फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmer Income will increase by artificial intelligence technique

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से किसान होंगे खुशहाल, बढ़ेगी कई गुना इनकम

Sat, 19 May 2018 08:53 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 19 May 2018 08:53 PM IST
विज्ञापन
Farmer Income will increase by artificial intelligence technique

केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए भविष्य की तकनीक पर काम कर रही है। यह तकनीक किसानों की इनकम बढ़ाने के साथ सटीक-सटीक मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी भी देगी। जल्द ही ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लॉउड मशीन लर्निंग, सैटेलाइड इमेजनरी और एडवांस्ड एनालिटिक्स की मदद से छोटे और मझोले किसानों के दिन फिरने की तैयारी हो रही है। 

विज्ञापन


बुवाई के सही वक्त का चलेगा पता
सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) में एडवाइजर अन्ना रॉय के मुताबिक सरकार का उद्देश्य है कि कैसे तकनीक की मदद से किसानों की इनकम बढ़ाई जाए। 
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि सरकार ने रिमोट सेंसिंग, इमेज रिक्गनाइजेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज, ड्रोन और इसरो की मदद से डाटा एकत्र करने का काम शुरू कर दिया। इसका फायदा यह होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसानों को बुवाई का वक्त, कीड़ों के हमले और मौसम का सटीक-सटीक पूर्वानुमान का बहुत पहले ही पता चल जाएगा। इससे पहले इस तकनीक को कर्नाटक में लागू किया गया था, जिसके बाद वहां के किसानों की आय में 31 फीसदी का इजाफा हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


10 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट शुरू
नीति आयोग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पर बहुत से काम कर रहीं अन्ना रॉय ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 10 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। यह प्रोजेक्ट 10 एस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में शुरू हो चुका है। इसके लिए नीति आयोग ने आईबीएम के साथ साझेदारी की है। उन्हों बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ने केवल कृषि में संसाधनों का सही-सही इस्तेमाल हो सकेगा, बल्कि फसल पैदावार और वैज्ञानिक तरीके खेती में भी मदद मिलेगी। 

रॉय के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जलवायु आधारित कृषि तकनीक और फसल निगरानी की प्रणालियों की पहचान, कीट या रोग प्रकोप की पहले ही भविष्यवाणी करना शामिल है। उनके मुताबिक अभी डाटा एकत्र करने का काम चल रहा है और जून में खरीफ की बुवाई होगी, लेकिन जब दिसंबर में रबि की बुवाई का वक्त आएगा, तब तक यह तकनीक 100 फीसदी काम करना शुरू कर देगी। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को देश के दूसरे जिलों में भी लागू किया जाएगा।  

कीड़ों के हमले की पहले मिलेगी जानकारी

Farmer Income will increase by artificial intelligence technique

तेलंगाना, महाराष्ट्र और एमपी के कुछ गांवों में राज्य सरकारों के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम शुरू हो चुका है। यहां के गांवों के किसानों को एक कॉलसेंटर से जोड़ा जा चुका है, जहां उन्हें मोबाइल पर ऑटोमेटेड वॉयस कॉल आते रहते हैं। इन कॉल्स में मौसम की स्थिति और फसल चरण को एनालिसिस करके पहले ही बता दिया जाता है कि वहां कीड़ों का हमला कब हो सकता है। 

कर्नाटक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
वहीं कर्नाटक में सरकार को जरूरी आवश्यक वस्तुओं जैसे तूर की दाल की कीमतों का तीन महीने पहले ही पूर्वानुमान हो जाता है, जिससे न्यूनतम समर्थम मूल्य की योजना बनाने के लिए काफी वक्त मिल जाता है। 

माइक्रोसॉफ्ट के इस मल्टीवैरिएट एग्रीकल्चरल कमोडिटी प्राइस फोरकास्टिंग मॉडल डेवलप करने का मकसद फ्यूचर कमोडिटी से संबंधित कीमतों की जानकारी पहले ही मिल जाए। इस मॉडल में जियो-स्टेशनरी सैटेलाइट इमेजेज की मदद से रिमोट सेंसिंग डाटा का विश्लेषण किया जाता है ताकि खेती के हर चरण के जरिए फसल की भविष्यवाणी की जा सके। हालांकि इस मॉडल का उपयोग केवल तूर की कीमतों का पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि कर्नाटक तूर की दाल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। 

आर्टिफिशियल बुवाई एप 
हैदराबाद के इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट ने मशील लर्निंग और माइक्रोसॉफट कोर्टाना इंटेलिजेंस सूट की मदद से आर्टिफिशियल बुवाई एप तैयार की है। यह एप किसानों को बुवाई से संबंधित सही वक्त का परामर्श देता है। इसकी खासियत है कि इसके लिए किसानों को अपने खेतों में कोई सेंसर नहीं लगाना पड़ता और न ही कोई अलग से खर्चा करना पड़ता है। इसके लिए कोई स्मार्टफोन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि फीचर फोन पर टेक्स्ट मैसेजेज आ जाते हैं।  

माइक्रोसॉफ्ट ने इस एप में लगभग 30 सालों की फसल बुवाई अवधि के साथ जलवायु डाटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विश्लेषण किया और पता लगाया कि पर्याप्त नमी सूचकांक के साथ बुवाई का सही समय भी पता लगाया। पर्याप्त नमी सूचकांक की मदद से पता लगाया जा सकता है कि फसल को कितने पानी और मिट्टी में कितनी नमी की जरूरत है। इस डाटा के इस्तेमाल से सही-सही भविष्यवाणी की जा सकती है कि किसानों के लिए बुवाई का सही हफ्ता कौन सा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed