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Farmers Protest: कर्ज में दब रहे किसान, 5 वर्ष पहले 14 लाख करोड़ ऋण था, अब 25 लाख करोड़ रुपये के पार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 03 Dec 2024 04:49 PM IST
सार

Farmer Debt: 

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Farmers are buried under debt  5 years ago debt was 14 lakh crores now it has crossed 25 lakh crores
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में किसानों द्वारा लिया जाने वाला कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर पांच साल पहले किसानों को दिए गए फसल ऋण की बात करें तो वह 8.25 लाख करोड़ रुपये था। साल 2023-24 में किसानों को दिया गया कुल ऋण 25.47 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) विनियमन के अनुसार, सरकार ने बैंकों को अपने कुल ऋण का 18 प्रतिशत कृषि और संबंद्ध क्षेत्र को प्रदान करने के लिए अनिवार्य किया है। 
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कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के मुताबिक, सरकार पूरे भारत में केंद्र द्वारा 100 प्रतिशत वित्तपोषित संशोधित ब्याज सबवेंशन योजना (एमआईएसएस) नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना को कार्यान्वित कर रही है। इसका मकसद, किसानों को उनकी कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से प्राप्त अल्पकालिक कृषि ऋणों पर रियायती ब्याज दरें प्रदान करना है। 
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  • पिछले पांच वर्ष के दौरान किसानों को दिया गया कुल कृषि ऋण 25.47 लाख करोड़ रुपये है। 
  • साल 2019-20 में फसल ऋण 8.25 लाख करोड़ रुपये था। सावधि ऋण 5.68 लाख करोड़ रुपये था। कुल ऋण 13.93 लाख करोड़ रुपये था। 
  • साल 2020-21 में फसल ऋण 8.94 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस अवधि में सावधि ऋण 6.82 लाख करोड़ रुपये था। कुल ऋण 15.76 लाख करोड़ रुपये हो गया था। 
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  • साल 2021-22 में फसल ऋण 11 लाख करोड़ रुपये था। सावधि ऋण 7.64 लाख करोड़ रुपये हो गया। अगर कुल ऋण की बात करें तो वह आंकड़ा 18.64 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। साल 2022-23 में फसल ऋण 13.19 लाख करोड़ रुपये था। सावधि ऋण 8.36 लाख करोड़ रुपये था। कुल ऋण 21.55 लाख करोड़ रुपये था। 
  • साल 2023-24 में फसल ऋण 15.07 लाख करोड़ रुपये हो गया। सावधि ऋण भी 10.40 लाख करोड़ रुपये था। कुल ऋण 25.47 लाख करोड़ रुपये था। 

वर्ष 2016 से छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक उप सीमा तय की गई है, जो वर्तमान में 10 प्रतिशत है। यानी कुल कृषि ऋण का 56 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों को जाना चाहिए। इसके अलावा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय और बैंकों के सहयोग से केसीसी के प्रचार और संतृप्ति के लिए नियमित रूप से अभियान और शिविर आयोजित करता है। 
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