कृषि विधेयकों का विरोध: राजग से अलग हुआ अकाली दल, सुखबीर सिंह बादल ने किया एलान
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हाल ही में पास हुए कृषि विधेयकों को लेकर मोदी सरकार की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने का एलान कर दिया है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि 'हम राजग का हिस्सा नहीं हो सकते हैं, जो इन अध्यादेशों को लाया है। यह सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि शिरोमणि अकाली दल अब एनडीए का हिस्सा नहीं है। उन्होंने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी ने चार घंटे की बैठक के बाद निर्णय लिया है।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की ओर से कहा गया है कि 'पार्टी ने एमएसपी पर किसानों की फसलों के सुनिश्चित विपणन की रक्षा के लिए वैधानिक विधायी गारंटी देने से मना करने के कारण भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। पंजाबी और सिख मुद्दों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता भी इसकी एक वजह है।'
Shiromani Akali Dal (SAD) has decided to pull out of BJP-led NDA alliance because of the centre’s stubborn refusal to give statutory legislative guarantees to protect assured marketing of farmers crops on MSP & its continued insensitivity to Punjabi & Sikh issues: SAD pic.twitter.com/lC3xHczDm2
— ANI (@ANI) September 26, 2020
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि शनिवार रात यहां हुई आपात बैठक में कोर कमेटी ने सर्वसम्मति से भाजपा नीत राजग गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि 'केंद्र की मोदी सरकार ने एमएसपी पर किसानों की फसलों के सुनिश्चित विपणन की रक्षा के लिए सांविधिक विधायी गारंटी देने से मना कर दिया। साथ ही पंजाबी और सिख मुद्दों के प्रति निरंतर असंवेदनशीलता को जारी रखा। जम्मू और कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करने जैसे सिख मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया।'
मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि 'शिरोमणि अकाली दल शांति के अपने मूल सिद्धांतों, सांप्रदायिक सद्भाव और सामान्य रूप से पंजाब, पंजाबी और विशेष रूप से किसानों और किसानों के हितों की रक्षा करेगा।' उन्होंने बताया कि 'यह निर्णय पंजाब के लोगों, विशेषकर पार्टी कार्यकर्ताओं और किसानों के परामर्श से लिया गया है।'
बादल ने कहा कि 'भाजपा सरकार द्वारा लाए गए कृषि विपणन के बिल पहले से ही परेशान किसानों के लिए घातक और विनाशकारी हैं।' उन्होंने कहा कि 'शिअद भाजपा का सबसे पुराना सहयोगी था, लेकिन सरकार ने किसानों की भावनाओं का सम्मान करने की बात नहीं सुनी।'
प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि अकाली दल को पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल और अब राजग छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था क्योंकि भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन किसानों, विपक्ष और अकाली दल के विरोध के बावजूद कृषि बिलों को लाने पर अड़ा हुआ था।
बता दें कि शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल राजग के मुख्य संस्थापक सदस्यों में से एक थे। अकाली-भाजपा गठबंधन ने पंजाब में तीन दशकों तक एक साथ चुनाव लड़ा था। हरसिमरत कौर बादल के केंद्र में मंत्री पद छोड़ने के बाद भी, शिरोमणि अकाली दल पर कांग्रेस द्वारा हमला किया गया था।
इन तीन विधेयकों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच विरोध
- किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक।
- किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता और कृषि सेवा विधेयक।
- आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक।