ता से ठीक एक दिन पहले लिखे पत्र में किसानों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों कानून रद्द करने की मांग की है। इसमें लिखा है कि आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति की अगुवाई में हो रहा है। किसानों की ओर से बातचीत में समिति द्वारा तय प्रतिनिधि ही शामिल होंगे, इसे सरकार नहीं तय कर सकती है। इसके साथ ही कहा गया है कि सरकार को जो भी बात करनी है वह समिति के प्रतिनिधियों से होगी। इससे इतर समानंतर बातचीत नहीं की जानी चाहिए। किसानों ने कहा है कि हमने सरकार की ?समिति बनाने का प्रस्ताव इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि पहले भी ऐसे प्रयास हुए जो असफल रहे थे। सरकार इसे टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहती है।
चौथे चरण की वार्ता से ठीक एक दिन पहले लिखे पत्र में किसानों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों कानून रद्द करने की मांग की है। इसमें लिखा है कि आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति की अगुवाई में हो रहा है। किसानों की ओर से बातचीत में समिति द्वारा तय प्रतिनिधि ही शामिल होंगे, इसे सरकार नहीं तय कर सकती है। इसके साथ ही कहा गया है कि सरकार को जो भी बात करनी है वह समिति के प्रतिनिधियों से होगी। इससे इतर समानंतर बातचीत नहीं की जानी चाहिए। किसानों ने कहा है कि हमने सरकार की ?समिति बनाने का प्रस्ताव इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि पहले भी ऐसे प्रयास हुए जो असफल रहे थे। सरकार इसे टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहती है।