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शोध में खुलासा: सूर्य से हजार गुना बड़े तारे में विस्फोट की आशंका गलत
Sun, 20 Jun 2021 06:52 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 20 Jun 2021 06:52 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो :
Pixabay
विस्तार
करीब दो साल पहले अचानक धुंधले पड़े ओरियन तारामंडल के विशाल लाल तारे 'बीटलजूस' में विस्फोट (सुपरनोवा) की आशंका गलत साबित हुई है। आकार में यह सूरज का एक हजार गुना, जबकि द्रव्यमान में 20 गुना ज्यादा है।
ताजा अध्ययन में पता लगा है कि इस तारे की चमक में धूल के बड़े बादल के कारण कमी आई थी, जिसके चलते इसमें विस्फोट की अटकलें लगाई जाने लगीं। माना जा रहा था कि यह विशाल तारा दुनिया को अलविदा कह सकता है।
नेचर पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक, लंबे समय से बीटलजूस पर नजर बनाए रखने वाले खगोलविदों ने चिली में बहुत बड़े टेलीस्कोप (वीएलटी) से ताजा परिणाम लिए हैं।
आखिरी बार 1604 में सुपरनोवा हुआ था कोई तारा
शोध के मुताबिक, इससे साफ है कि बीटलजूस बहुत जल्द सुपरनोवा नहीं होने जा रहा। हालांकि, ऐसा होते देखना अद्भुत और अविश्वसनीय होगा। खगोलविदों के पास मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक, हमारी आकाशगंगा में आखिरी बार कोई तारा 1604 में सुपरनोवा हुआ था।
कूल स्पॉट-धूल की करामात
शोधकर्ताओं ने बीटलजूस के धुंधले पड़ने से पहले और बाद वाली तस्वीरों की तुलना की। इसके बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि या तो तारे की सतह पर कोई बड़ा ठंडा स्थान (लार्ज कूल स्पॉट) बना था या फिर इसके सामने धूल का वृहद बादल तैयार हुआ, जिसके चलते धरती से यह धुंधला दिखने लगा।
पहले तापमान गिरा, फिर गैसें निकलीं
कैथोलिक यूनिवर्सिटी लुवेन की खगोल विज्ञानी और शोध में सहयोगी रही एमिली कनन का कहना है कि बीटलजूस को लेकर यह दोनों बातें ही सही निकलीं। हमने पाया कि तारे पर तापमान में गिरावट के चलते पहले वहां कूल स्पॉट बना। फिर यहां से निकली गैसें धूल में बदल गईं। यानी पहले तो कूल स्पॉट के कारण तारा धरती से मंद दिखने लगा और ऊपर से धूल भरे वातावरण ने इसकी चमक और फीकी कर दी।