तमिलनाडु: ग्राहकों की सुविधा के लिए शराब दुकानों पर डिजिटल व्यवस्था, जानें 1 सितंबर से लागू हो रहा नया नियम
तमिलनाडु में टासमैक की खुदरा दुकानों पर 1 सितंबर से एक डिजिटल व्यवस्था शुरू होने जा रही है। इससे ग्राहकों को क्या फायदा मिलेगा, आइए इस बारे में जानते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तमिलनाडु में शराब की खुदरा बिक्री पर सरकारी एकाधिकार रखने वाली संस्था 'टासमैक' (TASMAC) ने राज्यभर की दुकानों के लिए बड़ा एलान किया है। आगामी 1 सितंबर से राज्य की सभी खुदरा दुकानों में पुरानी कागजी प्रक्रिया समाप्त कर नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इस प्रणाली के तहत दुकानों के सुपरवाइजरों को अपने स्टॉक की मांग केवल समर्पित हैंडहेल्ड डिवाइस (हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरण) के माध्यम से भेजनी होगी। इस तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा फायदा सीधे आम ग्राहकों को मिलेगा, जिन्हें अब अपनी स्थानीय मांग और पसंद के आधार पर पसंदीदा ब्रांड आसानी से मिल सकेंगे। यह कदम सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को नए स्तर पर ले जाने वाला साबित होगा।
इस नई डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या है?
टासमैक के प्रबंध निदेशक के. नंतकुमार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, इस तकनीक-संचालित प्रक्रिया का लक्ष्य स्टॉक वितरण को सुव्यवस्थित करना, कागजी कार्रवाई समाप्त करना और आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। असल में, मध्य-2025 तक तमिलनाडु के सभी 38 जिलों और डिपो का एंड-टू-एंड कंप्यूटरीकरण किया जा चुका था। अब 1 सितंबर से लागू हो रही यह नई प्रक्रिया उसी डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करेगी, जिससे मैन्युअल गलतियों और स्टॉक की कमी पर पूरी तरह रोक लगेगी।
हैंडहेल्ड डिवाइस से स्टॉक मंगाने की पूरी प्रक्रिया कैसे काम करेगी?
नई व्यवस्था के बाद जिला प्रबंधक कार्यालयों में जाकर कागजी दस्तावेज जमा करने की प्रथा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसकी नई प्रक्रिया को इस प्रकार डिजाइन किया गया है:
- स्वचालित स्टॉक मांग: प्रत्येक दुकान के लिए पात्रता मात्रा (एलिजिबिलिटी क्वांटिटी) विशिष्ट ब्रांडों और पैक साइज के आधार पर हैंडहेल्ड डिवाइस पर अपने आप प्रदर्शित होगी।
- 20 फीसदी अतिरिक्त स्टॉक: सुपरवाइजर सिस्टम द्वारा निर्धारित मूल आंकड़े को कम नहीं कर सकते, लेकिन वे स्थानीय मांग को देखते हुए ऑर्डर को 20% तक बढ़ा सकते।
- पसंदीदा ब्रांड जोड़ना: यदि कोई लोकप्रिय पंजीकृत ब्रांड स्वचालित सूची में नहीं है, तो सुपरवाइजर उसे स्थानीय ग्राहकों की पसंद के अनुसार सूची में जोड़ सकते हैं।
- ओटीपी आधारित सुरक्षा: अंतिम इंडेंट सबमिशन के लिए सुपरवाइजर के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाले वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) का सत्यापन अनिवार्य होगा।
इस डिजिटलीकरण से आम उपभोक्ताओं और व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
इस तकनीक के आने से शराब की आपूर्ति प्रणाली में मैन्युअल धांधली की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। पहले कई बार मांग के बावजूद मनपसंद ब्रांड उपलब्ध नहीं हो पाते थे, लेकिन अब सिस्टम बिक्री के आंकड़ों को ट्रैक करके सही ब्रांड की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा]। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे ग्राहकों को अपनी पसंद की शराब बिना किसी परेशानी के मिल सकेगी। इसके अलावा, सारा डेटा रीयल-टाइम अपडेट होने से डिपो से दुकानों तक माल की डिलीवरी बेहद तेज हो जाएगी।
वर्तमान में इस योजना की तैयारी और प्रगति की स्थिति क्या है?
1 सितंबर से पूरे राज्य में इसे अनिवार्य करने से पहले वर्तमान में एक पायलट चरण (परीक्षण दौर) चलाया जा रहा है। इस दौरान सिस्टम के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए जिला प्रबंधकों द्वारा हस्ताक्षरित मुद्रित प्रतियों का मिलान किया जा रहा है ताकि तकनीकी खामियों को दूर किया जा सके। सिस्टम में एक बार मात्रा की पुष्टि हो जाने के बाद, उसे अंतिम माना जाएगा और सीधे स्थानीय डिपो को डिस्पैच के लिए भेज दिया जाएगा। इसके भौतिक सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित दुकान के सुपरवाइजर की होगी।