मॉब लिंचिंग के शिकार अखलाक हत्याकांड से था इंस्पेक्टर सुबोध कुमार का गहरा नाता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुलंदशहर में भीड़ हिंसा का शिकार हुए स्याना कोतवाली के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार राठौर का 2015 में बिसाहड़ा के बहुचर्चित मॉब लिंचिंग के शिकार अखलाक हत्याकांड से गहरा नाता है। मोहम्मद अखलाक जब मॉब लिचिंग का शिकार हुए थे, उस दौरान सुबोध वहां के थाने में तैनात थे।
अखलाक के भाई जान मोहम्मद ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि जिस वक्त उनके भाई के साथ मॉब लिंचिंग हुई थी उस समय सुबोध कुमार घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले पुलिसकर्मी थे। जान मोहम्मद ने बताया कि उन्हें सुबोध कुमार के उग्र भीड़ के शिकार होने का बेहद दुख है। उन्होंने बताया कि सुबोध कुमार ही अपनी जीप में घायल अखलाक को अस्पताल लेकर गए थे और वो इस केस में पहले जांच अधिकारी थे।
जान मोहम्मद के मुताबिक बिसाहड़ा में बीफ के शक में अखलाक की 28 सितंबर 2015 की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया गया था। उन्होंने बताया कि सुबोध कुमार बेहद संवेदनशील होने के साथ जांच को लेकर उनका रवैया बेहद सहयोगी था। उन्होंने बताया कि बाद में सुबोध कुमार का तबादला बनारस फिर वृंदावन और उसके बाद वे स्याना थाने में एसओ बनाए गए। अखलाक मामले में सुबोध के बाद प्रदीप कुमार और फिर रवींद्र राठी जांच अधिकारी बने।
एनसीआरबी में शामिल होगा मॉब लिंचिंग
वहीं मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार भी अब मॉब लिंचिंग का डाटा अलग से रखने की तैयारी कर रही है। सरकार जल्द ही 2017 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में इसे शामिल करेगी और जल्द ही इसका ऐलान भी करेगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जुलाई 2017 से सरकार के पास यह प्रस्ताव लंबित था।
जान मोहम्मद ने बताया कि मॉब लिंचिंग को लेकर एनसीआरबी का डेटा अलग से बनाने को लेकर कुछ होने वाला नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि ऐसी घटनाओं पर पूर्णतया अंकुश लगे। सरकार को चाहिए कि वह इस कानून बना कर लाए और इसे सख्ती से लागू करे।
गौरतलब है कि दिल्ली के पास उत्तर प्रदेश में दादरी के बिलाहदा गांव में गौमांस के नाम पर उग्र भीड़ ने वायुसेना कर्मी के 50 वर्षीय पिता की पीट-पीटकर इसलिए हत्या कर दी। मोहम्मद अखलाक और उसके बेटे को गांववाले घर से बाहर घसीटकर लाए और उन्हें ईंटों से जमकर पीटा, जिसके बाद अखलाक की मौत हो गई, जबकि उसका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था।