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एक्सप्लेनर: पंजाब में सरकार तक बदल चुका चिट्टा, पर नहीं लग सकी इस पर लगाम, क्या उसी माफिया ने ली झोटा की जान?
Tue, 13 Oct 2026 04:52 PM IST
रिया दुबे
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: रिया दुबे
Updated Tue, 13 Oct 2026 04:52 PM IST
सार
पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की हत्या ने चिट्टे के कारोबार और ड्रग्स तस्करी पर फिर सवाल खड़े किए हैं। आखिर कौन थे परमिंदर झोटा और भारत में नशे का अवैध कारोबार रोकना इतनी बड़ी चुनौती क्यों बना हुआ है? आइए जानते हैं।
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परमिंदर झोटा की हत्या
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
ड्रग्स की तस्करी और नशे की लत देश के सामने बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। इसी बीच, पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की आज गोली मारकर हत्या कर दी गई। झोटा का नाम पंजाब के उन नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं में गिना जाता है, जो लंबे समय से युवाओं को ड्रग्स की समस्या से बचाने में जुटे थे।
आइये जानते हैं कि परमिंदर सिंह झोटा कौन थे? उनकी हत्या कैसे हुई? हत्या के बाद परिवार और नेताओं का क्या कहना है? भारत ड्रग की समस्या से कैसे जूझ रहा है? सबसे ज्यादा मामले किन राज्यों में आते हैं? पंजाब में कितने मामले आएं हैं?
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झोटा ने 2023 में अपनी टीम बनाई थी। उनके दोस्त और नशा तस्करी के खिलाफ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गुरदीप सिंह ने तब बताया था कि झोटा खुद नशे की लत से जूझ चुके थे। उनके मुताबिक, झोटा ने अपनी जिंदगी बदलने की कोशिश की थी और अब उन लोगों के खिलाफ अभियान चला रहे थे, जो कभी उन्हें नशा बेचते थे। शुरुआत के अभियानों के दौरान झोटा के खिलाफ कानून को हाथ में लेने के आरोप लगे। उन पर कई एफआईआर भी हुईं, लेकिन उन्हें जनसमर्थन भी मिलता रहा।
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आइये जानते हैं कि परमिंदर सिंह झोटा कौन थे? उनकी हत्या कैसे हुई? हत्या के बाद परिवार और नेताओं का क्या कहना है? भारत ड्रग की समस्या से कैसे जूझ रहा है? सबसे ज्यादा मामले किन राज्यों में आते हैं? पंजाब में कितने मामले आएं हैं?
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कौन थे परमिंदर सिंह झोटा?
परमिंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा और आसपास के इलाकों में नशे केअवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। सोशल मीडिया पर उन्हें 'झोटा' नाम से पहचान मिली थी। वह अपनी टीम के साथ उन मेडिकल स्टोरों पर पहुंचते थे, जहां नशीली दवाओं की अवैध बिक्री का संदेह होता था। वह दुकानदारों से सवाल करते और अपने अभियान के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते थे। उनका मुख्य निशाना चिट्टा यानी हेरोइन और मेडिकल स्टोरों से कथित तौर पर बेची जाने वाली नशीली गोलियां थीं।
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झोटा ने 2023 में अपनी टीम बनाई थी। उनके दोस्त और नशा तस्करी के खिलाफ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गुरदीप सिंह ने तब बताया था कि झोटा खुद नशे की लत से जूझ चुके थे। उनके मुताबिक, झोटा ने अपनी जिंदगी बदलने की कोशिश की थी और अब उन लोगों के खिलाफ अभियान चला रहे थे, जो कभी उन्हें नशा बेचते थे। शुरुआत के अभियानों के दौरान झोटा के खिलाफ कानून को हाथ में लेने के आरोप लगे। उन पर कई एफआईआर भी हुईं, लेकिन उन्हें जनसमर्थन भी मिलता रहा।
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परमिंदर झोटा की हत्या
- फोटो : Amar Ujala
कैसे हुई परमिंदर सिंह झोटा की हत्या?
आज सुबह झोटा मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। वह एक बुजुर्ग से कथित तौर पर नशीली दवा खरीदने को लेकर दुकानदार से सवाल कर रहे थे। उन्होंने दुकानदार से सीसीटीवी फुटेज दिखाने को भी कहा। इस दौरान दोनों के बीच बहस हुई। झोटा के फेसबुक लाइव वीडियो में यह पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।करीब सवा चार मिनट की बहस के बाद दुकानदार ने झोटा पर गोली चला दी। प्राथमिक रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर ने परमिंदर सिंह झोटा को निशाना बनाकर बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग की। अचानक हुए हमले के दौरान झोटा के पेट और पांव में गोलियां लगीं, जिसके कारण वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों और उनके साथियों ने तुरंत उन्हें और अन्य घायलों को संभाला। आनन-फानन में सभी घायलों को इलाज के लिए मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने परमिंदर सिंह झोटा को मृत घोषित कर दिया। वहीं, हमले में गंभीर रूप से जख्मी हुए तीन अन्य युवक इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती हैं। तीनों घायलों की पहचान कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह और बलतेज सिंह के तौर पर हुई है।
इलाके में भारी जन-आक्रोश
परमिंदर सिंह झोटा पंजाब के युवाओं और स्थानीय लोगों के बीच एक बेहद लोकप्रिय चेहरा थे। उनकी नशा विरोधी मुहिम की बदौलत मालवा क्षेत्र के कई गांवों में 'नशा रोको कमेटियों' का गठन हुआ था। यही वजह है कि उनकी मौत की पुष्टि होते ही मानसा में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। अस्पतालों और मुख्य बाजारों में लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील जगहों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
कैसे की गई हत्या?
- फोटो : Amar Ujala
हत्या के बाद परिवार ने क्या कहा?
झोटा की हत्या के बाद उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री से अपने पोते-पोतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार उनके बेटे को सुरक्षा देने में नाकाम रही। उन्होंने कहा कि परिवार को अब अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता है। झोटा के पिता ने नशे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प भी जताया। उन्होंने पंजाब के लोगों से मानसा में बड़े विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और नशे के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, नशे के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।हत्या पर नेताओं ने क्या कहा?
झोटा की हत्या के बाद विपक्षी नेताओं ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और राज्य सरकार के नशा विरोधी अभियान पर सवाल उठाए। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य की कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ अभियान की विफलता दिखाती है। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने भी सरकार के नशा विरोधी अभियान पर सवाल उठाए। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी घटना को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की।
पंजाब की स्थिति
- फोटो : Amar Ujala
हत्या को लेकर पुलिस ने क्या कहा, कैसे चल रही जांच?
हत्या की सूचना मिलने के बाद पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की और हमलावरों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। मानसा जिले के प्रवेश और निकास मार्गों पर नाकाबंदी भी की गई, ताकि आरोपियों की तलाश की जा सके और उनके भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी संभावित पहलुओं से जांच की जा रही है। हत्या के पीछे की वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
भारत के सामने क्या चुनौती है?
एनसीबी की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया के दो प्रमुख अवैध ड्रग उत्पादन क्षेत्रों के बीच स्थित है। एक तरफ गोल्डन क्रिसेंट है, जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान का क्षेत्र आता है, जबकि दूसरी तरफ गोल्डन ट्राएंगल है, जिसमें म्यांमार, लाओस और थाईलैंड शामिल हैं।
भारत दोनों दिशाओं से आने वाले अवैध ड्रग प्रवाह से प्रभावित रहा है। देश की 15 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी भूमि सीमा और 11 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी समुद्री सीमा निगरानी की चुनौती को बढ़ाती है।
म्यांमार, नेपाल और बांग्लादेश से लगी सीमाओं के कई हिस्सों में कठिन भूभाग और अनौपचारिक रास्ते हैं। घने जंगल, पहाड़ी क्षेत्र, रेगिस्तान और नदी वाले इलाके सीमा की निगरानी को मुश्किल बनाते हैं।
चुनौती सिर्फ तस्करी के रास्तों तक सीमित नहीं है। भारत अब ड्रग्स के लिए केवल पारगमन वाला देश नहीं है, बल्कि एक बड़ा घरेलू बाजार भी है। इसके अलावा देश में बड़ा फार्मास्युटिकल विनिर्माण आधार और प्रीकर्सर केमिकल का उत्पादन होता है, जिनके गलत इस्तेमाल से सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध उत्पादन का खतरा पैदा हो सकता है।
भौगोलिक स्थिति
- फोटो : Amar Ujala
कौन सा राज्य बना ड्रग का सबसे बड़ा निशाना?
भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर जैसे जिले ड्रोन तस्करी के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं। ड्रोन से जुड़े 305 मामलों में से 298 मामले अकेले पंजाब में दर्ज किए गए।इनके जरिए मुख्य रूप से हाई-प्योरिटी हेरोइन और मेथामफेटामाइन की खेप भेजी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा अब इस हवाई तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है।
तीन चुनाव से हो रही नशा मुक्त पंजाब की बात
2017 का विधानसभा चुनाव हो या 2022 का चुनाव या फिर 2027 का होने वाला चुनाव, पंजाब में हर बार चिट्टा चुनावी मुद्दा रहता है। कई बड़े नेताओं पर इसकी तस्करी में शामिल होने के आरोप लगे। नशा खत्म करने का वादा करके अलग-अलग दल सत्ता में आए पर राज्य में हालात नहीं बदले। आने वाले चुनाव में भी चिट्टा और नशे की तस्करी बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।पंजाब में ड्रग्स की जब्ती और कार्रवाई के आंकड़े
गृह मंत्रालय की ओर से जुलाई 2026 में जारी एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में 2024 के दौरान 42,951.283 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए। इससे पहले 2023 में 47,609.380 किलोग्राम, 2022 में 49,421.858 किलोग्राम, 2021 में 38,783.170 किलोग्राम और 2020 में 37,364.676 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए थे।- 2024: 14,593 लोग गिरफ्तार हुए और 7,782 लोगों को दोषी ठहराया गया।
- 2023: 18,843 लोग गिरफ्तार हुए और 7,910 लोगों को दोषी ठहराया गया।
- 2022: 17,853 लोग गिरफ्तार हुए और 4,685 लोगों को दोषी ठहराया गया।
- 2021: 14,078 लोग गिरफ्तार हुए और 3,262 लोगों को दोषी ठहराया गया।
- 2020: 11,455 लोग गिरफ्तार हुए और 1,652 लोगों को दोषी ठहराया गया।
ड्रग तस्करी के नए तरीके
- फोटो : Amar Ujala
सीमा के साथ ऑनलाइन नेटवर्क भी बना नया रास्ता
ड्रग तस्करी के तरीके भी बदल रहे हैं। 26 जून 2026 को जारी विजन डॉक्यूमेंट में ड्रोन से ड्रग्स गिराने, समुद्री रास्ते से कंटेनर कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो भुगतान, ऑनलाइन ऑर्डर-टू-डिलीवरी मॉडल और पार्सल जैसे तरीकों का जिक्र किया गया है।यानी तस्करी का नेटवर्क अब सिर्फ जमीन या सीमा तक सीमित नहीं है। तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी ड्रग्स की खरीद, भुगतान और सप्लाई का नेटवर्क बनाया जा रहा है।
सिंथेटिक ड्रग्स की फैक्ट्रियां भी बढ़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीबी ने 2025 में 30 अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़ किया। यह संख्या पिछले तीन वर्षों के कुल मामलों से भी ज्यादा है। इन लैब में मुख्य रूप से मेफेड्रोन, एफेड्रिन और अवैध साइकोट्रॉपिक टैबलेट बनाई जा रही थीं। महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश ऐसे नेटवर्क के प्रमुख केंद्र रहे।
फार्मास्यूटिकल दवाओं का भी हो रहा दुरुपयोग
रिपोर्ट में फार्मास्यूटिकल ड्रग डायवर्जन में भी बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है।
- 2021 से 2025 के बीच इसमें 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- इस दौरान बरामदगी 2,43,111 किलोग्राम तक पहुंची और बाद में 2,37,390 किलोग्राम रही।
- पंजाब में 8.95 लाख से अधिक कोडीन आधारित कफ सिरप की बोतलें जब्त की गईं।
- इसके अलावा बुप्रेनॉर्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं की अवैध सप्लाई भी बड़े पैमाने पर सामने आई।
2025 में एनसीबी ने कितनी कार्रवाई की?
- एजेंसी ने 1,33,965 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1,980 करोड़ रुपये थी।
- इसी दौरान 447 मामलों में 994 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 25 विदेशी नागरिक थे।
- अदालतों में 131 मामलों में 265 ड्रग अपराधियों को सजा दिलाई गई। इनमें 39 को अधिकतम 20 साल की सजा मिली, जबकि 210 को 10 साल या उससे ज्यादा लेकिन 20 साल से कम की सजा मिली। इन दोषियों पर कुल 3.3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
- 2025 में एनसीबी की दोषसिद्धि दर 66.8 प्रतिशत रही, जबकि 2024 में यह 60.8 प्रतिशत थी।