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प्रगति 2026: साइलेंट के9 कमांडो और रोबोटिक डॉग्स ने दिखाई आधुनिक सैन्य ताकत, रामपुर हाउंड बना आकर्षण
Tue, 26 May 2026 03:40 PM IST
नवीन पारमुवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरोई
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Tue, 26 May 2026 03:40 PM IST
सार
पूर्वोत्तर में चल रहे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में भारतीय सेना के जांबाज कुत्तों और आधुनिक रोबोटिक डॉग्स ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। बेल्जियन मेलिनोइस से लेकर स्वदेशी रामपुर हाउंड तक ने कठिन स्थितियों में काम करने की अपनी अद्भुत क्षमता दिखाकर दुनिया को हैरान कर दिया।
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प्रगति 2026 में सेना का दमखम।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Pragati 2026: भारतीय सेना के बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास एक्सरसाइज प्रगति 2026 में इस बार सैनिकों के साथ सेना के प्रशिक्षित के9 वॉरियर्स आकर्षण का केंद्र बने। पूर्वोत्तर में चल रहे इस संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान भारतीय सेना के डॉग स्क्वॉड ने मित्र देशों की सेनाओं के सामने अपनी अहम भूमिका का प्रदर्शन किया। विस्फोटक पहचान, ट्रैकिंग और इंटरवेंशन ऑपरेशन में डॉग्स की क्षमताओं ने विदेशी सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा।
पूर्वोत्तर भारत में आयोजित इस अभ्यास में भारतीय सेना के तीन विशेष प्रशिक्षित कुत्तों ने हिस्सा लिया। इनके नाम एलन, विक्टर और डियो हैं। एलन बेल्जियन मेलिनोइस नस्ल का असॉल्ट डॉग है। विक्टर भारतीय नस्ल का रामपुर हाउंड ट्रैकर डॉग है। वहीं डियो लैब्राडोर नस्ल का कुत्ता है जिसे विस्फोटक पहचानने में महारत हासिल है। इन तीनों ने अलग अलग ऑपरेशनल मोर्चों पर अपनी दक्षता साबित की।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने गुवाहाटी में इस अभ्यास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभ्यास की सबसे खास बात भारतीय देसी नस्ल रामपुर हाउंड की मौजूदगी रही। विक्टर नाम के इस डॉग ने कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सहनशक्ति और तेज ट्रैकिंग कौशल का प्रदर्शन किया। भारतीय नस्ल के कुत्तों को सेना में शामिल करना आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है।
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लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा, 'अभ्यास के दौरान सेना के तीन विशेष प्रशिक्षित सैन्य कुत्तों एलन, विक्टर और डियो ने अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं का प्रदर्शन किया। भारतीय नस्लों को ऑपरेशनल भूमिकाओं में शामिल करना स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।'
एक्सरसाइज प्रगति 2026 के दौरान के9 टीमों ने दिखाया कि वह रेगिस्तान से लेकर ग्लेशियर तक हर जगह प्रभावी हैं। सेना ने विस्फोटकों का पता लगाने और दुश्मन की गतिविधियों को ट्रैक करने में इनकी भूमिका को साइलेंट फोर्स मल्टीप्लायर बताया है। यह टीमें युद्ध के मैदान में सैनिकों की ताकत को कई गुना बढ़ा देती हैं।
इस बार अभ्यास में पारंपरिक सैन्य कुत्तों के साथ रोबोटिक डॉग्स का प्रदर्शन भी किया गया। सेना के अधिकारियों के अनुसार भविष्य के युद्धों में प्रशिक्षित कुत्तों और आधुनिक रोबोटिक तकनीक का तालमेल सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगा। असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयोजित यह अभ्यास भारत की सामरिक क्षमता और मित्र देशों के साथ सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
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पूर्वोत्तर भारत में आयोजित इस अभ्यास में भारतीय सेना के तीन विशेष प्रशिक्षित कुत्तों ने हिस्सा लिया। इनके नाम एलन, विक्टर और डियो हैं। एलन बेल्जियन मेलिनोइस नस्ल का असॉल्ट डॉग है। विक्टर भारतीय नस्ल का रामपुर हाउंड ट्रैकर डॉग है। वहीं डियो लैब्राडोर नस्ल का कुत्ता है जिसे विस्फोटक पहचानने में महारत हासिल है। इन तीनों ने अलग अलग ऑपरेशनल मोर्चों पर अपनी दक्षता साबित की।
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रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने गुवाहाटी में इस अभ्यास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभ्यास की सबसे खास बात भारतीय देसी नस्ल रामपुर हाउंड की मौजूदगी रही। विक्टर नाम के इस डॉग ने कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सहनशक्ति और तेज ट्रैकिंग कौशल का प्रदर्शन किया। भारतीय नस्ल के कुत्तों को सेना में शामिल करना आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है।
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#WATCH | Amid tactical drills and multinational training at Exercise PRAGATI 2026, the Indian Army’s four-legged warriors added a distinctive and powerful dimension to the exercise. Army dogs trained alongside troops from friendly foreign countries, showcasing their role in… pic.twitter.com/6XSiDacpiR
— ANI (@ANI) May 26, 2026
लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा, 'अभ्यास के दौरान सेना के तीन विशेष प्रशिक्षित सैन्य कुत्तों एलन, विक्टर और डियो ने अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं का प्रदर्शन किया। भारतीय नस्लों को ऑपरेशनल भूमिकाओं में शामिल करना स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।'
एक्सरसाइज प्रगति 2026 के दौरान के9 टीमों ने दिखाया कि वह रेगिस्तान से लेकर ग्लेशियर तक हर जगह प्रभावी हैं। सेना ने विस्फोटकों का पता लगाने और दुश्मन की गतिविधियों को ट्रैक करने में इनकी भूमिका को साइलेंट फोर्स मल्टीप्लायर बताया है। यह टीमें युद्ध के मैदान में सैनिकों की ताकत को कई गुना बढ़ा देती हैं।
इस बार अभ्यास में पारंपरिक सैन्य कुत्तों के साथ रोबोटिक डॉग्स का प्रदर्शन भी किया गया। सेना के अधिकारियों के अनुसार भविष्य के युद्धों में प्रशिक्षित कुत्तों और आधुनिक रोबोटिक तकनीक का तालमेल सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगा। असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयोजित यह अभ्यास भारत की सामरिक क्षमता और मित्र देशों के साथ सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।