'मनोहर और दुष्यंत' पर तंज: 600 दिन राज करने के बाद घर में क्यों बंद हो गई 'सरकार'!
हरियाणा में किसान आंदोलन के बाद से प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदलते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ किसान संगठन कई बार टकरा चुके हैं। करनाल और हिसार में तो किसानों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री अभी किसानों की ज्यादा परवाह नहीं कर रहे हैं...
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हरियाणा में मनोहर लाल सरकार के 600 दिन पूरे हो गए हैं। इस मौके पर सरकार ने प्रचार माध्यमों के जरिए अपनी उपलब्धियां लोगों तक पहुंचाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। कांग्रेस पार्टी के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला पर तंज कसते हुए कहा, 600 दिन राज करने के बाद भी सरकार को घर में बंद होना पड़ रहा है। ये नेता जहां भी जाते हैं, जनता उन्हें तत्काल भगा देती है। दरअसल, रणदीप ने यह बात किसान आंदोलन के संदर्भ में कही है। हरियाणा में आंदोलन कर रहे किसान, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और दूसरे मंत्रियों व नेताओं का सार्वजनिक विरोध कर रहे हैं। इसके चलते सरकार को अनेक कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं। रणदीप का इशारा साफ था कि आज दुष्यंत चौटाला, मनोहर सरकार में मलाई चाट रहे हैं, लेकिन वे ध्यान रखें कि चुनाव में उन्हें भी लोगों को जवाब देना है। 'अबकी बार, भाजपा यमुना पार' के बयान पर लोग पूछेंगे।
हरियाणा में किसान आंदोलन के बाद से प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदलते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ किसान संगठन कई बार टकरा चुके हैं। करनाल और हिसार में तो किसानों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री अभी किसानों की ज्यादा परवाह नहीं कर रहे हैं। इस बाबत उनके हाथ में कुछ नहीं है। जैसा केंद्र कहता है, वे वैसा ही कदम उठा लेते हैं। उन्हें चुनाव की चिंता भी नहीं है। वजह, विधानसभा चुनाव 2024 में होने हैं। दूसरा, मनोहर की छवि एक जननेता वाली नहीं है। यहां पर जाति की बात सामने आ जाती है। वे जिस जाति से संबंधित हैं, उसका राजनीति से लगाव या सहभागिता ज्यादा नहीं है। साल 2014 में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होनी थी तो पहले से यह कोई नहीं जानता था कि मनोहर लाल प्रदेश के सीएम होंगे।
सीएम मनोहर लाल ने कहा, सरकार के 600 दिन पूरे हो गए हैं। हमारे विपक्षी हमसे सालों के हिसाब पूछते हैं, लेकिन हम सालों तक नहीं, बल्कि दिनों का भी हिसाब बता सकते हैं। कोरोना महामारी का मुकाबला बड़ी चुनौती थी। हमसे जो बेहतर हो सका, वह हमने किया है। इस दौरान जनहित के काम करने से भी हम पीछे नहीं हटे। पहली सरकारों के मुकाबले हमने डबल काम किया है। हमारे अधिकारियों ने नीति के तहत काम को सिरे चढ़ाया। हम 11 फसलों की खरीद कर रहे हैं। 1700 से 1800 करोड़ रुपये फसल खरीद के लिए सीधे किसानों के खाते में डाले गए हैं। रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा-पंजाब से जुड़ा एसवाईएल मुद्दा उठाया था। इसके 24 घंटे के भीतर शुक्रवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात करने पहुंच गए। विपक्ष ने कहा था, आपने और आपके उप मुख्यमंत्री, दुष्यंत चौटाला ने इतना विकास करवाया है कि हरियाणा के लोग, आप जहां जाते हैं, वहां से तत्काल भगा देते हैं। क्या विकास की ओवरडोज तो नहीं हो गई है।
चुनाव से पहले दुष्यंत कहते थे 'अबकी बार, भाजपा यमुना पार'। लोग उनसे पूछेंगे कि वे गत चुनाव में भाजपा को इतनी दूर छोड़ने की बात कह रहे, लेकिन चुनावी नतीजे आने के बाद वे अपनी पार्टी के साथ खुद ही भाजपा सरकार में शामिल हो गए। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मनोहर लाल ज्यादा चिंतित इसलिए भी नहीं हैं कि प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके खिलाफ उस तरह से मैदान में नहीं आ रहे हैं, जैसे एक विपक्षी दल के नेता को आना चाहिए। वे सोशल मीडिया पर या प्रतीकात्मक तौर से ही मनोहर लाल का विरोध करते हैं। किसान आंदोलन से उनकी दूरी जग जाहिर है। मनोहर लाल को उम्मीद है कि चुनाव तक सब ठीक हो जाएगा। वे यह भी जानते हैं कि लोग जितना दुष्यंत चौटाला के खिलाफ हैं, उतना उनसे नहीं हैं। दुष्यंत चौटाला की पार्टी का जनाधार ही किसान रहे हैं। इसके बावजूद आज चौटाला उनके साथ नहीं हैं। चुनाव में जब यह बात उठेगी तो दुष्यंत को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। रणदीप ने कहा, हरियाणा में हर कोने, हर मोड़ पर, हर कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर क्यों है। हरियाणा की सरकार घरों के अंदर खुद ताला लगाकर बंद क्यों हो गई है। यहां पर रणदीप का मतलब है कि सरकार के मंत्री या विधायक जहां भी जाते हैं, किसान उन्हें काले झंडे दिखा रहे हैं।