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फेसबुक पर भारत में नहीं हो सकती कानूनी कार्रवाई
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Fri, 13 Apr 2018 07:06 AM IST
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फेसबुक यूजर्स का निजी डाटा ब्रिटेन की रिसर्च फर्म कैंब्रिज एनालिटिका से साझा करने की जानकारी सामने आने के बाद भारत ने फेसबुक को नोटिस जारी करते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। क्या भारत में ऐसे कोई कानून है जो ऐसी इंटरनेट कंपनियों पर नकेल कस सके?
फेसबुक ने 2014 में यूजर्स से इंटरनेट के इस्तेमाल में जोखिम से जुड़े एक नियम पर सहमति लेकर खुद को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर लिया था। अगर कंपनी यह साबित करने में कामयाब हो जाती है कि वह एप और यूजर्स के बीच सिर्फ एक माध्यम का काम करती है तो उसे कानून के उल्लंघन का दोषी नहीं माना जा सकता। भारत के आईटी कानून की धारा-79 में 2008 में किया गया संशोधन ऐसी कंपनियों को सुरक्षा देता है।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी कानून की धारा-43ए के तहत भारत में फेसबुक पर कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल हम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि यूजर फेसबुक इंस्टॉल करते समय कंपनी के खिलाफ अमेरिकी कानून के तहत कार्रवाई की सहमति (‘आई एग्री’ पर क्लिक कर) दे चुका होता है। नतीजतन भारतीय यूजर्स भारत में फेसबुक पर डाटा लीक को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते। यही नहीं, समझौते के तहत यूजर्स समूह बनाकर कंपनी के खिलाफ केस नहीं कर सकते।
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सरकार की बेपरवाही का फायदा उठा रहीं कंपनियां : विराग
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता और आईटी मामलों के विशेषज्ञ विराग गुप्ता ने बताया कि कैंब्रिज एनालिटिका ने अपनी सहायक कंपनियों के जरिए भारत में 2003 से 600 जिलों के सात लाख गांवों का जाति संबंधी डाटा जुटाया और राजनीतिक दलों ने इसका इस्तेमाल किया। 2007 में अमेरिका ने भारत की छह अरब से ज्यादा जानकारियों को नौ इंटरनेट कंपनियों के जरिये हासिल किया। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर संप्रग सरकार चुप रही। फिर उन्हीं कंपनियों के लिए राजग सरकार ने पलक पांवड़े बिछा दिए। गुप्ता ने बताया कि 2000 के बाद सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम में जरूरी बदलाव नहीं हुए। इंटरनेट कंपनियां सरकार की इसी बेपरवाही का फायदा उठा रही हैं।
टैक्स चुकाने से भी बच जाती हैं इंटरनेट कंपनियां
विराग गुप्ता ने कहा कि गूगल, फेसबुक की आमदनी का बड़ा हिस्सा आयरलैंड और अमेरिका चला जाता है। भारत में मौजूद इनकी सहायक कंपनियां आमदनी के छोटे हिस्से पर टैक्स देकर पैरेंट कंपनियों को जवाबदेही से मुक्त कर देती हैं। एक अनुमान के अनुसार फेसबुक समेत विदेशी इंटरनेट कंपनियां भारत से 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर रही हैं।
भारतीय यूजर्स के लिए शिकायत अधिकारी विदेश में
सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियम-2011 की धारा-3 (11) के अनुसार भारत में कारोबार कर रही हर इंटरनेट कंपनी को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना जरूरी है। अगस्त 2013 में फेसबुक ने आयरलैंड और गूगल ने कैलिफोर्निया में शिकायत अधिकारी की नियुक्ति कर दी। ऐसे में यूजर सिर्फ ई-मेल के जरिये शिकायत कर सकता है।
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फेसबुक ने 2014 में यूजर्स से इंटरनेट के इस्तेमाल में जोखिम से जुड़े एक नियम पर सहमति लेकर खुद को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर लिया था। अगर कंपनी यह साबित करने में कामयाब हो जाती है कि वह एप और यूजर्स के बीच सिर्फ एक माध्यम का काम करती है तो उसे कानून के उल्लंघन का दोषी नहीं माना जा सकता। भारत के आईटी कानून की धारा-79 में 2008 में किया गया संशोधन ऐसी कंपनियों को सुरक्षा देता है।
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कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी कानून की धारा-43ए के तहत भारत में फेसबुक पर कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल हम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि यूजर फेसबुक इंस्टॉल करते समय कंपनी के खिलाफ अमेरिकी कानून के तहत कार्रवाई की सहमति (‘आई एग्री’ पर क्लिक कर) दे चुका होता है। नतीजतन भारतीय यूजर्स भारत में फेसबुक पर डाटा लीक को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते। यही नहीं, समझौते के तहत यूजर्स समूह बनाकर कंपनी के खिलाफ केस नहीं कर सकते।
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सरकार की बेपरवाही का फायदा उठा रहीं कंपनियां : विराग
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता और आईटी मामलों के विशेषज्ञ विराग गुप्ता ने बताया कि कैंब्रिज एनालिटिका ने अपनी सहायक कंपनियों के जरिए भारत में 2003 से 600 जिलों के सात लाख गांवों का जाति संबंधी डाटा जुटाया और राजनीतिक दलों ने इसका इस्तेमाल किया। 2007 में अमेरिका ने भारत की छह अरब से ज्यादा जानकारियों को नौ इंटरनेट कंपनियों के जरिये हासिल किया। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर संप्रग सरकार चुप रही। फिर उन्हीं कंपनियों के लिए राजग सरकार ने पलक पांवड़े बिछा दिए। गुप्ता ने बताया कि 2000 के बाद सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम में जरूरी बदलाव नहीं हुए। इंटरनेट कंपनियां सरकार की इसी बेपरवाही का फायदा उठा रही हैं।
टैक्स चुकाने से भी बच जाती हैं इंटरनेट कंपनियां
विराग गुप्ता ने कहा कि गूगल, फेसबुक की आमदनी का बड़ा हिस्सा आयरलैंड और अमेरिका चला जाता है। भारत में मौजूद इनकी सहायक कंपनियां आमदनी के छोटे हिस्से पर टैक्स देकर पैरेंट कंपनियों को जवाबदेही से मुक्त कर देती हैं। एक अनुमान के अनुसार फेसबुक समेत विदेशी इंटरनेट कंपनियां भारत से 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर रही हैं।
भारतीय यूजर्स के लिए शिकायत अधिकारी विदेश में
सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियम-2011 की धारा-3 (11) के अनुसार भारत में कारोबार कर रही हर इंटरनेट कंपनी को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना जरूरी है। अगस्त 2013 में फेसबुक ने आयरलैंड और गूगल ने कैलिफोर्निया में शिकायत अधिकारी की नियुक्ति कर दी। ऐसे में यूजर सिर्फ ई-मेल के जरिये शिकायत कर सकता है।