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सोशल मीडिया की फर्जी खबरों पर लगेगी रोक, कानून में बदलाव के लिए मसौदा तैयार

Tue, 25 Dec 2018 03:17 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 25 Dec 2018 03:17 AM IST
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fake news on social media will be stopped, draft prepared for law amendment

सोशल मीडिया पर आने वाली फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियिम की धारा-79 में संशोधन करने जा रही है। सरकार ने कानून में बदलाव के लिए मसौदा तैयार कर लिया है। साथ ही सभी पक्षों की राय लेने के लिए इसका मसौदा जारी कर दिया है। विशेषज्ञ, आईटी पेशेवर समेत कोई भी व्यक्ति 15 जनवरी तक इस मसौदे पर अपनी राय सरकार को दे सकता है।

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सरकार द्वारा जारी मसौदे के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों को 72 घंटे के अंदर सरकार के सवालों का जवाब देना होगा। इसके लिए कंपनियों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी और नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी कंपनी के प्रति हर पल अपडेट होने वाले संदेशों पर होगी। मसौदे में कहा गया है कि कंपनियों को मैसेज का एनक्रिप्शन (एक से दूसरे सिरे तक संरक्षित) सरकार को देना होगा। 
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कंपनी को 50 लाख प्रयोगकर्ता से ज्यादा तादाद में होने पर भारत में पंजीकरण कराना होगा और 180 दिन तक डेटा रखना होगा। आईटी मंत्रालय का कहना है कि यह कवायद सोशल मीडिया पर रोजाना आने वाली फर्जी खबरों पर अंकुश लगाने की है। इस मसौदे पर सरकार के लिए विभिन्न पक्षों की राय अहम है जिसके लिए मसौदे को मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी किया गया है और 15 जनवरी तक राय मांगी गई है। 

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तुरंत हटाने होंगे गलत या निर्देशों का अनुपालन नहीं करने वाले संदेश

मसौदे के मुताबिक किसी कानून का उल्लंघन करने वाले, उत्पीड़न करने वाले, देश की एकता-अखंडता या सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले, आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री का सोशल मीडिया में पोस्ट किया जाना प्रतिबंधित होगा। सरकार का मानना है कि इसके जरिए व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडया प्लेटफार्म पर आने वाले भड़काऊ, फर्जी संदेशों या खबरों पर पूरी तरह से रोक लगेगी। विभिन्न पक्षों की राय मिलने के बाद सरकार आईटी एक्ट इंटरमीडियटरी नियम लेकर आएगी। हालांकि मसौदे में उल्लंघन के बाद की जाने वाली कार्रवाई का कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है।
 
मसौदे में कहा गया है कि गलत या निर्देशों का अनुपालन नहीं करने वाले संदेशों को कंपनियों को तत्काल हटाना होगा। साथ की किसी भी मामले में कानून को कायम रखने के मद्देनजर कंपनियां 72 घंटों के भीतर सरकार की एजेंसी, साइबर सुरक्षा या जांच एजेंसी को सूचित कर सकती हैं। कंपनियों को सूचना की सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रबंध करने होंगे जो सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2011 के तहत हैं। सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल फैसले का हवाला देते हुए मसौदे में कहा गया है कि देश की सुरक्षा, सौहार्द, अखंडता, मित्र देशों, कानून व्यवस्था, अदालत की अवमानना या मानहानि के मामले में कंपनियों द्वारा कंप्यूटर संसाधन से कोई छेड़छाड़ किए बगैर 24 घंटे के भीतर मामले की सूचना देनी होगी।  

गौरतलब है कि आईटी मंत्रालय ने कई बार व्हाट्सऐप को फर्जी संदेशों पर रोक लगाने के लिए ताकीद किया है, लेकिन एनक्रिप्शन का हवाला देकर उसकी ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। साथ ही फर्जी संदेश कहां से शुरू हो रहा है यह जानकारी देने के बारे में भी कोई आश्वासन नहीं दिया गया। माना जा रहा है कि इसी के मद्देनजर सरकार यह संशोधन करने जा रही है।

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