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Farmers Protest: दिल्ली कूच के तीन दिन बाद यह है किसानों का सबसे बड़ा प्लान, बीस करोड़ किसान लेंगे हिस्सा!

Tue, 13 Feb 2024 02:47 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 13 Feb 2024 02:47 PM IST
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सार
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और केरल से पूर्व विधायक टी कृष्णप्रसाद कहते हैं कि उनकी तैयारी में इस बार सिर्फ किसान मोर्चा ही नहीं, बल्कि तमाम अन्य संगठनों के लोग मिलकर पूरे देश में 'गांव बंदी' की तैयारी में जुटे हैं। किसान आंदोलन में पहली बार पूरे देश के अलग-अलग राज्यों के गांवों में बंदी के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन करने का यह पहला मौका होगा...
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Farmers Protest: Three days after the Delhi chalo, twenty crore farmers will organise gaon bandi
Farmers Protest - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ रहे पंजाब के किसानों का काफिला अभी दिल्ली बॉर्डर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन उसकी तपिश का असर समूची दिल्ली पर दिखना शुरू हो गया है। किसानों के इस दिल्ली कूच के ठीक 3 दिन बाद देश में एक और बहुत बड़ा किसानों का आंदोलन होने जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में 16 फरवरी को होने वाले इस प्रदर्शन में देश के सभी गांव में आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान पूरे देश के अलग-अलग राज्यों के हिस्सों में तकरीबन 20 करोड़ से ज्यादा किसान और स्थानीय निवासियों की भागीदारी का दावा किया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक सिर्फ एक दिन की इस हड़ताल में अगर सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसको आगे भी बढ़ाए जाने की पूरी तैयारियां की जाएगी।

देश में किसानों का आंदोलन एक बार फिर से आगे बढ़ने लगा है। संयुक्त किसान मोर्चा 16 फरवरी को पूरे देश में गांव बंदी की बड़ी तैयारी करने में जुटा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और केरल से पूर्व विधायक टी कृष्णप्रसाद कहते हैं कि उनकी तैयारी में इस बार सिर्फ किसान मोर्चा ही नहीं, बल्कि तमाम अन्य संगठनों के लोग मिलकर पूरे देश में 'गांव बंदी' की तैयारी में जुटे हैं। किसान आंदोलन में पहली बार पूरे देश के अलग-अलग राज्यों के गांवों में बंदी के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन करने का यह पहला मौका होगा। कृष्ण प्रसाद कहते हैं कि सिर्फ उनके संगठन के ही तकरीबन दो करोड़ सदस्य इस आंदोलन में शिरकत कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों के मुताबिक देश के अलग-अलग संगठनों और इंडस्ट्रियल स्टेट से संबद्ध सभी कर्मचारी संगठन के कर्मचारी भी उनके इस आंदोलन में हिस्सेदारी करने जा रहे हैं। संगठनों से जुड़े सभी कर्मचारी और उनसे ताल्लुक रखने वालों की संख्या तकरीबन 20 करोड़ तक पहुंच जाती है। मोर्चे से जुड़े गांव बंदी आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं के मुताबिक यह बंदी महज एक दिन के लिए ही होने वाली है। इस दौरान जैसे सामान्य आंदोलन की तरह शहरों की गतिविधियां और व्यवस्थाएं ठप होती थीं, ठीक वैसे ही गांव की सभी सामान्य गतिविधियों को एक दिन के गांव बंदी आंदोलन से ठप किया जाएगा। मोर्चा के टी कृष्णप्रसाद का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो इस आंदोलन को आगे भी किया जाएगा। उनके संगठन की मांग है कि आखिर किसानों की बेहतरी के लिए केंद्र सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है। तमाम बैठकों और सरकारी वादों के बाद भी केंद्र सरकार पूरी तरह से मांगों को पूरा करने में फेल हो चुकी है।

किसान मोर्चा से जुड़े नेताओं के मुताबिक मध्यप्रदेश में उनके संगठन के जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया है। जबकि देशभर में किसानों के आंदोलन शुरू हो चुके हैं। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि 16 फरवरी को होने वाली हड़ताल को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई भी बातचीत नहीं की जा रही है। ऐसी दशा में संगठन के पास विरोध करने का एक रास्ता सिर्फ गांव बंदी ही बच रहा है। उनका दावा है कि अब तक पूरे देश में गांव बंदी के तौर पर कोई भी बड़ा आंदोलन इस तरह से नहीं किया गया है। टी कृष्णप्रसाद बताते हैं कि उनके आंदोलन में देश के सभी राज्यों के सभी प्रमुख संगठन साथ में जुड़ चुके हैं।

गांव में एक दिन की बंदी का असर व्यापक स्तर पर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। किसान नेताओं की मानें तो गांवों से होने वाली दूध-फल-सब्जी और फूल समेत अन्य उत्पादों की न सिर्फ आपूर्ति रुक सकती है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर बंदी का बड़ा अनुभव भी सामने आएगा। किसान नेताओं की मानें तो गांव बंदी में सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं, बच्चे और वह सभी निवासी शामिल होंगे, जो गांवों में रहते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों के मुताबिक उनका मकसद किसी तरह की अव्यवस्था पैदा करने का नहीं है। वह एक दिन की गांव बंदी के माध्यम से केंद्र सरकार को आगाह करना चाहते हैं कि उनकी मांगे अगर नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में इस तरीके की बड़ी हड़ताल व्यापक स्तर पर शुरू होगी।

 

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