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Parliament Panel: 'आयुष सेवाओं का विस्तार कर कैंसर उपचार में एकीकृत पद्धति अपनाई जाए', संसदीय समिति की सिफारिश

Thu, 21 Aug 2025 03:17 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 21 Aug 2025 03:17 PM IST
सार

समिति ने सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) जैसी योजनाओं की सराहना की, जो गरीब मरीजों को कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराती हैं। लेकिन यह भी कहा कि दवा कंपनियों की ओर से चलाए जाने वाले रोगी सहायता कार्यक्रम सीमित हैं। 

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Expand AYUSH-based services to promote integrative oncology approaches: Parl panel, News in Hindi
संसद भवन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्यसभा की याचिकाओं पर गठित समिति ने सिफारिश की है कि देशभर में आयुष-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं (आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध) का संस्थागत ढांचा बढ़ाया जाए, ताकि कैंसर के इलाज में एकीकृत पद्धति अपनाई जा सके और मरीजों को पारंपरिक ज्ञान-आधारित विविध उपचार विकल्पों का लाभ मिल सके। बता दें कि इस समिति की अध्यक्षता नारायण दास गुप्ता कर रहे हैं। बुधवार को पेश की गई समिति की 163वीं रिपोर्ट में कहा गया कि कैंसर उपचार में एलोपैथिक पद्धति की तुलना में आयुष चिकित्सा की हिस्सेदारी अभी भी बहुत कम है।
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हर राज्य में बने आयुष-आधारित कैंसर संस्थान

संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की तर्ज पर हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में आयुष-आधारित कैंसर संस्थान स्थापित किए जाएं। इससे लोगों को अधिक विकल्प मिलेंगे और कैंसर से लड़ने में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ उठाया जा सकेगा।

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कैंसर को 'सूचनीय रोग' घोषित करने की मांग
रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंसर के मामलों की विश्वसनीय जानकारी बेहद जरूरी है। फिलहाल, नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) केवल लगभग 18% आबादी को कवर करता है, जो पूरे देश की स्थिति बताने के लिए अपर्याप्त है। समिति ने सिफारिश की कि कैंसर को देशभर में सूचनीय रोग घोषित किया जाए। ऐसा होने से हर मामले की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी, वास्तविक आंकड़े मिलेंगे, निगरानी मजबूत होगी और बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी। कुछ राज्यों ने पहले से कैंसर को सूचनीय बनाया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करना जरूरी है।


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सीएसआर फंड का इस्तेमाल कैंसर इलाज में
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैंक, सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) और निजी कंपनियां कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत बड़ी रकम खर्च करती हैं, लेकिन यह अधिकतर शिक्षा, महिलाओं के उत्थान और स्वास्थ्य जैसे सामान्य क्षेत्रों तक सीमित रहती है। समिति ने सुझाव दिया कि सीएसआर फंड का एक निश्चित हिस्सा कैंसर देखभाल के लिए आरक्षित होना चाहिए। इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में डायग्नोस्टिक सेंटर, रेडियोथेरेपी यूनिट और पेलियेटिव केयर सुविधाएं स्थापित करने में मदद मिलेगी।

समिति ने सिफारिश की कि ज्यादा दवा कंपनियों को ऐसे कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। इसके साथ ही, इन कार्यक्रमों के तहत मरीजों को इलाज की विधियों, सरकारी योजनाओं और दवाओं के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।

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