Farmers Protest: सुरक्षा बलों जैसी तैयारी में किसान! शंभू बॉर्डर पर बचाव के लिए किसानों ने बनाईं ये '8' ढाल
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केंद्र सरकार और किसानों के बीच चार दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार ने जो प्रस्ताव दिया था, उसे किसानों ने अस्वीकार कर दिया है। हालांकि सरकार ने पांचवें दौर की बातचीत का प्रस्ताव भी दे दिया है। बुधवार को शंभू बॉर्डर पर तनावपूर्ण स्थिति बताई जा रही है। किसानों ने पहले ही कह दिया था कि वे 21 फरवरी को दिल्ली के लिए कूच करेंगे। किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं। हरियाणा पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, चौथे दौर की बातचीत खत्म होने के बाद किसानों ने शंभू बॉर्डर पर अपनी तैयारी पुख्ता कर दी है। आरोप है कि पंजाब पुलिस ने किसानों को भारी मशीनरी के साथ शंभू बॉर्डर तक पहुंचने दिया। पुलिसिया एक्शन का मुकाबला करने के लिए किसानों ने अपनी सुरक्षा के लिए मुख्यत: आठ तरह की ढाल तैयार की हैं।
पुलिस द्वारा ड्रोन की मदद से किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं। वजह, जब पुलिसिया एक्शन से बचने के लिए किसान, खेतों की तरफ से आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं, तो उन पर ड्रोन के जरिए आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं। इस बार किसानों ने अपने साथ पतंग, चश्मा, गीली बोरी, ट्रैक्टर, जेसीबी, मॉस्क, लोहे की ढाल और लाठी रखी हैं। ये सभी वस्तुएं या उपकरण, किसानों की ढाल हैं। पुलिस द्वारा छोड़े जा रहे ड्रोन को गिराने के लिए किसानों ने पतंग का इस्तेमाल किया है। शंभू बॉर्डर पर पतंग उड़ती हुई देखी जा सकती हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि किसानों ने शंभू बॉर्डर पर कई ड्रोन गिराए हैं। पुलिस पर ऐसे आरोप भी लगे थे कि उन्होंने किसानों पर किसी हल्के-फुल्के केमिकल का इस्तेमाल किया है। हालांकि पुलिस ने इस तरह के केमिकल का इस्तेमाल करने से मना किया है। किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं।
आंसू गैस के गोले से निकलने वाले धुएं से बचाव के लिए किसानों ने चश्मे का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा ड्रोन के जरिए या पुलिस द्वारा दागे जाने वाले आंसू गैस के गोले को जमीन पर गिरते ही उसे खत्म करने के लिए गीली बोरी का प्रयोग किया जा रहा है। जैसे ही गोला गिरता है, किसान उस पर गीली बोरी डाल देते हैं। इससे गोले में आंसू गैस नहीं निकल पाती। किसानों ने 2020-2021 के आंदोलन में ट्रैक्टर का जमकर इस्तेमाल किया था। ट्रैक्टर ट्रॉली के जरिए रोड को जाम किया गया था। इस बार भी ट्रैक्टरों में कई तरह के बदलाव कराए गए हैं। इसका मकसद, पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को तोड़ना है।
खास बात है कि इस बार किसानों ने शंभू बॉर्डर पर जेसीबी मशीनों का इंतजाम कर लिया है। किसानों का प्रयास है कि नदी के दूसरे सिरे पर अस्थायी पुल तैयार कर वहां से खेतों के जरिए होते हुए आगे बढ़ा जाए। शंभू बॉर्डर पर किसानों ने इस बार मास्क का भी इस्तेमाल किया है। इसके पीछे दो मकसद बताए जा रहे हैं। एक, किसी भी पुलिस एक्शन के दौरान उनका चेहरा वीडियोग्राफी में न आए। दूसरा, आंसू गैस या केमिकल जैसा कोई पदार्थ फेंका जाता है, तो उससे बचाव रहे। किसानों ने लोहे की ढाल से अपना बचाव करने का प्रयास किया है।
किसानों के मुताबिक, पुलिस ने उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया है। कई किसानों के फोटो भी जारी किए गए हैं। हालांकि हरियाणा पुलिस के डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने पैलेट गन के इस्तेमाल का खंडन किया था। इससे बचाव के लिए हल्के लोहे की शीट तैयार की हैं। कुछ किसान, पैलेट गन से बचाव के लिए हैवी ग्लास को प्रयोग में ला रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, किसानों के पास लोहे की रॉड व लाठी भी बताई जा रही हैं। इसका इस्तेमाल पुलिस बैरिकेड को हटाने के लिए किया जाता है। शंभू बॉर्डर पर लगभग 16,000 किसानों की उपस्थिति बताई जा रही है। इसके अलावा शंभू बॉर्डर पर लगभग 1,300 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 250 कार, एक दर्जन मिनी बस और बाइक जैसे अनेक छोटे वाहन भी बताए जा रहे हैं।